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ईद मिलादुन्नबी : सरकार की आमद मरहबा...मरहबा
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सिरसी में ईद मिलादुन्नबी के जुलूस में शामिल भीड़। संवाद
संभल। जिले में ईद मिलादुन्नबी का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया। विभिन्न क्षेत्रों से जुलूस निकाले गए। जुलूस में बच्चों औैर लोगों ने परचमों संग सरकार की आमद मरहबा...मरहबा की आवाज बुलंद की। जुलूस के बाद मुस्लिम समाज ने एक-दूसरे को ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद दी। उलमा ने तकरीर कर सही रास्ते पर चलने का आह्वान किया। मक्का मदीना समेत कई आकर्षित करने वाली झांकियां भी जुलूस में शामिल रहीं। जुलूस के दौरान लोगों को तबर्रुक बांटा गया। सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद रही।पुलिस के साथ पीएसी के जवान भी लगाए गए। एएसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने निगरानी कराई।
शहर में ईद मिलादुन्नबी का जुलूस मरकजी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम मोहल्ला ठेर से कारी मोहम्मद तंजीम अशरफ अजमली की कयादत में निकाला गया। इसमें तिलावत कारी मो. सलमान ने की जबकि मो. समीर अजमली ने नात ए पाक पढ़ी। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। उलमा ने नबी की सीरत पर अमल करने पर जोर दिया। इस दौरान नात पढ़ते हुए भी लोग चलते नजर आए।
शुक्रवार को सुबह 8 बजे मदरसा से जुलूस शुरू होकर खग्गू सराय चौराहा से आगे बढ़कर अंजुमन चौराहा पर पहुंचा। जिसमें मदरसा खलीलुल उलूम का जुलूस शामिल हुआ। इसके बाद मदरसा जमीर उल उलूम, मदरसा कादरिया नखासा, मदरसा जैनुल आबेदीन, मदरसा हिंदूपुरा खेड़ा, रुकनुद्दीन सराय, सलारपुर कला, जालब सराय, फतेहउल्ला सराय, देहली दरवाजा के जुलूस मुख्य जुलूस में शामिल हुए। मदरसा खलील उल उलूम रायसत्ती, मदरसा मदीना तुल उलूम शहबाजपुरा रायसत्ती के जुलूस कोतवाली होते हुए तिमरदास सराय, बल्ले की पुलिया से मुख्य जुलूस में शामिल हुए। हातिम सराय, जगत, नूरियो सराय, मंडी किशनदास सराय, कोट गर्बी के जुलूस पान दरीबा, एजेंटी चौराहा, आर्य समाज रोड से खग्गू सराय तिराहा पर आकर मुख्य जुलूस में शामिल हुए।
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यहां से जुलूस सांसद जियाउर्रहमान बर्क के आवास के सामने से होकर परंपरागत मार्ग से अजमल चौक दीपा सराय में आकर विशाल जुलूस में तब्दील हो गया। तकरीर करते हुए मौलाना मोहम्मद कलीम अशरफ ने कहा कि नबी की आमद से पहले दुनिया का अजीबो गरीब मामला था। हर तरफ अत्याचार और अंधकार था। अमन व शांति का कहीं नाम नहीं था। अल्लाह ताला ने रबीउल अव्वल की 12 तारीख को नबी को पैदा फरमाया और दुनिया पर एक बड़ा अहसान किया। आज हम नबी के बताए हुए मार्ग पर चलकर अच्छे इंसान बन सकते हैं। मुफ्ती आलम रजा नूरी ने कहा कि नबी की आमद से बेटियों को बहुत सम्मान मिला।
अंत में सलातो सलाम हुआ। मुल्क और कौम की खुशहाली के लिए कारी मोहम्मद तंजीम अशरफ अजमली ने दुआ कराई। जुलूस में मुफ्ती शकील अहमद, कारी मोहम्मद वसी अशरफ, मुफ्ती हसीब अख्तर, मुफ्ती राशिद, कारी सरताज, कारी सलमान, तकी अशरफ एडवोकेट, मौलाना नईम आदि रहे। वहीं गांव पोटा, बराही, ओबरी, असमोली, मढ़न, मनोटा, हजरतनगर गढ़ी में भी ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूस निकाले गए।
