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Sambhal News: समूह में शामिल होने के लिए अब चेहरे की पहचान भी जरूरी
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चंदौसी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत स्वयं सहायता समूहों में नई सदस्य जोड़ने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब समूह से जुड़ने की इच्छुक प्रत्येक महिला की पहचान निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित की जाएगी। चेहरे की पहचान भी की जाएगी। इसका उद्देश्य समूहों के माध्यम से मिलने वाले ऋण, प्रशिक्षण और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ केवल पात्र महिलाओं तक पहुंचाना है।
नई व्यवस्था लागू होने से समूहों के गठन और संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा गलत तरीके से सदस्यता लेने की संभावना कम होगी।
अब तक स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनने के लिए केवल आधार सत्यापन कराया जाता था और सत्यापन के बाद महिला को समूह में शामिल कर लिया जाता था। लेकिन अब आधार सत्यापन के साथ फेस ऑथेंटिकेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है। दोनों प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही सदस्यता स्वीकृत की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत महिला के चेहरे का सत्यापन मोबाइल एप के माध्यम से किया जाएगा। फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए आधार से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान कर पहचान की पुष्टि की जाएगी। इसके बाद ही संबंधित महिला का नाम स्वयं सहायता समूह में दर्ज किया जाएगा।
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मिशन अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य समूहों में केवल वास्तविक और पात्र महिलाओं को शामिल करना है। इससे फर्जी सदस्यता की संभावना कम होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में भी आसानी होगी।
डीडीओ राम आशीष ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाले ऋण, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ केवल पात्र महिलाओं को ही सुनिश्चित किया जाएगा।
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नई व्यवस्था लागू होने से समूहों के गठन और संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा गलत तरीके से सदस्यता लेने की संभावना कम होगी।
अब तक स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनने के लिए केवल आधार सत्यापन कराया जाता था और सत्यापन के बाद महिला को समूह में शामिल कर लिया जाता था। लेकिन अब आधार सत्यापन के साथ फेस ऑथेंटिकेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है। दोनों प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही सदस्यता स्वीकृत की जाएगी।
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नई व्यवस्था के तहत महिला के चेहरे का सत्यापन मोबाइल एप के माध्यम से किया जाएगा। फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए आधार से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान कर पहचान की पुष्टि की जाएगी। इसके बाद ही संबंधित महिला का नाम स्वयं सहायता समूह में दर्ज किया जाएगा।
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मिशन अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य समूहों में केवल वास्तविक और पात्र महिलाओं को शामिल करना है। इससे फर्जी सदस्यता की संभावना कम होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में भी आसानी होगी।
डीडीओ राम आशीष ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाले ऋण, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ केवल पात्र महिलाओं को ही सुनिश्चित किया जाएगा।