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स्वच्छता अभियान का उड़ रहा मखौल
ब्यूरो अमर उजाला / संभ्ाल
Updated Tue, 01 May 2018 01:56 AM IST
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चंदौसी की मंडी समिति में जर्जर पड़ा सार्वजनिक शौचालय।
- फोटो : अमर उजाला
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एक तरफ तो केंद्र व प्रदेश सरकार लगातार शहरों व गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करने का अभियान चला रही है लेकिन सरकारी अधिकारी ही, इस अभियान में पलीता लगा रहे हैं। चंदौसी की कृषि उत्पादन मंडी समिति में व्यापारी व किसान लंबे समय से खुले में शौच को जाने को विवश हैं।
कृषि उत्पादन मंडी समिति चंदौसी में प्रतिदिन हजारों की संख्या में किसान व व्यापारी आते हैं, लेकिल इनके लिए मंडी समिति में शौच के लिए कोई प्रबंध नहीं है। मंडी समिति का पिछला भाग खलिहान की ओर खुलता है। समिति परिसर में शौचालय नहीं होने की स्थिति में किसानों व व्यापारियों को खुले में शौच जाने को विवश होना प़डता जाते है।
यह क्रम काफी समय से चला आ रहा है। मंडी में आने जाने वाले व्यापारी व किसान के लिए मंडी स्थापना के समय दो सुलभ शौचालयों का निर्माण कराया गया था। करीब दस साल से खराब पड़े।
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मंडी के मुख्य गेट में घुसने के बाद ही एक सार्वजनिक सुलभ शौचालय है, जो अब सफाई कर्मियों ने अपने रहने का व सामान रखने का गोदाम बना लिया है। मंडी में टायलेट करने की भी उचित व्यवस्था नहीं। जिससे वहां इतनी गंदगी रहती है कि आम आदमी वहां टायलेट नहीं कर सकता है, लेकिन आज तक मंडी प्रशासन व अन्य अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
यह स्थिति तब है जबकि केंद्र व प्रदेश सरकार लगातार खुले में शौच मुक्त् भारत के लिए प्रयासरत है। सरकारें इसके लिए अनुदान देकर शौचालय निर्माण करा रही है। ऐसे में जब सरकारी विभाग ही सरकार की योजना की खिल्ली उड़ाएगा तो आम जनता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अब मंडी प्रशासन चेता है तो उसे नए शौचालय निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। मंडी प्रशासन शीघ्र ही दो नए शौचालय का निर्माण व पुराने की मरम्मत कराने का दावा कर रहा है।
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कृषि उत्पादन मंडी समिति चंदौसी में प्रतिदिन हजारों की संख्या में किसान व व्यापारी आते हैं, लेकिल इनके लिए मंडी समिति में शौच के लिए कोई प्रबंध नहीं है। मंडी समिति का पिछला भाग खलिहान की ओर खुलता है। समिति परिसर में शौचालय नहीं होने की स्थिति में किसानों व व्यापारियों को खुले में शौच जाने को विवश होना प़डता जाते है।
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यह क्रम काफी समय से चला आ रहा है। मंडी में आने जाने वाले व्यापारी व किसान के लिए मंडी स्थापना के समय दो सुलभ शौचालयों का निर्माण कराया गया था। करीब दस साल से खराब पड़े।
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मंडी के मुख्य गेट में घुसने के बाद ही एक सार्वजनिक सुलभ शौचालय है, जो अब सफाई कर्मियों ने अपने रहने का व सामान रखने का गोदाम बना लिया है। मंडी में टायलेट करने की भी उचित व्यवस्था नहीं। जिससे वहां इतनी गंदगी रहती है कि आम आदमी वहां टायलेट नहीं कर सकता है, लेकिन आज तक मंडी प्रशासन व अन्य अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
यह स्थिति तब है जबकि केंद्र व प्रदेश सरकार लगातार खुले में शौच मुक्त् भारत के लिए प्रयासरत है। सरकारें इसके लिए अनुदान देकर शौचालय निर्माण करा रही है। ऐसे में जब सरकारी विभाग ही सरकार की योजना की खिल्ली उड़ाएगा तो आम जनता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अब मंडी प्रशासन चेता है तो उसे नए शौचालय निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। मंडी प्रशासन शीघ्र ही दो नए शौचालय का निर्माण व पुराने की मरम्मत कराने का दावा कर रहा है।