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मौसम में बदलाव से बच्चों पर पड़ रही डायरिया की मार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 05 Apr 2022 12:51 AM IST
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Due to the change in the weather, the children are affected by diarrhea
संभल। अप्रैल माह शुरू होते ही गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है, बदला मौसम संक्रामक बीमारियों को जन्म देने लगा है। जिसकी चपेट में आकर लोग बीमार पड़ने लगे हैं। बदले मौसम में सबसे ज्यादा बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा। इस बात का अंदाजा जिला अस्पताल में सोमवार को भर्ती कराए गए डायरिया पीड़ित पांच और बुखार से पीड़ित 50 बच्चों को देखकर लगाया जा सकता है।
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बदलता मौसम लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है। एक तरफ गर्मी और चलने वाली लू तो दूसरी तरफ मच्छरों का प्रकोप और दूषित पानी लोगों को बीमार डाल रहें है। मौसम में बदलाव के कारण अस्पतालों में डायरिया के मरीज बढ़ने लगे हैं। जिला अस्पताल में सोमवार को डायरिया और बुखार से पीड़ित 55 बच्चों को भर्ती कराया गया। चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में होने वाली बीमारियां गंदा पानी पीने, दूषित (रखा हुआ) भोजन करने और बाजारों में खुले में रखे कटे हुए फलों और जूस का सेवन करने से होती है, इनसे पाचन क्रिया प्रभावित होती है। इस मौसम में खानपान और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। जिला अस्पताल में सोमवार को भर्ती कराए गए बच्चों में पांच डायरिया से तो 50 बुखार से पीड़ित है। डाक्टरों ने बताया कि इन रोगों से बचाव के लिए सावधानी और सर्तकता आवश्यक है। जरा सी लापरवाही स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकती है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डा. रामलाल यादव ने बताया कि डायरिया से पीड़ित बच्चे में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें। अगर उपलब्ध हो सके तो ओआरएस का घोल तत्काल पिलाना शुरू करें। यदि ओआरएस न हो तो घर पर ही नमक चीनी का घोल बनाकर नीबू निचोड़कर पिलाएं। इससे संक्रमण से शरीर में कम होने वाली पानी की मात्रा बनी रहती है।
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डायरिया के लक्षण--
- सिर दर्द और उल्टी की शिकायत होना।
- अधिक प्यास लगना।
- बैचेनी होना।
- पेेेशाब कम आना।
- खाल का सिकुड़ना।
बचाव के तरीके
- बासी खाना न खाएं, साफ और ताजा भोजन का सेवन करें।
- काफी समय से काटकर रखे गए फलों का सेवन न करें।
- पानी और तरल पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें।
- बाजार में खुला जूस और गन्ने का रस का सेवन न करें।
- घर पर बने मट्ठा, नींबू की शिकंजी का सेवन करें।
- बेल पर लगने वाले फल खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूजा आदि का सेवन करें।
- बच्चों को बोतल का दूध न पिलाएं, मां का दूूध पिलाएं।
- सूती कपड़ों का अधिक इस्तेमाल करें, बच्चों का सर ढकर कर ही बाहर जानें दे।
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