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पशु आहार निर्माता के गोदाम में लगी आग, दो मंजिला भवन ढहा
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संभल। नखासा थाना क्षेत्र के गांव पल्था में पशु आहार निर्माता के गोदाम में आग लग गई। गोदाम में अनुपयोगी (एक्सपायर्ड) खाद्य सामग्री थी। उसी से पशु आहार तैयार किया जाता था। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस दौरान दो मंजिला भवन भी भरभराकर गिर गया। सूचना पर पहुंची दमकल ने करीब नौ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आसपास बने मकानों को भी नुकसान हुआ है। गोदाम मालिक ने करीब 30 लाख रुपये के नुकसान होने की बात कही है। पुलिस ने हादसे को इत्तेफाकिया मानते हुए रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
नखासा थाना क्षेत्र के गांव पल्था निवासी रियाजुल हसन अनुपयोगी खाद्य सामग्री से पशु आहार बनाकर बेचने का काम करते हैं। यह काम मकान के पास बने दो मंजिला गोदाम से कर रहे थे। इसके लिए गोदाम में ही कई तरह की मशीनें लगी हुई थीं, जो अनुपयोगी खाद्य सामग्री को मिक्स करके पशु आहार बना देती थीं। इसके अलावा मुर्गियों और मछलियों के लिए भी इससे आहार बनता था। बुधवार की रात करीब दो बजे के गोदाम में आग लग गई। आग लगने से गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण आग बुझाने के लिए दौड़ पड़े। गोदाम स्वामी भी मौके पर पहुंच गए। आसपास के लोगों द्वारा सबमर्सिबल चलाकर आग बुझाने का प्रयास किया जाता रहा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस दौरान दो मंजिला भवन भी भरभराकर गिर गया। रात्रि में ही करीब साढ़े तीन बजे दमकल गांव पहुंची और नौ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार को दोपहर में साढ़े ग्यारह बजे तक आग पर काबू पाया जा सका। आग से गोदाम में रखा सामान और मशीनें जलकर राख हो गईं। दो मंजिला भवन ढह गया। मलबा गिरने से आसपास के मकानों को नुकसान हुआ है।
गोदाम के मालिक रियाजुल हसन का कहना है कि गोदाम में किसी ने आग लगा दी, जिससे गोदाम में रखा 10-12 लाख रुपये का सामान और 20-22 लाख रुपये का गोदाम के ढहने से आर्थिक नुकसान हुआ है। जिसकी तहरीर पुलिस को दी गई है। नखासा थाने के एसएसआई राजेश कुमार पांडे ने बताया कि हादसे को इत्तेफाकिया मानते हुए रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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गांव में मची अफरा-तफरी, ग्रामीण आए दहशत में
बुधवार की रात आग की सूचना पर आग में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के मकानों में रह रहे लोग दहशत में आ गए। किसी ने सबमर्सिबल चलाकर पानी की बौछार की तो किसी ने गोदाम के पास बने मकानों में रह रहे लोगों की मदद की।
सटे मकान की दीवार गिरी
दो मंजिला भवन ढहा तो उससे सटे बिलाल के मकान की दीवार गिर गई। दीवार से सटे बंधे पशु बच गए। वहीं, पास ही में मोहम्मद रफाइज की छत में भी दरार पड़ गई। गनीमत यह रही कि लिंटर नहीं गिरा। मकान में रफाइज का परिवार सो रहा था। जिससे बड़ा हादसा हो सकता था।
तीस-तीस फुट ऊंची उठ रहीं थीं लपटें
पल्था गांव में सवा दो सौ गज की परिधि में बने इस दो मंजिला गोदाम में आग की लपटें करीब तीस फुट ऊपर तक उठ रहीं थीं। जब यह भराभरा कर ढहा तो एक-एक ईंट बिखर गई। स्थिति यह थी कि लिंटर का सरिया तक अलग हो गया था। यह मंजर देखकर मौजूद लोगों की रूह कांप गई।
डेढ़ घंटे बाद पहुंची दमकल
गांव पल्था में बने पशु आहार निर्माता के गोदाम में आग लगने के डेढ़ घंटे बाद दमकल पहुंची। इस दौरान गांव में अफरा-तफरी का माहौल रहा। लोग आग बुझाने का प्रयास करते दिख रहे थे। यह मंजर काफी भयानक था।
जेसीबी लगाकर हटाया मलबा, तब पूरी तरह बुझ सकी आग
दो मंजिला गोदाम का मलबा गिरा तो आग की लपटें कम जरूर हुईं, पर आग सुलगती रही। जेसीबी लगाकर पहले मलबे को हटाया गया और फिर दमकल ने आग पर बमुश्किल काबू पाया।
मैं घर न गया होता तो शायद मैं भी जिंदा न होता : बन्ने मियां
