चंदाैसी में खोदाई: बावड़ी के पास था कुआं... इर्दगिर्द थी दो मंजिला इमारत, ऐतिहासिक धरोहर घोषित करने की मांग
चंदौसी में खोदाई के दौरान मिली प्राचीन बावड़ी कभी व्यापारियों का ठिकाना और राजा सहसपुर के परिवार की संपत्ति थी। लोगों ने यह बावड़ी कचरे और मलबे से पाटकर जमींदोज कर दी थी। बताया कि यह स्थान व्यापारियों के ठहरने का प्रमुख केंद्र था।
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खोदाई में सामने आई प्राचीन बावड़ी के पास पहले एक कुआं भी था। इसके इर्दगिर्द दो मंजिला भवन भी था। यह कहना है शिप्रा गेरा का। शिप्रा रानी सुरेंद्रबाला की पोती हैं और सुरेंद्रबाला के दत्तक पुत्र विष्णु कुमार उर्फ लल्ला बाबू की बेटी हैं। शिप्रा बताती हैं कि दादी सुरेंद्रबाला को यह संपत्ति उनकी (सुरेंद्रबाला) की सास रानी प्रीतम कुंवर से मिली थी।
रानी प्रीतम कुंवर बिलारी के राजा के सहसपुर परिवार से थीं। बाद में यह संपत्ति सुरेंद्रबाला के दत्तक पुत्र विष्णु कुमार उर्फ लल्ला बाबू के हिस्से में आ गई थी। लल्ला बाबू ने प्रॉपर्टी डीलर को बेच दी थी। प्रॉपर्टी डीलर ने बावड़ी वाला हिस्सा छोड़कर बाकी की प्लॉटिंग कर दी।
आबादी बसने के दौरान बावड़ी वाला हिस्सा कचरे और मलबे से पाटते गए और बावड़ी जमींदोज हो गई। उन्होंने बताया कि बचपन में वह और परिवार के लोग इस जगह को पिकनिक स्पॉट के रूप में इस्तेमाल करते थे।
बाहरी व्यापारियों का ठिकाना थी बावड़ी
एक दौर में बदायूं, मुरादाबाद और ग्रामीण अंचलों के व्यापारी चंदौसी शीरा और राब लेकर आते थे। स्थानीय निवासी एडवोकेट सगीर सैफी ने बताया कि बावड़ी के यहां आसपास खेत थे। चंदौसी शीरे की बड़ी मंडी थी। बैलगाड़ियों से शीरा और राब लेकर आने वाले वाले बावड़ी के पास रुककर घर से लाया हुआ खाना खाते थे, इसी बावड़ी का पानी पीते थे। तब यह संपत्ति बिलारी के राजा का सहसपुर के राजघराने की थी।
चार सौ से ज्यादा गांव थे रियासत में
सहसपुर राजघराने की सदस्य और पूर्व मंत्री रानी रीना कुमारी ने फोन पर बताया कि उनके परिवार की रियासत बदायूं, मुरादाबाद, बिजनौर और संभल के चंदौसी समेत चार सौ से ज्यादा गांव में थी। चंदौसी में भी उनके परिवार की संपत्ति थी। जिसमें बावड़ी मिली है।
उनकी नानी रानी प्रीतम कुंवर के पति और उनके नाना राजा जगत सिंह की थी। 19 वर्ष की आयु में वर्ष 1934 में अलीगढ़ जाते समय कार दुर्घटना में राजा जगत सिंंह की मृत्यु हो गई थी। वर्ष 1982 में नानी का निधन हो गया। उससे पहले नानी ने ये चंदौसी की संपत्ति अपनी पुत्रवधू सुरेंद्र बाला के नाम कर दी थी।
उठा सवाल, क्या बावड़ी काे पुरातात्विक धरोहर घोषित करेगा प्रशासन
लक्ष्मण गंज में मिली बावड़ी को पुरातात्विक धरोहर घोषित किया जाएगा क्या, आम जनमानस के बीच में यह सवाल उठ रहा है। सुरेंद्रबाला की पोती शिप्रा गेरा का भी कहना है कि यदि प्रशासन बावड़ी को ऐतिहासिक धरोहर घोषित करता है तो ये चंदौसी के लिए सौभाग्य की बात होगी।
बावड़ी से जुड़े तीन मंजिला भवन के भी संकेत
डीएम बताया कि अभिलेखों में 400 वर्ग मीटर एरिया में बावड़ी तालाब के रूप में दर्ज है। बिलारी के राजा के परिवार के समय यहां बावड़ी बनी थी। इसमें तीन मंजिल भवन के संकेत भी मिले हैं। दो मंजिल संगमरमर से बनी हैं। एक मंजिल ईंटों से बनी है। इसमें कुआं भी है और चार कक्ष बने हैं।
ये बावड़ी 150 साल पुरानी बताई जा रही है। डीएम ने बताया कि जरूरत पड़ी तो पुरातत्व निदेशालय की टीम को पत्र भेजा जाएगा। डीएम ने बताया कि बावड़ी के कुछ समय पूर्व मिले मंदिर का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। जिससे लोग वहां पूजा कर सकें। इसके लिए अतिक्रमण भी हटाया जाएगा।