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ईद मिलादुन्नबी का उद्देश्य मुसलमानों को एकता और भाईचारे से जोड़ना
सिरसी। क्षेत्र में ईद मिलादुन्नबी का जुलूस शानो शौकत के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या अकीदतमंद शामिल हुए। छोटे बच्चे हाथों में झंडे लेकर चलते दिखाई दिए। जुलूस में मनमोहक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। मौलाना मकबूल नईमी मुरादाबादी ने कहा कि इस दिन का उद्देश्य मुसलमानों को एकता, भाईचारे और आध्यात्मिकता की भावना से जोड़ना है ताकि वह पैगंबर के आदर्शों को अपने जीवन में अपना सकें।
जुलूस सिरसी मुकरर्बपुर मार्ग पर स्थित मदरसा इस्लाहुल कौम से शुरू हुआ। जुलूस की शुरुआत कारी गुलाम यजदानी ने तिलावते कुरआने करीम से की। शायरे इस्लाम हाजी गुलाम रब्बानी ने नातिया अशआर से माहौल को नूरानी बनाया। उस्मान हारूनी ने नाते पाक के अशआर पेश किए।
सिरसी बस अड्डे पर जुलूस को संबोधित करते हुए मौलाना मकबूल नईमी मुरादाबादी ने कहा कि अल्लाह के रसूल की हदीस है कि जो व्यक्ति दूसरों पर दया नहीं करता उस पर अल्लाह भी दया नहीं करता। कहा कि यह दिन पैगंबर मोहम्मद के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनके द्वारा दिए गए प्रेम और शांति के संदेश को याद करने के लिए समर्पित है। जुलूस संभल मुरादाबाद मार्ग से होता हुआ मोहल्ला गिन्नौरी, किदवई, नासर शहीद, बिलारी मार्ग से होकर बुध बाजार जाकर संपन्न हुआ।
अंत में आलम रजा खां नूरी ने मुल्क और कौम की सलामती के लिए दुआ कराई। इस दौरान मोहम्मद वसीम खां, डॉ. शाकिर हुसैन इस्लाही, रियाजुद्दीन सैफी, मकबूल अंसारी, हाजी सादिक, हाजी तस्लीम, खुर्शीद मेंबर, हाफिज हबीब, हाफिज हम्जा अली आदि रहे। जुलूस का संचालन कारी अंसार उल हक ने किया। जुलूस में थाना प्रभारी अनुज कुमार तोमर, सिरसी चौकी इंचार्ज मोहम्मद शाह फैसल पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
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शहर में ईद मिलादुन्नबी का जुलूस मरकजी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम मोहल्ला ठेर से कारी मोहम्मद तंजीम अशरफ अजमली की कयादत में निकाला गया। इसमें तिलावत कारी मो. सलमान ने की जबकि मो. समीर अजमली ने नात ए पाक पढ़ी। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। उलमा ने नबी की सीरत पर अमल करने पर जोर दिया। इस दौरान नात पढ़ते हुए भी लोग चलते नजर आए।
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शुक्रवार को सुबह 8 बजे मदरसा से जुलूस शुरू होकर खग्गू सराय चौराहा से आगे बढ़कर अंजुमन चौराहा पर पहुंचा। जिसमें मदरसा खलीलुल उलूम का जुलूस शामिल हुआ। इसके बाद मदरसा जमीर उल उलूम, मदरसा कादरिया नखासा, मदरसा जैनुल आबेदीन, मदरसा हिंदूपुरा खेड़ा, रुकनुद्दीन सराय, सलारपुर कला, जालब सराय, फतेहउल्ला सराय, देहली दरवाजा के जुलूस मुख्य जुलूस में शामिल हुए। मदरसा खलील उल उलूम रायसत्ती, मदरसा मदीना तुल उलूम शहबाजपुरा रायसत्ती के जुलूस कोतवाली होते हुए तिमरदास सराय, बल्ले की पुलिया से मुख्य जुलूस में शामिल हुए। हातिम सराय, जगत, नूरियो सराय, मंडी किशनदास सराय, कोट गर्बी के जुलूस पान दरीबा, एजेंटी चौराहा, आर्य समाज रोड से खग्गू सराय तिराहा पर आकर मुख्य जुलूस में शामिल हुए।
