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यादव वोटों के ध्रुवीकरण से ढहा सपा का गढ़
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Sun, 12 Mar 2017 01:43 AM IST
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सत्तर फीसदी यादव वोटों वाले गुन्नौर को सपा का गढ़ कहा जाता है। यहां हरसंभव सपा को विजय मिलती आई है, लेकिन इस बार जनता ने सपा के गणित को बिगाड़ दिया। धुव्रीकरण हुए यादव वोटों के साथ नॉन यादव वोटों ने पूर्ण रूप से भाजपा को समर्थन दे दिया। परंपरागत भाजपा वोटरों के साथ यादव वोटों के ध्रुवीकरण से अजीत कुमार राजू पहली बार भाजपा के लिए सपा का किला ढहाने में कामयाब रहे।
कभी मुलायम सिंह यादव के सिपहसालार बन कर रहे अजीत कुमार उर्फ राजू ने सपा में रहते हुए सरकार की बुराई की और अवैध खनन व किसानों को फ्री बिजली का मुद्दा बनाकर कई जनसभाओं में जनता का दिल जीता। तभी से अधिकतर यादव मतदाता उन्हें विकल्प के तौर समर्थन देने लगे। काफी संख्या में उनका परंपरागत वोट माना जाता है। जिसमें यादव के साथ ओबीसी का नॉन यादव वोटर भी है।
यादव के बाद दूसरे नंबर पर आने कुशवाह समाज ने भी सौ फीसदी भाजपा को समर्थन दे दिया। इसका प्रमुख कारण भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या के पक्ष में जाना है। थानों में जातीय राजनीति के चलते गुन्नौर का नॉन यादव वोटर एकजुटता के साथ भाजपा के साथ गया, तो गांवों की राजनीति में पिसे यादवों के एक धड़े ने भी अजीत कुमार उर्फ राजू यादव के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया।
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बताया जा रहा था कि अनुमानित 20 प्रतिशत यादव मत भाजपा को डायवर्ट हो गए। वहीं बसपा का प्रत्याशी मुकाबले में न होने के कारण काफी संख्या में दलित वोटर भी भाजपा के साथ गए। भाजपा के परंपरागत वोटरों में 80 फीसदी भाजपा के साथ रहे।
जिसके चलते भाजपा यादव के साथ नॉन यादव वोटरों के सहारे सपा का किला ढहाने में कामयाब रहे।
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कभी मुलायम सिंह यादव के सिपहसालार बन कर रहे अजीत कुमार उर्फ राजू ने सपा में रहते हुए सरकार की बुराई की और अवैध खनन व किसानों को फ्री बिजली का मुद्दा बनाकर कई जनसभाओं में जनता का दिल जीता। तभी से अधिकतर यादव मतदाता उन्हें विकल्प के तौर समर्थन देने लगे। काफी संख्या में उनका परंपरागत वोट माना जाता है। जिसमें यादव के साथ ओबीसी का नॉन यादव वोटर भी है।
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यादव के बाद दूसरे नंबर पर आने कुशवाह समाज ने भी सौ फीसदी भाजपा को समर्थन दे दिया। इसका प्रमुख कारण भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या के पक्ष में जाना है। थानों में जातीय राजनीति के चलते गुन्नौर का नॉन यादव वोटर एकजुटता के साथ भाजपा के साथ गया, तो गांवों की राजनीति में पिसे यादवों के एक धड़े ने भी अजीत कुमार उर्फ राजू यादव के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया।
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बताया जा रहा था कि अनुमानित 20 प्रतिशत यादव मत भाजपा को डायवर्ट हो गए। वहीं बसपा का प्रत्याशी मुकाबले में न होने के कारण काफी संख्या में दलित वोटर भी भाजपा के साथ गए। भाजपा के परंपरागत वोटरों में 80 फीसदी भाजपा के साथ रहे।
जिसके चलते भाजपा यादव के साथ नॉन यादव वोटरों के सहारे सपा का किला ढहाने में कामयाब रहे।