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अपने कर्म के आधार पर फल भोगती हैं आत्मा

Wed, 28 Oct 2015 12:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला चंदौसी
ब्यूरो/अमर उजाला चंदौसी Updated Wed, 28 Oct 2015 12:55 AM IST
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sakar vishwahari samagam
मानव मिलन सद्भावना समागम के छठे दिन अध्यात्मिक प्रवचन करते हुए साकार विश्व हरि ने कहाकि मौजूदा दौर में लूटने वालों की कोई कमी नहीं है, मीठी बोली बोलकर भी लूटा जा रहा है। साकार विश्व हरि ने पंडाल में जुटे आस्था के सैलाब के बीच कहाकि अध्यात्मिक क्षेत्र में किसी की भी उम्र नहीं देखी जाती है।
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जाति धर्म या महिला पुरुष नहीं देखा जाता। संसार में ध्रुव का उदाहरण मौजूद है, जिसने साकार विश्वहरि को प्रसन्न करके सबसे ऊंचा स्थान पाया। जब कोई आत्मा जन्म लेकर संसार में आती है तो वह अपने संचित कर्म के आधार पर भोग भोगता है।
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यदि आपने सत्य कर्म किया है तो वह आपकी पूजा है। आपका मार्गदर्शन संसार के मालिक कर रहे हैं, न कि कोई आदमी। जिन्होंने स्वयं के तत्व को जानकर हरि के वचन को माना और साकार विश्वहरि के बताए रास्ते पर चल पड़े तो संसार के आवागमन से छुटकारा मिल जाएगा।
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हरि-परमात्मा से कुछ भी छिपा नहीं है। इसमें रमेशचंद्र, यादराम, अशोक कुमार, जसवंत सिंह, मनोहर सिंह, पान सिंह, क्रांति देवी, माया देवी, पप्पू सिंह, मुरारी लाल, बावी सागर, डूंगरमल, गायत्री, राजा रानी, महिलाल, राजा बाबू हुकमु सिंह, विपिन, उमेश, तिलक राज, दिलीप आदि ने सहयोग दिया।
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