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सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोपों से घिरे 43 लोगों ने जवाब दाखिल किए
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answere of notice in caa ciolance in sambhal
संभल। बवाल के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोपों से घिरे 43 लोगों ने गुरुवार को अपर जिलाधिकारी की अदालत में अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से जवाब दाखिल किए। सभी ने खुद को निर्दोष बताया और पुलिस की ओर से भेजी गई रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए।
संभल में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान 19 व 20 दिसंबर को भारी बवाल हुआ था। इसमें बसों में तोड़फोड़ की गई। रोडवेज की एक बस फूंकी गई। तीन बाइकें जलाईं गईं। पथराव और फायरिंग की घटना में दो युवकों की जान गई थी। संभल कोतवाली और चंदौसी कोतवाली के साथ-साथ नखासा थाने में बलवा करने की रिपोर्ट दर्ज है। तीनों थानों की पुलिस ने संपत्ति की क्षति का आंकलन करते हुए 70 लोगों के खिलाफ अपर जिलाधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी के पास रिपोर्ट भेजी है जिसमें इन लोगों से वसूली कराए जाने की अपेक्षा की गई है।
अपर जिलाधिकारी ने सभी 70 लोगों के नाम नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में 59 लोगों को जवाब दाखिल करने की तारीख 9 जनवरी दी गई थी। इसी क्रम में गुरुवार को 43 लोगों ने अपने अधिवक्ताओं के जरिए नोटिस का जवाब दाखिल किया है। नोटिस प्राप्त करने के बाद कोई भी व्यक्ति क्षतिपूर्ति जमा करने के लिए राजी नहीं हुआ है। न ही किसी ने खुद को क्षति के लिए जिम्मेदार माना है।
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उल्टे प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए गए हैं। अबुसईदपुरकला संभल के निवासी फुरकान की ओर से दाखिल जवाब में तो क्षति के आंकलन पर ही सवाल खड़े किए गए हैं जबकि पजाया चंदौसी के बबलू का कहना है कि वह तो बवाल के दौरान अधिकारियों के साथ थे पर उन्हें ही फंसा दिया गया।
मियासराय के कोटला निवासी सालिम का कहना था कि वह बवाल के वक्त अपनी रिश्तेदारी से घर लौट रहे थे। रास्ते में किसी ने देखा और उन्हें फंसाया गया है। मिया सराय के जुनैद का कहना है कि सीसीटीवी में उनका नहीं किसी और का फोटो आया है लेकिन उनके नाम नोटिस आ गया है।
अब्बासी टोला निवासी अहसान ने भी खुद को निर्दोष बताया है। रूमान का कहना है कि वह बवाल के वक्त वह अपने घर पर थे। सीसीटीवी कैमरे इसकी गवाही देने को तैयार हैं। सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की जा रही है।
फोटो किसी और का, नाम मेरा लिख दिया
चंदौसी के कुरैशियान निवासी सद्दाम हुसैन का कहना है कि उनका नाम किसी और के फोटो के नीचे लिख दिया। उनका इस बवाल से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें तो इसमें फंसाया गया है। जिसका फोटो है उसका नाम भी सद्दाम है। लेकिन पिता का नाम अलग है और वह जारई गेट का निवासी है। सद्दाम ने इस मामले में जांच एवं निष्पक्ष कार्रवाई के लिए आग्रह किया है। साथ ही निर्दोष होने के नाते बरी किए जाने की मांग की है।
बेटा तो दिल्ली में था फिर बवाल में क्यों फंसा दिया
चंदौसी के जारईगेट निवासी जीशान के पिता अब्दुल शकूर और मां साबरी बेगम गुरुवार को अपर जिलाधिकारी की अदालत में पेश होने पहुंचे। दोनों ने कहा कि उनका बेटा तो बवाल के वक्त दिल्ली में था जिस फैक्ट्री में काम कर रहा था उस फैक्ट्री के सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग इस बात की गवाही दे रहे हैं पर विरोधियों ने उनके बेटे का नाम लिखवा दिया। अगर प्रशासन जांच करेगा तो हकीकत सामने आएगी। जीशान की ओर से दिल्ली के गांधी नगर स्थित फैक्ट्री के मालिक ने भी शपथ पत्र दाखिल किया है।
साक्ष्यों का परीक्षण कर अगली कार्रवाई करेगा प्रशासन
संभल। अपर जिलाधिकारी की अदालत में जवाब पेश करने वाले लोगों ने जो सुबूत खुद के निर्दोष होने के बारे में पेश किए हैं। उनका परीक्षण होगा। जांच की जाएगी। इसके बाद अगला निर्णय लिया जाएगा। दरअसल कई लोगों ने बीमार होने का हवाला दिया है। तो कई लोगों ने बवाल के वक्त खुद के दूसरे स्थान पर होने की बात कही है और अपनी बात की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज देखे जाने का आग्रह किया है। अब प्रशासन इन जवाबों के आधार पर साक्ष्यों का परीक्षण करेगा। इसके बाद जांच होगी। वहीं जो लोग बीमार होने का दावा कर रहे हैं और दस्तावेज संलग्न कर भेजे हैं। लेकिन उसमें बवाल के दिन का कोई सरकारी पर्चा किसी के पास नहीं है। जो पर्चे पेश किए गए हैं वे भी संदेह के घेरे में है। प्रशासन इन पर्चों की भी जांच करेगा। कहीं फर्जी तरीके से तो तैयार नहीं किए गए हैं। यदि ऐसा मामला प्रकाश में आया तो फर्जीवाड़ा करने में शामिल लोगों पर भी कार्रवाई होना तय है।
