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पूनम के खाते से वापस हुई मुआवजा राशि
सार
गंगा एक्सप्रेसवे की भूमि में हुई घपलेबाजी पर प्रशासन का लगातार शिकंजा कस रहा है।प्रशासन ने अंतिम निस्तारण तक इस रोक को जारी रहने का भी आग्रह किया था।जिसमें चकबंदी अधिकारियों पर घपलेबाजी करने का आरोप है।
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विस्तार
गंगा एक्सप्रेसवे की भूमि में हुई घपलेबाजी पर प्रशासन का लगातार शिकंजा कस रहा है। राजपाल के पक्ष में डीडीसी का निर्णय आने के बाद अब पूनम देवी के खाते में आई मुआवजा राशि वापस हो गई है।
पूनम देवी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर प्रशासन पर भुगतान में देरी करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले में संज्ञान लिया और जिला प्रशासन को ब्याज समेत मुआवजा राशि दिए जाने के आदेश किए थे। जिला प्रशासन ने मुआवजा राशि पूनम देवी के खाते में भेज दी लेकिन अपने जवाब दाखिल करने के दौरान धन निकासी पर रोक लगाने का आग्रह किया था। प्रशासन ने अंतिम निस्तारण तक इस रोक को जारी रहने का भी आग्रह किया था। अब डीडीसी न्यायालय से मामले में निर्णय आने पर पूनम देवी की जमीन 1.10 हेक्टेयर तय हुई है। जिसका भुगतान 1056000 रुपये पहले ही हो चुका था। पूनम देवी ने .77 हेक्टेयर भूमि के मुआवजा राशि के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली थी। जिसकी मुआवाज राशि 739200 ब्याज समेत अदा हुई थी। अब अंतिम निर्णय आने पर मुआवजा राशि वापस ले ली गई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूनम देवी ने अपनी निर्धारित जमीन से ज्यादा का बैनामा चकबंदी अधिकारियों की मिलीभगत से कराया था। जांच में मामला पकड़ा गया और चकबंदी न्यायालय का भी निर्णय आ चुका है। इसलिए निर्धारित जमीन का मुआवजा जो पहले ही दिया जा चुका था। उसको वापस ले लिया गया है।
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मालूम हो जून 2021 में गंगा एक्सप्रेस-वे की जमीनों के बैनामे की प्रक्रिया शुरू हुई थी। संभल के गांव मझोला में पहली गड़बड़ी सामने आई है। जिसमें चकबंदी अधिकारियों पर घपलेबाजी करने का आरोप है। जिलाधिकारी के स्तर से कराई गई जांच में भी घपलेबाजी सामने आ चुकी है। अब कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। चकबंदी न्यायालय में चल रहे विवादों के भी निस्तारण हो गए हैं। बता दें मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला 594 किलोमीटर लंबा छह लेन का गंगा एक्सप्रेस-वे संभल जिले के 31 गांवों से होकर गुजर रहा है। एक्सप्रेस-वे के लिए करीब 450 हेक्टेयर जमीन ली गई है।
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पूनम देवी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर प्रशासन पर भुगतान में देरी करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले में संज्ञान लिया और जिला प्रशासन को ब्याज समेत मुआवजा राशि दिए जाने के आदेश किए थे। जिला प्रशासन ने मुआवजा राशि पूनम देवी के खाते में भेज दी लेकिन अपने जवाब दाखिल करने के दौरान धन निकासी पर रोक लगाने का आग्रह किया था। प्रशासन ने अंतिम निस्तारण तक इस रोक को जारी रहने का भी आग्रह किया था। अब डीडीसी न्यायालय से मामले में निर्णय आने पर पूनम देवी की जमीन 1.10 हेक्टेयर तय हुई है। जिसका भुगतान 1056000 रुपये पहले ही हो चुका था। पूनम देवी ने .77 हेक्टेयर भूमि के मुआवजा राशि के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली थी। जिसकी मुआवाज राशि 739200 ब्याज समेत अदा हुई थी। अब अंतिम निर्णय आने पर मुआवजा राशि वापस ले ली गई है।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूनम देवी ने अपनी निर्धारित जमीन से ज्यादा का बैनामा चकबंदी अधिकारियों की मिलीभगत से कराया था। जांच में मामला पकड़ा गया और चकबंदी न्यायालय का भी निर्णय आ चुका है। इसलिए निर्धारित जमीन का मुआवजा जो पहले ही दिया जा चुका था। उसको वापस ले लिया गया है।
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मालूम हो जून 2021 में गंगा एक्सप्रेस-वे की जमीनों के बैनामे की प्रक्रिया शुरू हुई थी। संभल के गांव मझोला में पहली गड़बड़ी सामने आई है। जिसमें चकबंदी अधिकारियों पर घपलेबाजी करने का आरोप है। जिलाधिकारी के स्तर से कराई गई जांच में भी घपलेबाजी सामने आ चुकी है। अब कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। चकबंदी न्यायालय में चल रहे विवादों के भी निस्तारण हो गए हैं। बता दें मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला 594 किलोमीटर लंबा छह लेन का गंगा एक्सप्रेस-वे संभल जिले के 31 गांवों से होकर गुजर रहा है। एक्सप्रेस-वे के लिए करीब 450 हेक्टेयर जमीन ली गई है।