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लाइव: चार घंटे तक जिला अस्पताल से गायब रहे डाक्टर, इधर-उधर भटकते रहे मरीज

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 02:09 AM IST
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Doctors were missing from the district hospital for four hours, patients kept wandering with slip in hand
संभल। जिला अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं बेपटरी हैं। डॉक्टर समय पर अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। लेट पहुंचने वाले डॉक्टर भी ओपीडी में बैठना पसंद नहीं करते। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। उपचार के लिए मरीज समय पर अस्पताल पहुंचते जरूर हैं, लेकिन डॉक्टरों के इंतजार में इधर-उधर भटकते रहते हैं।
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शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल की तो उसमें यह हकीकत सामने आई। हाथ में पर्ची लिए मरीज भटकते रहे, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। दोपहर 12 बजे तक डॉक्टरों के कक्ष सूने थे और ओपीडी में मरीजों की पर्चियां बनाई जा रही थीं। यहीं पर्चियां हाथ में लिए मरीज उपचार के लिए डाक्टरों के आने का इंतजार करते रहे। इस दौरान मरीजों को पसीना भी बहाना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन ने समय पर बैठने की सख्त हिदायत दी हुई है, लेकिन कोई असर यहां नहीं दिख रहा है।
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कक्ष संख्या-17
समय- पूर्वाह्न 11 बजे
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शम्मी कपूर यहां बैठकर आंखों के मरीजों को देखते हैं। लेकिन शु्क्रवार को पूर्वाह्न ग्यारह बजे तक यह कक्ष बंद था। डाक्टर गायब थे और इनके इंतजार में एक दो मरीज इधर-उधर टहल रहे थे। दोपहर बारह बजे तक का यही हाल रहा।
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कक्ष संख्या-23
समय-10.55 बजे
डा.जेपीएस यादव यहां बैठकर ओपीडी में आने वाले सामान्य मरीजों को देखते हैं। लेकिन यह 12 बजे तक भी अपने कक्ष में नहीं पहुंचे। कक्ष खुला था लेकिन डॉक्टर की कुर्सी सूनी थी। आने वाले मरीज हाथ में पर्ची लेकर इधर-उधर भटकते रहे थे।
कक्ष संख्या-22
समय-10.58 बजे
कक्ष में कुर्सियां सूनी थीं और रजिस्टर रखे हुए थे। डॉक्टर गायब थे जबकि मरीज आ जा रहे थे। पूछने पर पता चला कि वह अभी नहीं आए हैं। जब आएंगे तो मरीजों को देखेंगे। सवाल यह है कि सुबह आठ बजे ओपीडी शुरू हो जाती है डॉक्टर क्यों नहीं पहुंच पाते।
पर्ची लेकर घूमता रहा सांस का मरीज
हयातनगर का निवासी मुशर्रफ सांस का मरीज है। शुक्रवार को वह सांस की दवा लेने जिला अस्पताल पहुंचा था। पर्ची कटवाने के बाद वह डॉक्टर को दिखाने पहुंचा तो डाक्टर नदारद थे। मुशर्रफ ने कहा कि कई घंटे से इस परिसर में टहल रहा हूं, लेकिन कोई उपचार नहीं हो सका। हैरानी की बात यह है कि सांस का मरीज टहलता रहा और उसे देखा नहीं गया। जबकि कोरोना काल में सांस लेने की समस्या ही संक्रमण की मुख्य पहचान है।

जिला अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या कम है। पांच चिकित्सक बाहर गए हुए थे। दो चिकित्सक आए हैं। इसमें एक चिकित्सक की ड्यूटी इमरजेंसी में लगी थी और दूसरे चिकित्सक ने 11.30 बजे ज्वाइन करने के बाद ओपीडी की। इसलिए ओपीडी में दिक्कत हुई।
- डॉ. रंजना सिंह, कार्यवाहक चिकित्साधिकारी, जिला अस्पताल, संभल
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