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जिला अदालत एआई के जरिये तेज करे ट्रायल : हाईकोर्ट
Fri, 04 Sep 2026 11:56 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Fri, 04 Sep 2026 11:56 PM IST
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चंदौसी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में जनपद न्यायालय को एआई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ट्रायल में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संभल हिंसा के आरोपी मोहम्मद अली की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।
हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ (कोर्ट संख्या 69) के समक्ष आरोपी मोहम्मद अली की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि घटना में 700-800 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। किसी का स्पष्ट रोल या नाम नहीं था। जांच के बाद 44 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिनमें से समान स्थिति वाले 37 अन्य आरोपियों को कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। समानता के आधार पर कोर्ट ने आरोपी मोहम्मद अली की जमानत मंजूर कर ली।
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि आरोपी मोहम्मद अली को जमानत देने के साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि इस संवेदनशील मामले का ट्रायल जल्द से जल्द एक वर्ष के भीतर पूरा किया जाए। इसके लिए जनपद न्यायाधीश को केस किसी विशेष अदालत को सौंपने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सुनवाई में तेजी लाने के लिए स्पीच टू टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन एआई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
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उन्होंने बताया कि इसी तरह संभल हिंसा मामले में सह-आरोपी मोहम्मद निहाल को भी समानता के आधार पर हाईकोर्ट से जमानत देते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने जनपद न्यायालय को निर्देश दिया कि इस मामले के शीघ्र निपटारे के लिए गवाहों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। साक्ष्यों की तेजी से रिकॉर्डिंग व डिजिटाइजेशन के लिए ट्रांसक्रिप्शन एआई टूल का उपयोग किया जाए।
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हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ (कोर्ट संख्या 69) के समक्ष आरोपी मोहम्मद अली की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि घटना में 700-800 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। किसी का स्पष्ट रोल या नाम नहीं था। जांच के बाद 44 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिनमें से समान स्थिति वाले 37 अन्य आरोपियों को कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। समानता के आधार पर कोर्ट ने आरोपी मोहम्मद अली की जमानत मंजूर कर ली।
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जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि आरोपी मोहम्मद अली को जमानत देने के साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि इस संवेदनशील मामले का ट्रायल जल्द से जल्द एक वर्ष के भीतर पूरा किया जाए। इसके लिए जनपद न्यायाधीश को केस किसी विशेष अदालत को सौंपने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सुनवाई में तेजी लाने के लिए स्पीच टू टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन एआई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
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उन्होंने बताया कि इसी तरह संभल हिंसा मामले में सह-आरोपी मोहम्मद निहाल को भी समानता के आधार पर हाईकोर्ट से जमानत देते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने जनपद न्यायालय को निर्देश दिया कि इस मामले के शीघ्र निपटारे के लिए गवाहों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। साक्ष्यों की तेजी से रिकॉर्डिंग व डिजिटाइजेशन के लिए ट्रांसक्रिप्शन एआई टूल का उपयोग किया जाए।