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यहां से जुलूस सांसद जियाउर्रहमान बर्क के आवास के सामने से होकर परंपरागत मार्ग से अजमल चौक दीपा सराय में आकर विशाल जुलूस में तब्दील हो गया। तकरीर करते हुए मौलाना मोहम्मद कलीम अशरफ ने कहा कि नबी की आमद से पहले दुनिया का अजीबो गरीब मामला था। हर तरफ अत्याचार और अंधकार था। अमन व शांति का कहीं नाम नहीं था। अल्लाह ताला ने रबीउल अव्वल की 12 तारीख को नबी को पैदा फरमाया और दुनिया पर एक बड़ा अहसान किया। आज हम नबी के बताए हुए मार्ग पर चलकर अच्छे इंसान बन सकते हैं। मुफ्ती आलम रजा नूरी ने कहा कि नबी की आमद से बेटियों को बहुत सम्मान मिला।
अंत में सलातो सलाम हुआ। मुल्क और कौम की खुशहाली के लिए कारी मोहम्मद तंजीम अशरफ अजमली ने दुआ कराई। जुलूस में मुफ्ती शकील अहमद, कारी मोहम्मद वसी अशरफ, मुफ्ती हसीब अख्तर, मुफ्ती राशिद, कारी सरताज, कारी सलमान, तकी अशरफ एडवोकेट, मौलाना नईम आदि रहे। वहीं गांव पोटा, बराही, ओबरी, असमोली, मढ़न, मनोटा, हजरतनगर गढ़ी में भी ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूस निकाले गए।
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ईद मिलादुन्नबी का उद्देश्य मुसलमानों को एकता और भाईचारे से जोड़ना
सिरसी। क्षेत्र में ईद मिलादुन्नबी का जुलूस शानो शौकत के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या अकीदतमंद शामिल हुए। छोटे बच्चे हाथों में झंडे लेकर चलते दिखाई दिए। जुलूस में मनमोहक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। मौलाना मकबूल नईमी मुरादाबादी ने कहा कि इस दिन का उद्देश्य मुसलमानों को एकता, भाईचारे और आध्यात्मिकता की भावना से जोड़ना है ताकि वह पैगंबर के आदर्शों को अपने जीवन में अपना सकें।
जुलूस सिरसी मुकरर्बपुर मार्ग पर स्थित मदरसा इस्लाहुल कौम से शुरू हुआ। जुलूस की शुरुआत कारी गुलाम यजदानी ने तिलावते कुरआने करीम से की। शायरे इस्लाम हाजी गुलाम रब्बानी ने नातिया अशआर से माहौल को नूरानी बनाया। उस्मान हारूनी ने नाते पाक के अशआर पेश किए।
सिरसी बस अड्डे पर जुलूस को संबोधित करते हुए मौलाना मकबूल नईमी मुरादाबादी ने कहा कि अल्लाह के रसूल की हदीस है कि जो व्यक्ति दूसरों पर दया नहीं करता उस पर अल्लाह भी दया नहीं करता। कहा कि यह दिन पैगंबर मोहम्मद के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनके द्वारा दिए गए प्रेम और शांति के संदेश को याद करने के लिए समर्पित है। जुलूस संभल मुरादाबाद मार्ग से होता हुआ मोहल्ला गिन्नौरी, किदवई, नासर शहीद, बिलारी मार्ग से होकर बुध बाजार जाकर संपन्न हुआ।
अंत में आलम रजा खां नूरी ने मुल्क और कौम की सलामती के लिए दुआ कराई। इस दौरान मोहम्मद वसीम खां, डॉ. शाकिर हुसैन इस्लाही, रियाजुद्दीन सैफी, मकबूल अंसारी, हाजी सादिक, हाजी तस्लीम, खुर्शीद मेंबर, हाफिज हबीब, हाफिज हम्जा अली आदि रहे। जुलूस का संचालन कारी अंसार उल हक ने किया। जुलूस में थाना प्रभारी अनुज कुमार तोमर, सिरसी चौकी इंचार्ज मोहम्मद शाह फैसल पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।