थाना कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव नवादा में पांच दिसंबर 2007 तीन सगे भाइयों सहित चार लोगों ने भवन स्वामी पर हमला कर दिया था। इस मामले में जिला सत्र न्यायालय के जिला जज ने जानलेवा हमला के मामले में दोष सिद्ध होने पर चारों को दस-दस साल के कारावास व दस-दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई हुई।
जिला शासकीय अधिवक्ता सत्यपाल सिंह गुर्जर ने बताया कि थाना कुढ़फतेहगढ़ के गांव नवादा निवासी शाहजहां ने पांच दिसंबर 2007 को तहरीर दी थी। बताया था कि उसके जेठ एहसान गांव में जमील के घर के पास बने अपने मकान से सामान लेने गए थे। वहां जमील के बेटे शारिक उर्फ कालिया, आरिफ, कामिल, गांव निवासी मुशर्रफ ने जेठ एहसान के साथ मारपीट शुरू कर दी। शोर सुनकर खेत से आ रहे उसके पति उस्मान, देवर इरफान मौके पर आ गए और बीच बचाव की कोशिश की। आरोप है कि मुशर्रफ ने अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक से जान से मारने की नियत से फायर किए। जिसमें शाहजहां का पति उस्मान, जेठ एहसान, देवर इरफान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दोषियों ने तमंचों से फायर भी किए थे। पुलिस ने चारों के खिलाफ जानलेवा हमला, मारपीट व अवैध हथियार रखने के आरोप में मुकदमा पंजीकृत किया था। इस मामले की सुनवाई जिला मुरादाबाद के न्यायालय में हुई। चंदौसी के जिला सत्र न्यायालय में हुई। सुनवाई के दौरान चारों पर दोष सिद्ध हुआ। जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार ने दोषी शारिक उर्फ कालिया, आरिफ, कामिल, मुशर्रफ को दस-दस साल के कारावास व दस-दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।