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Sambhal News: संभल जामा मस्जिद बनाम मंदिर के वाद में पक्षकार बनाने के लिए दी अर्जी
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चंदौसी (संभल)। संभल की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए अदालत में दाखिल वाद में पक्षकार बनाने की मांग पर एक और अर्जी कोर्ट में दी गई है। इस बार प्रार्थनापत्र दिया है संभल जामा मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहम्मद काशिफ खां ने। उनके अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने ट्रस्ट अध्यक्ष का प्रार्थना रखते हुए इसे मुकदमे की पत्रावली में शामिल कर लिया है। इस पर दूसरे पक्ष को आपत्ति के लिए सुनवाई की अगली तिथि तक का वक्त दिया है। अगली सुनवाई 24 फरवरी को नियत है।
शनिवार को कोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल करने वाले मोहम्मद काशिफ खां संभल के पंजू सराय निवासी हैं। उनका तर्क है कि उक्त वाद षडयंत्र के तहत जामा मस्जिद को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रस्तुत किया गया है। संभल के सिविल जज सीनियर डिवीजन की चंदौसी स्थित अदालत में वाद दायर करते समय वादीगण ने जानबूझ कर संभल जामा मस्जिद ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी अथवा ट्रस्ट को पक्षकार नहीं बनाया। वर्तमान में जो प्रतिवादीगण हैं, वे सब जामा मस्जिद के हित में अपना पक्ष रखने में सक्षम नहीं हैं।
जामा मस्जिद से जुड़े इस मुकदमे में ट्रस्ट अध्यक्ष के रूप में उन्हें पक्ष रखना है और प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत करना है। वादी-प्रतिवादी को जानकारी है कि जामा मस्जिद का पंजीकृत ट्रस्ट मुकदमा दायर होने से पूर्व का है। जामा मस्जिद की देखभाल की जिम्मेदारी ट्रस्ट की ही है। संभल की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए 19 नवंबर 2024 को संभल के सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह के चंदौसी स्थित न्यायालय में वाद दायर किया गया था।
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संभल जिले के कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि, अधिवक्ता हरिशंकर जैन समेत आठ लोग इस मामले में वादी की भूमिका में हैं। कुछ समय बाद में इस मामले में पक्षकार बनने के लिए राष्ट्रीय हिंदू शक्ति दल के अध्यक्ष बहजोई के मूल निवासी सिमरन गुप्ता ने भी न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। उनका कहना है कि वह सनातनी हैं, उन्हें इस मुकदमे में पक्षकार बनाया जाए। सिमरन गुप्ता के इस प्रार्थनापत्र पर अभी न्यायालय के स्तर से रुख स्पष्ट नहीं किया गया है।
अधिवक्ता ने बताया कि न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 24 फरवरी नियत की है।
फर्जी है जामा मस्जिद के नाम से ट्रस्टः सदर
संभल। शाही जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली ने जामा मस्जिद ट्रस्ट को फर्जी बताया है। साथ ही कमेटी की ओर से कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी है। सदर ने कहा है कि शाही जामा मस्जिद की देखभाल इंतजामिया कमेटी करती है। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या जिला स्तरीय अदालतों में जो भी मामले विचाराधीन हैं सभी में कमेटी पक्षकार है। अब चंदौसी की अदालत में जामा मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष ने पक्षकार बनने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। जबकि जामा मस्जिद का कोई ट्रस्ट ही नहीं है। यह ट्रस्ट पूरी तरह से फर्जी है। पहले भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं। अब हम कार्रवाई के लिए कमेटी के अन्य पदाधिकारियों के साथ मंथन करेंगे और कार्रवाई कराई जाएगी। संवाद
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शनिवार को कोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल करने वाले मोहम्मद काशिफ खां संभल के पंजू सराय निवासी हैं। उनका तर्क है कि उक्त वाद षडयंत्र के तहत जामा मस्जिद को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रस्तुत किया गया है। संभल के सिविल जज सीनियर डिवीजन की चंदौसी स्थित अदालत में वाद दायर करते समय वादीगण ने जानबूझ कर संभल जामा मस्जिद ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी अथवा ट्रस्ट को पक्षकार नहीं बनाया। वर्तमान में जो प्रतिवादीगण हैं, वे सब जामा मस्जिद के हित में अपना पक्ष रखने में सक्षम नहीं हैं।
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जामा मस्जिद से जुड़े इस मुकदमे में ट्रस्ट अध्यक्ष के रूप में उन्हें पक्ष रखना है और प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत करना है। वादी-प्रतिवादी को जानकारी है कि जामा मस्जिद का पंजीकृत ट्रस्ट मुकदमा दायर होने से पूर्व का है। जामा मस्जिद की देखभाल की जिम्मेदारी ट्रस्ट की ही है। संभल की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए 19 नवंबर 2024 को संभल के सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह के चंदौसी स्थित न्यायालय में वाद दायर किया गया था।
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संभल जिले के कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि, अधिवक्ता हरिशंकर जैन समेत आठ लोग इस मामले में वादी की भूमिका में हैं। कुछ समय बाद में इस मामले में पक्षकार बनने के लिए राष्ट्रीय हिंदू शक्ति दल के अध्यक्ष बहजोई के मूल निवासी सिमरन गुप्ता ने भी न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। उनका कहना है कि वह सनातनी हैं, उन्हें इस मुकदमे में पक्षकार बनाया जाए। सिमरन गुप्ता के इस प्रार्थनापत्र पर अभी न्यायालय के स्तर से रुख स्पष्ट नहीं किया गया है।
अधिवक्ता ने बताया कि न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 24 फरवरी नियत की है।
फर्जी है जामा मस्जिद के नाम से ट्रस्टः सदर
संभल। शाही जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली ने जामा मस्जिद ट्रस्ट को फर्जी बताया है। साथ ही कमेटी की ओर से कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी है। सदर ने कहा है कि शाही जामा मस्जिद की देखभाल इंतजामिया कमेटी करती है। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या जिला स्तरीय अदालतों में जो भी मामले विचाराधीन हैं सभी में कमेटी पक्षकार है। अब चंदौसी की अदालत में जामा मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष ने पक्षकार बनने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। जबकि जामा मस्जिद का कोई ट्रस्ट ही नहीं है। यह ट्रस्ट पूरी तरह से फर्जी है। पहले भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं। अब हम कार्रवाई के लिए कमेटी के अन्य पदाधिकारियों के साथ मंथन करेंगे और कार्रवाई कराई जाएगी। संवाद