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Sambhal News: करोड़ों पर पानी फिरा, नहीं बुझी अमृत सरोवरों की प्यास
Thu, 16 May 2024 05:18 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 16 May 2024 05:18 AM IST
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संभल। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों के सौंदर्यीकरण और जल संरक्षण के लिए कवायद तो की, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए अमृत सरोवर जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते सूख चुके हैं। धरती की सूखती कोख को नया जीवन देने वाले सरोवर ही बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। अमृत सरोवरों के निर्माण में खर्च किए गए करोड़ों रुपये पर पानी फिर गया है।
जल संरक्षण करने के लिए सरकार ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 135 तालाबों को अमृत सरोवर का रूपप्देकर कायाकल्प कराया था। इसमें संभल, असमोली, रजपुरा, गुन्नौर, बहजोई, पवांसा, बनियाठेर में 17 और जुनावई में 16 अमृत सरोवन बने हैं। इनको 75वें अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में तैयार कराया गया था। पिकनिक स्पॉट का रूप दिया गया था। लेकिन कुछ ही माह बाद जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते अमृत सरोवर बदहाल हो गए। भीषण गर्मी में अमृत सरोवरों में पानी की बूंद भी नहीं हैं। सौंदर्यीकरण खत्म होने के साथ ही गंदगी के ढेर लगे हैं। अमृत सरोवर पर लोगों के टहलने के लिए इंटरलाकिंग सड़क, झंडा फहराने का चबूतरा, पानी के लिए नल व छाया के लिए पौधे रोपने का कार्य किया गया था। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। लेकिन देखरेख और जिम्मेदारों की उदासीनता से बदहाल हो गए। बनियाठेर ब्लॉक के गांव बेहटा साहू और मोहम्मदपुर बाबई में भी तालाब पर कई कई लाख रुपये खर्चा हुए हैं लेकिन स्थिति बदहाल है। कहा जाए तो यह स्थिति जिले के ज्यादातर अमृत सरोवर की है। जिसमें जिम्मेदार भी संज्ञान नहीं ले रहे हैं।
सीन एक : पवांसा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सौंधन में बना अमृत सरोवर में गंदगी का ढेर लगा है। महिलाएं इस सरोवर में उपले थाप रही हैं। गांव का गंदा पानी भी सरोवर ही जा रहा है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सूरत नहीं बदल सकी है।
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सीन दो: असमोली ब्लॉक क्षेत्र के गांव भटपुरा में अमृत सरोवर तालाब किनारे उपले लगे मिले। बैठने के लिए लगी बैंच गंदगी और घास से घिरी है। जबकि कुछ समय पहले ही लाखों रुपये खर्च कर इसकी सूरत संवारी गई थी। इसके बाद भी बदहाली बरकार है।
सीन तीन : बहजोई ब्लॉक क्षेत्र के गांव बरखेड़ा सोनक में बना अमृत सरोवर सूखा पड़ा है। शासन के निर्देश थे कि पानी भरा रहना है लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। सौंदर्यीकरण जो कराया गया था वह भी खत्म हो गया है। कहीं कोई पौधा रोपित हुआ नजर नहीं आ रहा है। सरोवर सूखा होने से स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है कि संवारने का काम भी सही तरीके से नहीं कराया गया।
सीन चार : रजपुरा ब्लॉक क्षेत्र के गांव सिहावली में आधा-अधूरा अमृत सरोवर पड़ा है। जबकि कागजों में कोई भी सरोवर अधूरा नहीं है। सभी की स्थिति सही है। यदि हकीकत देखी जाए तो शासकीय धन का दुरूपयोग किया गया है। लाखों रुपये खर्च किए गए हैं लेकिन कहां किए गए इसका जवाब जिम्मेदार नहीं दे पाएंगे। पड़ताल के दौरान यह हकीकत सामने आई है। अब जिम्मेदार इसका खर्चा भी बताने से कतरा रहे हैं।