दो मंजिला गोदाम में सिकंदरपुर सराय के निवासी बन्ने मियां बतौर मुुंशी काम करते हैं। वैसे तो बन्ने मियां रोज रात को गोदाम में ही सोते थे लेकिन बुधवार की रात्रि वह किसी काम के चलते घर चले गए। बन्ने मियां आग लगने की जानकारी मिलने पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि यदि में घर न गया होता तो शायद में भी जिंदा न होता।
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नखासा थाना क्षेत्र के गांव पल्था निवासी रियाजुल हसन अनुपयोगी खाद्य सामग्री से पशु आहार बनाकर बेचने का काम करते हैं। यह काम मकान के पास बने दो मंजिला गोदाम से कर रहे थे। इसके लिए गोदाम में ही कई तरह की मशीनें लगी हुई थीं, जो अनुपयोगी खाद्य सामग्री को मिक्स करके पशु आहार बना देती थीं। इसके अलावा मुर्गियों और मछलियों के लिए भी इससे आहार बनता था। बुधवार की रात करीब दो बजे के गोदाम में आग लग गई। आग लगने से गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण आग बुझाने के लिए दौड़ पड़े। गोदाम स्वामी भी मौके पर पहुंच गए। आसपास के लोगों द्वारा सबमर्सिबल चलाकर आग बुझाने का प्रयास किया जाता रहा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस दौरान दो मंजिला भवन भी भरभराकर गिर गया। रात्रि में ही करीब साढ़े तीन बजे दमकल गांव पहुंची और नौ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार को दोपहर में साढ़े ग्यारह बजे तक आग पर काबू पाया जा सका। आग से गोदाम में रखा सामान और मशीनें जलकर राख हो गईं। दो मंजिला भवन ढह गया। मलबा गिरने से आसपास के मकानों को नुकसान हुआ है।
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गोदाम के मालिक रियाजुल हसन का कहना है कि गोदाम में किसी ने आग लगा दी, जिससे गोदाम में रखा 10-12 लाख रुपये का सामान और 20-22 लाख रुपये का गोदाम के ढहने से आर्थिक नुकसान हुआ है। जिसकी तहरीर पुलिस को दी गई है। नखासा थाने के एसएसआई राजेश कुमार पांडे ने बताया कि हादसे को इत्तेफाकिया मानते हुए रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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गांव में मची अफरा-तफरी, ग्रामीण आए दहशत में
बुधवार की रात आग की सूचना पर आग में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के मकानों में रह रहे लोग दहशत में आ गए। किसी ने सबमर्सिबल चलाकर पानी की बौछार की तो किसी ने गोदाम के पास बने मकानों में रह रहे लोगों की मदद की।
सटे मकान की दीवार गिरी
दो मंजिला भवन ढहा तो उससे सटे बिलाल के मकान की दीवार गिर गई। दीवार से सटे बंधे पशु बच गए। वहीं, पास ही में मोहम्मद रफाइज की छत में भी दरार पड़ गई। गनीमत यह रही कि लिंटर नहीं गिरा। मकान में रफाइज का परिवार सो रहा था। जिससे बड़ा हादसा हो सकता था।
तीस-तीस फुट ऊंची उठ रहीं थीं लपटें
पल्था गांव में सवा दो सौ गज की परिधि में बने इस दो मंजिला गोदाम में आग की लपटें करीब तीस फुट ऊपर तक उठ रहीं थीं। जब यह भराभरा कर ढहा तो एक-एक ईंट बिखर गई। स्थिति यह थी कि लिंटर का सरिया तक अलग हो गया था। यह मंजर देखकर मौजूद लोगों की रूह कांप गई।
डेढ़ घंटे बाद पहुंची दमकल
गांव पल्था में बने पशु आहार निर्माता के गोदाम में आग लगने के डेढ़ घंटे बाद दमकल पहुंची। इस दौरान गांव में अफरा-तफरी का माहौल रहा। लोग आग बुझाने का प्रयास करते दिख रहे थे। यह मंजर काफी भयानक था।
जेसीबी लगाकर हटाया मलबा, तब पूरी तरह बुझ सकी आग
दो मंजिला गोदाम का मलबा गिरा तो आग की लपटें कम जरूर हुईं, पर आग सुलगती रही। जेसीबी लगाकर पहले मलबे को हटाया गया और फिर दमकल ने आग पर बमुश्किल काबू पाया।
मैं घर न गया होता तो शायद मैं भी जिंदा न होता : बन्ने मियां
दो मंजिला गोदाम में सिकंदरपुर सराय के निवासी बन्ने मियां बतौर मुुंशी काम करते हैं। वैसे तो बन्ने मियां रोज रात को गोदाम में ही सोते थे लेकिन बुधवार की रात्रि वह किसी काम के चलते घर चले गए। बन्ने मियां आग लगने की जानकारी मिलने पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि यदि में घर न गया होता तो शायद में भी जिंदा न होता।