{"_id":"588bb0eb4f1c1ba333cf7376","slug":"chandosi-men-tute-track-se-gujar-gyi-sadbhawna-exp","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंदौसी में टूटे ट्रैक से गुजर गई सद्भावना एक्सप्रेस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंदौसी में टूटे ट्रैक से गुजर गई सद्भावना एक्सप्रेस
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sat, 28 Jan 2017 02:13 AM IST
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- फोटो : getty images
ट्रेन के पास होते ही जीआरपी की नजर टूटे ट्रैक पर पड़ी तो खलबली मच गई। इसकी सूचना रेलपथ सेक्शन को दी गई और आनन-फानन में पहुंची टीम ने ट्रैक को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जोड़ दिया।
रक्सौल से चलकर दिल्ली तक जाने वाली सद्भावना एक्सप्रेस का समय चंदौसी रेलवे स्टेशन पर मध्यरात्रि 12.05 बजे आने का और 12.10 बजे जाने का तय है। लेकिन यह ट्रेन 13 घंटे देरी के साथ शुक्रवार की दोपहर करीब 1.05 बजे यहां पहुंची। सिग्नल मिलने के बाद 1.10 बजे ट्रेन टूटे ट्रैक से गुजर गई। ट्रेन के गुजरने के बाद जीआरपी की नजर पड़ी। थानाध्यक्ष राम कुंवर सिंह पहुंचे। तत्काल ही रेलपथ सेक्शन को जानकारी दी गई। सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेलपथ) आरपी त्रिपाठी ने बताया कि टीम को तत्काल लगाकर रेलपथ को ज्वाइंट किया गया, ताकि रेल यातायात में बाधा उत्पन्न न हो। इसके बाद संबंधित पटरी को बदलने की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सिग्नल सिस्टम ट्रैक से जुड़ा रहता है, यदि पहले ट्रैक टूटा होता तो सिग्नल ही नहीं मिलता, इसलिए यही माना जा रहा है कि ट्रेन गुजरने के दौरान ही पटरी टूटी है। जिसे ज्वाइंट कर सुचारु कर दिया गया है। कुछ लोगों का मानना है कि स्टेशन पर स्लीपर बदलने का कार्य तल रहा है, ट्रैक की नीचे ठीक से पत्थर नहीं लगे, इससे गड्ढ़ा होने के कारण ट्रेन के दबाव से पटरी टूट गई। गनीमत रही कि स्टेशन पर होने के कारण ट्रेन की रफ्तार भी कम थी, अन्यथा ट्रैक जिस तरह टूटा था, उससे कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।
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रक्सौल से चलकर दिल्ली तक जाने वाली सद्भावना एक्सप्रेस का समय चंदौसी रेलवे स्टेशन पर मध्यरात्रि 12.05 बजे आने का और 12.10 बजे जाने का तय है। लेकिन यह ट्रेन 13 घंटे देरी के साथ शुक्रवार की दोपहर करीब 1.05 बजे यहां पहुंची। सिग्नल मिलने के बाद 1.10 बजे ट्रेन टूटे ट्रैक से गुजर गई। ट्रेन के गुजरने के बाद जीआरपी की नजर पड़ी। थानाध्यक्ष राम कुंवर सिंह पहुंचे। तत्काल ही रेलपथ सेक्शन को जानकारी दी गई। सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेलपथ) आरपी त्रिपाठी ने बताया कि टीम को तत्काल लगाकर रेलपथ को ज्वाइंट किया गया, ताकि रेल यातायात में बाधा उत्पन्न न हो। इसके बाद संबंधित पटरी को बदलने की कार्रवाई की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि सिग्नल सिस्टम ट्रैक से जुड़ा रहता है, यदि पहले ट्रैक टूटा होता तो सिग्नल ही नहीं मिलता, इसलिए यही माना जा रहा है कि ट्रेन गुजरने के दौरान ही पटरी टूटी है। जिसे ज्वाइंट कर सुचारु कर दिया गया है। कुछ लोगों का मानना है कि स्टेशन पर स्लीपर बदलने का कार्य तल रहा है, ट्रैक की नीचे ठीक से पत्थर नहीं लगे, इससे गड्ढ़ा होने के कारण ट्रेन के दबाव से पटरी टूट गई। गनीमत रही कि स्टेशन पर होने के कारण ट्रेन की रफ्तार भी कम थी, अन्यथा ट्रैक जिस तरह टूटा था, उससे कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।
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