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कृषि विधेयकों के विरोध में संभल में सड़क पर उतरे किसान, विरोध प्रदर्शन
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संभल में किसानों के मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी करते भाकियू असली के कार्यकर्ता।
- फोटो : SAMBHAL
संभल। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि अध्यादेशों के विरोध में भाकियू असली के बैनर तले तमाम किसान सड़क पर उतर आए। विरोध प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। अध्यादेशों को वापस लेने और फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर दिलाने के लिए उसी मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाने की मांग की गई। इस बाबत प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को दिया गया।
मंगलवार को भाकियू असली के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान संभल की मंडी समिति परिसर में एकत्र हो गए। धीरे-धीरे किसानों का कारवां बढ़ता गया। किसानों की भीड़ बढ़ते देख पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया। संभल कोतवाली के अलावा, नखासा और असमोली से पुलिस बुला ली गई। किसान मंडी समिति से जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए अपर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए। यहां मौजूद किसानों को किसान नेताओं ने संबोधित किया।
मंडल अध्यक्ष डूंगर सिंह ने कहा कि किसानों की तमाम समस्याएं लंबित हैं लेकिन प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। सरकार किसान विरोधी है। समय से किसानों को कुछ नहीं मिला। तीन कृषि अध्यादेश लाए गए, जो किसानों के हित में नहीं हैं। इनका पुरजोर विरोध किया जाएगा। कृषि अध्यादेशों से सबसे बड़ा खतरा यह है कि जब किसान की फसलें तैयार होंगी उस समय बड़ी-बड़ी कंपनियां जानबूझकर किसानों की फसलों का दाम गिरा देंगी और उसे स्टोर कर बाद में मुनाफे में बेचेंगी।
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इससे किसानों की हालत बद से बदतर हो जाएगी। किसानों को बचाने के लिए स्वामीनाथ फार्मूले के आधार पर फसलों का न्यूनतम मूल्य तय किया जाए और उसी मूल्य पर फसलों की गारंटी का कानून बनाया जाए। जब तक यह कानून नहीं लाया जाएगा तब किसान कृषि अध्यादेशों का विरोध करते रहेंगे। इस दौरान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह यादव, ऋषभ चौधरी, चौधरी अर्जुन सिंह, मोहम्मद फाजिल, मोहम्मद वारिस, अताउर्रहमान, संजीव गांधी, होमपाल सिंह, सतेंद्र सिंह, रामवीर सिंह, मोहम्मद सुलेमान, मोहम्मद रिहान, मुजाहिद आदि रहे।
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मंगलवार को भाकियू असली के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान संभल की मंडी समिति परिसर में एकत्र हो गए। धीरे-धीरे किसानों का कारवां बढ़ता गया। किसानों की भीड़ बढ़ते देख पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया। संभल कोतवाली के अलावा, नखासा और असमोली से पुलिस बुला ली गई। किसान मंडी समिति से जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए अपर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए। यहां मौजूद किसानों को किसान नेताओं ने संबोधित किया।
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मंडल अध्यक्ष डूंगर सिंह ने कहा कि किसानों की तमाम समस्याएं लंबित हैं लेकिन प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। सरकार किसान विरोधी है। समय से किसानों को कुछ नहीं मिला। तीन कृषि अध्यादेश लाए गए, जो किसानों के हित में नहीं हैं। इनका पुरजोर विरोध किया जाएगा। कृषि अध्यादेशों से सबसे बड़ा खतरा यह है कि जब किसान की फसलें तैयार होंगी उस समय बड़ी-बड़ी कंपनियां जानबूझकर किसानों की फसलों का दाम गिरा देंगी और उसे स्टोर कर बाद में मुनाफे में बेचेंगी।
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इससे किसानों की हालत बद से बदतर हो जाएगी। किसानों को बचाने के लिए स्वामीनाथ फार्मूले के आधार पर फसलों का न्यूनतम मूल्य तय किया जाए और उसी मूल्य पर फसलों की गारंटी का कानून बनाया जाए। जब तक यह कानून नहीं लाया जाएगा तब किसान कृषि अध्यादेशों का विरोध करते रहेंगे। इस दौरान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह यादव, ऋषभ चौधरी, चौधरी अर्जुन सिंह, मोहम्मद फाजिल, मोहम्मद वारिस, अताउर्रहमान, संजीव गांधी, होमपाल सिंह, सतेंद्र सिंह, रामवीर सिंह, मोहम्मद सुलेमान, मोहम्मद रिहान, मुजाहिद आदि रहे।