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जिले में तेज बुखार से तीन और लोगों की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Wed, 30 Sep 2015 12:48 AM IST
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डेंगू, मलेरिया, वायरल आदि बुखार से होने वाली मौतों का सिलसिला अभी थमा नहीं है। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ हाथ पर हाथ रखे बैठा है, जबकि पिछले 12 घंटे में नरौली कस्बे में दो और लोगों की जान चली गई है। एक पखवाड़े में यहां में सात लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि संभल में बुखार पीड़ित एक युवती की मौत हो गई।
नरौली कस्बे के मुहल्ला मंशा देवी निवासी मंगली की बेटी शोभा भारती को 15 दिन पहले बुखार आया था। नरौली में ही उपचार चलता रहा। तीन दिन पहले ही मुरादाबाद भर्ती कराया गया। वहां से हायर सेंटर रेफर कर दिया। मंगलवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
नरौली के ही मुहल्ला फूलबाग निवासी अल्ताफ हुसैन (60) पुत्र शराफत हुसैन को सप्ताहभर पहले तेज बुखार आया था। उपचार कराने के बावजूद बुखार नहीं गया। सोमवार की देर शाम उनकी मौत हो गई। पत्नी जुबैदा ने बताया कि नरौली के ही डाक्टर का उपचार चल रहा था लेकिन बुखार कम नहीं हो रहा था।
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ग्रामीणों के अनुसार यहां पिछले पंद्रह दिनों में यहां पांच मौते पहले हो चुकी है, अब तक सात लोगों की जान चली गई है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग को लोगों की मौतों की परवाह नहीं है, सभी डाक्टर यही कहने में लगे हैं कि डेंगू नहीं है।
सरकारी अस्पताल में न तो डेंगू की रोकथाम के कोई उपाय है और न ही साफ- सफाई पर ही ध्यान दिया जा रहा है। उधर, संभल के हल्लू सराय निवासी राम सिंह कश्यप की बेटी दीपा कई दिनों से बुखार पीड़ित थी। उसे दिमागी बुखार बताया गया है।
रविवार को मुरादाबाद रेफर किया गया है। दीपा मुरादाबाद के निजी नर्सिंग होम के आईसीयू में है। उसका उपचार चल रहा है। परिजनों ने बताया कि पांच दिन पहले उसे बुखार आया था। तत्काल संभल में ही उपचार कराया लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ जिसके चलते चिकित्सक ने किसी बड़े नर्सिंग होम में ले जाने की सलाह दी थी। इसके बाद ही मुरादाबाद में उपचार कराया जा रहा है।
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नरौली कस्बे के मुहल्ला मंशा देवी निवासी मंगली की बेटी शोभा भारती को 15 दिन पहले बुखार आया था। नरौली में ही उपचार चलता रहा। तीन दिन पहले ही मुरादाबाद भर्ती कराया गया। वहां से हायर सेंटर रेफर कर दिया। मंगलवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
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नरौली के ही मुहल्ला फूलबाग निवासी अल्ताफ हुसैन (60) पुत्र शराफत हुसैन को सप्ताहभर पहले तेज बुखार आया था। उपचार कराने के बावजूद बुखार नहीं गया। सोमवार की देर शाम उनकी मौत हो गई। पत्नी जुबैदा ने बताया कि नरौली के ही डाक्टर का उपचार चल रहा था लेकिन बुखार कम नहीं हो रहा था।
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ग्रामीणों के अनुसार यहां पिछले पंद्रह दिनों में यहां पांच मौते पहले हो चुकी है, अब तक सात लोगों की जान चली गई है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग को लोगों की मौतों की परवाह नहीं है, सभी डाक्टर यही कहने में लगे हैं कि डेंगू नहीं है।
सरकारी अस्पताल में न तो डेंगू की रोकथाम के कोई उपाय है और न ही साफ- सफाई पर ही ध्यान दिया जा रहा है। उधर, संभल के हल्लू सराय निवासी राम सिंह कश्यप की बेटी दीपा कई दिनों से बुखार पीड़ित थी। उसे दिमागी बुखार बताया गया है।
रविवार को मुरादाबाद रेफर किया गया है। दीपा मुरादाबाद के निजी नर्सिंग होम के आईसीयू में है। उसका उपचार चल रहा है। परिजनों ने बताया कि पांच दिन पहले उसे बुखार आया था। तत्काल संभल में ही उपचार कराया लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ जिसके चलते चिकित्सक ने किसी बड़े नर्सिंग होम में ले जाने की सलाह दी थी। इसके बाद ही मुरादाबाद में उपचार कराया जा रहा है।