कोट
अमृत सरोवर को संवारने का काम कराया जाएगा। इसके लिए सभी खंड विकास अधिकारी व उनका स्टाफ काम करेगा। अमृत सरोवर का निरीक्षण भी करेंगे जहां कोई कमियां मिलेंगी वहां जिम्मेदारी तय की जाएगी। -भरत कुमार मिश्र, मुख्य विकास अधिकारी, संभल
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जल संरक्षण करने के लिए सरकार ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 135 तालाबों को अमृत सरोवर का रूपप्देकर कायाकल्प कराया था। इसमें संभल, असमोली, रजपुरा, गुन्नौर, बहजोई, पवांसा, बनियाठेर में 17 और जुनावई में 16 अमृत सरोवन बने हैं। इनको 75वें अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में तैयार कराया गया था। पिकनिक स्पॉट का रूप दिया गया था। लेकिन कुछ ही माह बाद जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते अमृत सरोवर बदहाल हो गए। भीषण गर्मी में अमृत सरोवरों में पानी की बूंद भी नहीं हैं। सौंदर्यीकरण खत्म होने के साथ ही गंदगी के ढेर लगे हैं। अमृत सरोवर पर लोगों के टहलने के लिए इंटरलाकिंग सड़क, झंडा फहराने का चबूतरा, पानी के लिए नल व छाया के लिए पौधे रोपने का कार्य किया गया था। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। लेकिन देखरेख और जिम्मेदारों की उदासीनता से बदहाल हो गए। बनियाठेर ब्लॉक के गांव बेहटा साहू और मोहम्मदपुर बाबई में भी तालाब पर कई कई लाख रुपये खर्चा हुए हैं लेकिन स्थिति बदहाल है। कहा जाए तो यह स्थिति जिले के ज्यादातर अमृत सरोवर की है। जिसमें जिम्मेदार भी संज्ञान नहीं ले रहे हैं।
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सीन एक : पवांसा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सौंधन में बना अमृत सरोवर में गंदगी का ढेर लगा है। महिलाएं इस सरोवर में उपले थाप रही हैं। गांव का गंदा पानी भी सरोवर ही जा रहा है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सूरत नहीं बदल सकी है।
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सीन दो: असमोली ब्लॉक क्षेत्र के गांव भटपुरा में अमृत सरोवर तालाब किनारे उपले लगे मिले। बैठने के लिए लगी बैंच गंदगी और घास से घिरी है। जबकि कुछ समय पहले ही लाखों रुपये खर्च कर इसकी सूरत संवारी गई थी। इसके बाद भी बदहाली बरकार है।
सीन तीन : बहजोई ब्लॉक क्षेत्र के गांव बरखेड़ा सोनक में बना अमृत सरोवर सूखा पड़ा है। शासन के निर्देश थे कि पानी भरा रहना है लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। सौंदर्यीकरण जो कराया गया था वह भी खत्म हो गया है। कहीं कोई पौधा रोपित हुआ नजर नहीं आ रहा है। सरोवर सूखा होने से स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है कि संवारने का काम भी सही तरीके से नहीं कराया गया।
सीन चार : रजपुरा ब्लॉक क्षेत्र के गांव सिहावली में आधा-अधूरा अमृत सरोवर पड़ा है। जबकि कागजों में कोई भी सरोवर अधूरा नहीं है। सभी की स्थिति सही है। यदि हकीकत देखी जाए तो शासकीय धन का दुरूपयोग किया गया है। लाखों रुपये खर्च किए गए हैं लेकिन कहां किए गए इसका जवाब जिम्मेदार नहीं दे पाएंगे। पड़ताल के दौरान यह हकीकत सामने आई है। अब जिम्मेदार इसका खर्चा भी बताने से कतरा रहे हैं।
कोट
अमृत सरोवर को संवारने का काम कराया जाएगा। इसके लिए सभी खंड विकास अधिकारी व उनका स्टाफ काम करेगा। अमृत सरोवर का निरीक्षण भी करेंगे जहां कोई कमियां मिलेंगी वहां जिम्मेदारी तय की जाएगी। -भरत कुमार मिश्र, मुख्य विकास अधिकारी, संभल