{"_id":"61ec51686850b104e9230184","slug":"bsp-has-nominated-shakeel-from-sambhal-and-rafat-ulla-alias-leader-chhidda-from-asmoli-sambhal-news-mbd416791377","type":"story","status":"publish","title_hn":"बसपा ने संभल से शकील और असमोली से रफात उल्ला उर्फ नेता छिद्दा को बनाया प्रत्याशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बसपा ने संभल से शकील और असमोली से रफात उल्ला उर्फ नेता छिद्दा को बनाया प्रत्याशी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संभल। बसपा ने जिले की चारों विधानसभा क्षेत्र संभल, असमोली, चंदौसी और गुन्नौर के प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। चंदौसी के प्रत्याशी की घोषणा तो काफी समय पहले कर दी थी लेकिन पार्टी हाईकमान से सूची जारी नहीं की गई थी।
संभल, असमोली और गुन्नौर में असमंजस के हालात बने हुए थे। प्रबल दावेदार भले थे लेकिन राजनीतिक उठा पठक के इस दौर में बदलाव की भी संभावनाएं बनी थीं लेकिन इन कयास पर शनिवार को विराम लग गया।
संभल से शकील अहमद कुरैशी को प्रत्याशी बनाया है। असमोली से रफात उल्ला उर्फ नेता छिद्दा पर भरोसा जताया है। गुन्नौर से हाजी फिरोज आलम बसपा का चुनावी मैदान संभालने के लिए उतरे हैं। चंदौसी की जिम्मेदारी डा. रणविजय सिंह को सौंपी है। हालांकि बसपा भाजपा और सपा और कांग्रेस से प्रत्याशी घोषित करने में पीछे रही है।
विज्ञापन
शकील अहमद कुरैशी को संभल विधानसभा क्षेत्र से बसपा ने पहली बार प्रत्याशी बनाया है। शकील अहमद कुरैशी 1989 में नगर पालिका परिषद के सभासद रहे। 2012 में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय लड़े, लेकिन हार गए थे। 2017 में उनकी पत्नी आरिफा शकील नगर पालिका परिषद की निर्दलीय अध्यक्ष रहीं। शकील अहमद कुरैशी ने सपा छोड़ 2019 में बसपा का दामन थामा और विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब प्रत्याशी बनाए गए हैं।
रफात उल्ला उर्फ नेता छिद्दा बसपा के पुरानी सिपाही माने जाते हैं। उन्हें पार्टी ने असमोली विधानसभा क्षेत्र से पहली बार प्रत्याशी बनाया है। हालांकि बसपा के टिकट पर उन्होंने संभल विधानसभा क्षेत्र से 1996 में चुनाव लड़ा था। जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उनकी पत्नी 1995 में जिला पंचायत का सदस्य रहीं। 2012 और 2017 में बसपा के टिकट पर संभल विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे, लेकिन कामयाब नहीं हुए। अब पार्टी ने चौथी बार उन पर भरोसा जताया है।
मुरादाबाद की चक्कर की मिलक निवासी डॉ. रणविजय सिंह पेशे से अधिवक्ता हैं। पार्टी में पिछले 30 से जुड़े हैं। वह बसपा के मुरादाबाद जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान में मुरादाबाद मंडल सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पार्टी ने उनकी निष्ठा का फल दिया है। जातीय समीकरणों को साधते हुए पार्टी ने उन्हें चंदौसी सीट से मैदान में उतारा है। डॉ. रणविजय सिंह का यह पहला चुनाव है। इससे पहले कोई चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा है।
बसपा ने गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र से नए चेहरे पर दांव लगाया है। असमोली क्षेत्र के गांव खगुपुर निवासी हाजी फिरोज आलम गुन्नौर से बसपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारे गए हैं। हाजी फिरोज आलम पहले तेल का कारोबार करते थे, अब प्रॉपर्टी का काम करते हैं। ये उनका पहला चुनाव है। इससे पहले उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है। हाजी फिरोज आलम पार्टी कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा संगठन में उनके पास कोई दायित्व नहीं है। पार्टी ने जाति विशेष बाहुल्य सीट पर नया चेहरा मैदान में उतारा है।
विज्ञापन
संभल, असमोली और गुन्नौर में असमंजस के हालात बने हुए थे। प्रबल दावेदार भले थे लेकिन राजनीतिक उठा पठक के इस दौर में बदलाव की भी संभावनाएं बनी थीं लेकिन इन कयास पर शनिवार को विराम लग गया।
विज्ञापन
संभल से शकील अहमद कुरैशी को प्रत्याशी बनाया है। असमोली से रफात उल्ला उर्फ नेता छिद्दा पर भरोसा जताया है। गुन्नौर से हाजी फिरोज आलम बसपा का चुनावी मैदान संभालने के लिए उतरे हैं। चंदौसी की जिम्मेदारी डा. रणविजय सिंह को सौंपी है। हालांकि बसपा भाजपा और सपा और कांग्रेस से प्रत्याशी घोषित करने में पीछे रही है।
विज्ञापन
शकील अहमद कुरैशी को संभल विधानसभा क्षेत्र से बसपा ने पहली बार प्रत्याशी बनाया है। शकील अहमद कुरैशी 1989 में नगर पालिका परिषद के सभासद रहे। 2012 में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय लड़े, लेकिन हार गए थे। 2017 में उनकी पत्नी आरिफा शकील नगर पालिका परिषद की निर्दलीय अध्यक्ष रहीं। शकील अहमद कुरैशी ने सपा छोड़ 2019 में बसपा का दामन थामा और विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब प्रत्याशी बनाए गए हैं।
रफात उल्ला उर्फ नेता छिद्दा बसपा के पुरानी सिपाही माने जाते हैं। उन्हें पार्टी ने असमोली विधानसभा क्षेत्र से पहली बार प्रत्याशी बनाया है। हालांकि बसपा के टिकट पर उन्होंने संभल विधानसभा क्षेत्र से 1996 में चुनाव लड़ा था। जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उनकी पत्नी 1995 में जिला पंचायत का सदस्य रहीं। 2012 और 2017 में बसपा के टिकट पर संभल विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे, लेकिन कामयाब नहीं हुए। अब पार्टी ने चौथी बार उन पर भरोसा जताया है।
मुरादाबाद की चक्कर की मिलक निवासी डॉ. रणविजय सिंह पेशे से अधिवक्ता हैं। पार्टी में पिछले 30 से जुड़े हैं। वह बसपा के मुरादाबाद जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान में मुरादाबाद मंडल सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पार्टी ने उनकी निष्ठा का फल दिया है। जातीय समीकरणों को साधते हुए पार्टी ने उन्हें चंदौसी सीट से मैदान में उतारा है। डॉ. रणविजय सिंह का यह पहला चुनाव है। इससे पहले कोई चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा है।
बसपा ने गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र से नए चेहरे पर दांव लगाया है। असमोली क्षेत्र के गांव खगुपुर निवासी हाजी फिरोज आलम गुन्नौर से बसपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारे गए हैं। हाजी फिरोज आलम पहले तेल का कारोबार करते थे, अब प्रॉपर्टी का काम करते हैं। ये उनका पहला चुनाव है। इससे पहले उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है। हाजी फिरोज आलम पार्टी कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा संगठन में उनके पास कोई दायित्व नहीं है। पार्टी ने जाति विशेष बाहुल्य सीट पर नया चेहरा मैदान में उतारा है।