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बालक के अपहरण के मामले में तीन को आजीवन कारावास की सजा
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चंदौसी। एक दशक पूर्व बहजोई थाना क्षेत्र के एक गांव से एक बालक को अगवा किए जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संभल (चंदौसी) सुशील कुमार ने तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस-दस हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
घटना क्रम के अनुसार आठ दिसंबर-2009 को रमेश अपनी ससुराल गया था लेकिन उसके परिवार के सभी लोग उसके गांव परतापुर स्थित घर में ही थे। मध्यरात्रि को तीन अज्ञात लोगों ने उसके घर में घुसकर उसके बारह साल के पुत्र रामवीर का अपहरण कर लिया था। शोर मचा तो परिजनों ने उसकी काफी तलाश की लेकिन उसका कहीं भी पता नहीं चल सका। थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखाया गया। 13 दिसंबर-2009 को पुलिस को सूचना मिली कि रामवीर का अपहरण बदायूं जिले के इस्लाम नगर थाने के नौना गांव निवासी बाली उर्फ बलिया, सतीश व खान चंद्र उर्फ खनुआ ने किया है, जो इस समय शमशोई के एक आम के बाग में मौजूद हैं।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद सिंह ने बताया कि उसी समय पुलिस ने वहां दबिश दी तो मुठभेड़ के बाद अगवा बालक को बरामद कर लिया गया। हालांकि तीनों आरोपी मौके से भागने में सफल हो गए।
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पुलिस ने बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संभल (चंदौसी) में हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद साक्ष्यों आदि के आधार पर मुठभेड़ व शस्त्र बरामदगी आदि की धाराओं में तो आरोपियों को न्यायालय ने दोषमुक्त माना लेकिन धारा 364ए में दोषी करार दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संभल सुशील कुमार ने 29 मई 2019 को फैसला सुनाया।
जिसमें बाली उर्फ बलिया, सतीश व खानचंद्र उर्फ खनुआ को धारा 364ए के तहत आजीवन कारावास की सजा के साथ ही दस-दस हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना अदा नहीं करने की दशा में अभियुक्तों को एक एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जेल में बिताई गई अवधि यदि कोई हो तो सजा में समायोजित की जाएगी। जुर्माने की 50 प्रतिशत धनराशि पीड़ित को बतौर प्रतिकर अदा करने का भी आदेश दिया है।
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घटना क्रम के अनुसार आठ दिसंबर-2009 को रमेश अपनी ससुराल गया था लेकिन उसके परिवार के सभी लोग उसके गांव परतापुर स्थित घर में ही थे। मध्यरात्रि को तीन अज्ञात लोगों ने उसके घर में घुसकर उसके बारह साल के पुत्र रामवीर का अपहरण कर लिया था। शोर मचा तो परिजनों ने उसकी काफी तलाश की लेकिन उसका कहीं भी पता नहीं चल सका। थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखाया गया। 13 दिसंबर-2009 को पुलिस को सूचना मिली कि रामवीर का अपहरण बदायूं जिले के इस्लाम नगर थाने के नौना गांव निवासी बाली उर्फ बलिया, सतीश व खान चंद्र उर्फ खनुआ ने किया है, जो इस समय शमशोई के एक आम के बाग में मौजूद हैं।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद सिंह ने बताया कि उसी समय पुलिस ने वहां दबिश दी तो मुठभेड़ के बाद अगवा बालक को बरामद कर लिया गया। हालांकि तीनों आरोपी मौके से भागने में सफल हो गए।
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पुलिस ने बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संभल (चंदौसी) में हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद साक्ष्यों आदि के आधार पर मुठभेड़ व शस्त्र बरामदगी आदि की धाराओं में तो आरोपियों को न्यायालय ने दोषमुक्त माना लेकिन धारा 364ए में दोषी करार दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संभल सुशील कुमार ने 29 मई 2019 को फैसला सुनाया।
जिसमें बाली उर्फ बलिया, सतीश व खानचंद्र उर्फ खनुआ को धारा 364ए के तहत आजीवन कारावास की सजा के साथ ही दस-दस हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना अदा नहीं करने की दशा में अभियुक्तों को एक एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जेल में बिताई गई अवधि यदि कोई हो तो सजा में समायोजित की जाएगी। जुर्माने की 50 प्रतिशत धनराशि पीड़ित को बतौर प्रतिकर अदा करने का भी आदेश दिया है।