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एफपीओ से जुड़कर कम लागत में अधिक मुनाफे वाली खेती कर सकते हैं किसान
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एफपीओ से जुड़कर कम लागत में अधिक मुनाफे वाली खेती कर सकते हैं किसान
फुलसिंघा गांव में एफपीओ की बैठक में अधिकारियों ने समझाए एफपीओ से जुड़ने के फायदे
संभल। सीएससी सरर्सी कृषक उत्पादकता समूह (एफपीओ) की बुधवार को फुलसिंघा गांव में बैठक हुई। इसमें किसानों को एफपीओ से जुड़कर खेती करने के तरीके बताए गए। कहा गया कि एफपीओ के माध्यम से कम लागत में अधिक मुनाफे वाली खेती की जा सकती है। इसलिए किसान इसे अपनाएं।
दरअसल, शासन की मंशा किसानों को अब उद्योगों की तर्ज पर खेती कराने की है। ऐसे में कृषक उत्पादकता समूह से जुड़े किसानों को किसी एक फसल से जोड़कर खेती का मौका मिलेगा। किसान पारंपरिक तरीके से अलग-अलग एक साथ किसी फसल को बोएंगे। उन्हें बाजार भी अच्छा मिलेगा और उनकी फसलों के किसानों को सही दाम भी मिल सकेंगे। किसानों को फसलों के सही दाम आराम से मिलने पर ही उनकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है। शासन का मानना है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जरूरी है उनकी खेती की लागत कम की जाए और उन्हें खेत में ही बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों को जैविक खेती से तो पहले ही जोड़ा जा रहा है, अब किसानों को बाजार दिलाने पर भी काम शुरू किया जा रहा है, लेकिन किसानों को फसलों का बाजार तभी मिल सकता है जब किसान किसी एक तरह की फसल की खेती को मिलकर करेंगे। गांव फुलसिंघा में आयोजित सीएससी सरर्सी एफपीओ की बैठक में अधिकारियों ने यही बात समझाई। एफपीओ के डायरेक्टर फहीम ने कहा कि किसान कोई विशेष फसल जैसे फलों, सब्जियों, फूलों आदि की खेती करें तो कई बार उन्हें एकदम से बाजार नहीं मिलता है लेकिन कृषक उत्पादकता समूह यानि एफपीओ के माध्यम से उन्हें यह बाजार मिलेगा। इस दौरान उप कृषि निदेशक हीरा सिंह जीना, सीपी सिंह, अरविंद कुमार आदि रहे।
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फुलसिंघा गांव में एफपीओ की बैठक में अधिकारियों ने समझाए एफपीओ से जुड़ने के फायदे
संभल। सीएससी सरर्सी कृषक उत्पादकता समूह (एफपीओ) की बुधवार को फुलसिंघा गांव में बैठक हुई। इसमें किसानों को एफपीओ से जुड़कर खेती करने के तरीके बताए गए। कहा गया कि एफपीओ के माध्यम से कम लागत में अधिक मुनाफे वाली खेती की जा सकती है। इसलिए किसान इसे अपनाएं।
दरअसल, शासन की मंशा किसानों को अब उद्योगों की तर्ज पर खेती कराने की है। ऐसे में कृषक उत्पादकता समूह से जुड़े किसानों को किसी एक फसल से जोड़कर खेती का मौका मिलेगा। किसान पारंपरिक तरीके से अलग-अलग एक साथ किसी फसल को बोएंगे। उन्हें बाजार भी अच्छा मिलेगा और उनकी फसलों के किसानों को सही दाम भी मिल सकेंगे। किसानों को फसलों के सही दाम आराम से मिलने पर ही उनकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है। शासन का मानना है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जरूरी है उनकी खेती की लागत कम की जाए और उन्हें खेत में ही बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों को जैविक खेती से तो पहले ही जोड़ा जा रहा है, अब किसानों को बाजार दिलाने पर भी काम शुरू किया जा रहा है, लेकिन किसानों को फसलों का बाजार तभी मिल सकता है जब किसान किसी एक तरह की फसल की खेती को मिलकर करेंगे। गांव फुलसिंघा में आयोजित सीएससी सरर्सी एफपीओ की बैठक में अधिकारियों ने यही बात समझाई। एफपीओ के डायरेक्टर फहीम ने कहा कि किसान कोई विशेष फसल जैसे फलों, सब्जियों, फूलों आदि की खेती करें तो कई बार उन्हें एकदम से बाजार नहीं मिलता है लेकिन कृषक उत्पादकता समूह यानि एफपीओ के माध्यम से उन्हें यह बाजार मिलेगा। इस दौरान उप कृषि निदेशक हीरा सिंह जीना, सीपी सिंह, अरविंद कुमार आदि रहे।
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