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संभल जिले के 31 गांवों में का पानी हुआ दूषित, आर्सेनिक रिमूवल यूनिट नहीं लग सकीं
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संभल। जिले के 31 गांवों में ऐसी बस्तियां हैं जहां के सरकारी हैंडपंपों के पानी में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर तक पाई गई। पानी में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर तक होने का संज्ञान लेने के बाद जल निगम ने आर्सेनिक रिमूवल यूनिट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था लेकिन किसी भी गांव में अब तक एक भी आर्सेनिक रिमूवल यूनिट नहीं लगाई गई है। जिसके चलते तमाम लोग दूषित पानी पी रहे हैं।
अगर आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है तो जान लीजिए की खतरा है। जिले की 31 बस्तियों में इस मात्रा से अधिक मात्रा में आर्सेनिक पाया जा चुका है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। जिन बस्तियों के हैंडपंपों में आर्सेनिक अधिक पाया गया है उनमें शरीफपुर, हैबतपुर, मवई ढोल, रचेटा, सैंधरी, शहबाजपुर, नंदरौली, गौहत, किसौली, ततारपुर घोसी, सिकंदरपुर सराय, इकोना, बाघऊ, देहरी जग्गू, रतूपुरा, राया बुजुर्ग, चितनपुर, नगलिया भूड़, सिंहपुर, धनीपुर, उधरनपुरखागी, बारीपुर भमरौआ, बेनीपुर चक, लखौरी जलालपुर, गुलालपुर, महमूदपुर इम्मा, पीपली रहमापुर गांव की कुल 31 बस्तियां शामिल हैं।
इन गांवों के सरकारी हैंडपंपों के नमूने लिए गए थे, जिसमें पानी में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर तक पाई गई थी। डा. स्मिता पाटिल का कहना है कि पानी में निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में आर्सेनिक की मौजूदगी से कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। आर्सेनिक एक सेमी मैटलिक तत्व है जो आयरन, कैल्शियम, कॉपर आदि के साथ क्रिया करता है। इससे पानी में जहरीलापन पैदा होता है। इस पानी के सेवन से नसों का रोग, किडनी के रोग, मानसिक रोग, हृदय रोग, कैंसर तक हो सकता है।
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जल निगम ने भेजा था प्रस्ताव
जल निगम ने आर्सेनिक रिमूवल यूनिट 31 बस्तियों में लगाने के प्रस्ताव विभागीय मुख्यालय पर भेजा था। अब अगर वहां से यूनिट मिलती हैं तो उन्हें लगवाएंगे।
राकेश उपवन, अधिशासी अभियंता, जल निगम, संभल।
सरकार ने बंद कर दिया हैंडपंप देना, कैसे मिले स्वच्छ पेयजल
संभल के विधायक नवाब इकबाल महमूद ने कहा कि सरकार से प्रतिवर्ष एक विधायक को 100 हैंडपंप मिलते थे जहां समस्या होती थी वहां हैंडपंप लगवा दिए जाते थे लेकिन अब इस सरकार ने हैंडपंप का आवंटन नहीं किया। अब जनता को स्वच्छ पेयजल कैसे मिले। यह सवाल उठाए जाने पर उन्होंने कहा कि बेशक सरकार विधानसभा में कुछ सुनना नहीं चाहती है पर जनता की समस्या को वह खुद सदन में उठाएंगे ताकि जनता को स्वच्छ पेयजल मिल सके।
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अगर आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है तो जान लीजिए की खतरा है। जिले की 31 बस्तियों में इस मात्रा से अधिक मात्रा में आर्सेनिक पाया जा चुका है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। जिन बस्तियों के हैंडपंपों में आर्सेनिक अधिक पाया गया है उनमें शरीफपुर, हैबतपुर, मवई ढोल, रचेटा, सैंधरी, शहबाजपुर, नंदरौली, गौहत, किसौली, ततारपुर घोसी, सिकंदरपुर सराय, इकोना, बाघऊ, देहरी जग्गू, रतूपुरा, राया बुजुर्ग, चितनपुर, नगलिया भूड़, सिंहपुर, धनीपुर, उधरनपुरखागी, बारीपुर भमरौआ, बेनीपुर चक, लखौरी जलालपुर, गुलालपुर, महमूदपुर इम्मा, पीपली रहमापुर गांव की कुल 31 बस्तियां शामिल हैं।
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इन गांवों के सरकारी हैंडपंपों के नमूने लिए गए थे, जिसमें पानी में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर तक पाई गई थी। डा. स्मिता पाटिल का कहना है कि पानी में निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में आर्सेनिक की मौजूदगी से कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। आर्सेनिक एक सेमी मैटलिक तत्व है जो आयरन, कैल्शियम, कॉपर आदि के साथ क्रिया करता है। इससे पानी में जहरीलापन पैदा होता है। इस पानी के सेवन से नसों का रोग, किडनी के रोग, मानसिक रोग, हृदय रोग, कैंसर तक हो सकता है।
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जल निगम ने भेजा था प्रस्ताव
जल निगम ने आर्सेनिक रिमूवल यूनिट 31 बस्तियों में लगाने के प्रस्ताव विभागीय मुख्यालय पर भेजा था। अब अगर वहां से यूनिट मिलती हैं तो उन्हें लगवाएंगे।
राकेश उपवन, अधिशासी अभियंता, जल निगम, संभल।
सरकार ने बंद कर दिया हैंडपंप देना, कैसे मिले स्वच्छ पेयजल
संभल के विधायक नवाब इकबाल महमूद ने कहा कि सरकार से प्रतिवर्ष एक विधायक को 100 हैंडपंप मिलते थे जहां समस्या होती थी वहां हैंडपंप लगवा दिए जाते थे लेकिन अब इस सरकार ने हैंडपंप का आवंटन नहीं किया। अब जनता को स्वच्छ पेयजल कैसे मिले। यह सवाल उठाए जाने पर उन्होंने कहा कि बेशक सरकार विधानसभा में कुछ सुनना नहीं चाहती है पर जनता की समस्या को वह खुद सदन में उठाएंगे ताकि जनता को स्वच्छ पेयजल मिल सके।