ग्यारह लोगों के मामले में 13 जनवरी को होगी सुनवाई
संभल। अपर जिलाधिकारी की अदालत में बवाल में फंसे 11 लोगों के लिए सुनवाई की तारीख 13 जनवरी लगी हुई है। सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोप में 70 लोगों के नाम नोटिस जारी किए गए थे। इसमें 59 लोगों के लिए 9 जनवरी की तिथि तय की गई थी। जबकि 11 लोगों के लिए 13 जनवरी की तिथि दी गई थी।
अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत थे, इसलिए नहीं हुई सुनवाई
संभल। अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत थे। इसलिए जवाब तो दाखिल हो गए पर सुनवाई नहीं हो सकी। सभी मामलों में सामान्य रूप से अगली तारीख तय करनी पड़ी। अपर जिलाधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी ने बताया कि अगली तारीख पर सुनवाई होगी।
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संभल में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान 19 व 20 दिसंबर को भारी बवाल हुआ था। इसमें बसों में तोड़फोड़ की गई। रोडवेज की एक बस फूंकी गई। तीन बाइकें जलाईं गईं। पथराव और फायरिंग की घटना में दो युवकों की जान गई थी। संभल कोतवाली और चंदौसी कोतवाली के साथ-साथ नखासा थाने में बलवा करने की रिपोर्ट दर्ज है। तीनों थानों की पुलिस ने संपत्ति की क्षति का आंकलन करते हुए 70 लोगों के खिलाफ अपर जिलाधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी के पास रिपोर्ट भेजी है जिसमें इन लोगों से वसूली कराए जाने की अपेक्षा की गई है।
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अपर जिलाधिकारी ने सभी 70 लोगों के नाम नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में 59 लोगों को जवाब दाखिल करने की तारीख 9 जनवरी दी गई थी। इसी क्रम में गुरुवार को 43 लोगों ने अपने अधिवक्ताओं के जरिए नोटिस का जवाब दाखिल किया है। नोटिस प्राप्त करने के बाद कोई भी व्यक्ति क्षतिपूर्ति जमा करने के लिए राजी नहीं हुआ है। न ही किसी ने खुद को क्षति के लिए जिम्मेदार माना है।
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उल्टे प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए गए हैं। अबुसईदपुरकला संभल के निवासी फुरकान की ओर से दाखिल जवाब में तो क्षति के आंकलन पर ही सवाल खड़े किए गए हैं जबकि पजाया चंदौसी के बबलू का कहना है कि वह तो बवाल के दौरान अधिकारियों के साथ थे पर उन्हें ही फंसा दिया गया।
मियासराय के कोटला निवासी सालिम का कहना था कि वह बवाल के वक्त अपनी रिश्तेदारी से घर लौट रहे थे। रास्ते में किसी ने देखा और उन्हें फंसाया गया है। मिया सराय के जुनैद का कहना है कि सीसीटीवी में उनका नहीं किसी और का फोटो आया है लेकिन उनके नाम नोटिस आ गया है।
अब्बासी टोला निवासी अहसान ने भी खुद को निर्दोष बताया है। रूमान का कहना है कि वह बवाल के वक्त वह अपने घर पर थे। सीसीटीवी कैमरे इसकी गवाही देने को तैयार हैं। सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की जा रही है।
फोटो किसी और का, नाम मेरा लिख दिया
चंदौसी के कुरैशियान निवासी सद्दाम हुसैन का कहना है कि उनका नाम किसी और के फोटो के नीचे लिख दिया। उनका इस बवाल से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें तो इसमें फंसाया गया है। जिसका फोटो है उसका नाम भी सद्दाम है। लेकिन पिता का नाम अलग है और वह जारई गेट का निवासी है। सद्दाम ने इस मामले में जांच एवं निष्पक्ष कार्रवाई के लिए आग्रह किया है। साथ ही निर्दोष होने के नाते बरी किए जाने की मांग की है।
बेटा तो दिल्ली में था फिर बवाल में क्यों फंसा दिया
चंदौसी के जारईगेट निवासी जीशान के पिता अब्दुल शकूर और मां साबरी बेगम गुरुवार को अपर जिलाधिकारी की अदालत में पेश होने पहुंचे। दोनों ने कहा कि उनका बेटा तो बवाल के वक्त दिल्ली में था जिस फैक्ट्री में काम कर रहा था उस फैक्ट्री के सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग इस बात की गवाही दे रहे हैं पर विरोधियों ने उनके बेटे का नाम लिखवा दिया। अगर प्रशासन जांच करेगा तो हकीकत सामने आएगी। जीशान की ओर से दिल्ली के गांधी नगर स्थित फैक्ट्री के मालिक ने भी शपथ पत्र दाखिल किया है।
साक्ष्यों का परीक्षण कर अगली कार्रवाई करेगा प्रशासन
संभल। अपर जिलाधिकारी की अदालत में जवाब पेश करने वाले लोगों ने जो सुबूत खुद के निर्दोष होने के बारे में पेश किए हैं। उनका परीक्षण होगा। जांच की जाएगी। इसके बाद अगला निर्णय लिया जाएगा। दरअसल कई लोगों ने बीमार होने का हवाला दिया है। तो कई लोगों ने बवाल के वक्त खुद के दूसरे स्थान पर होने की बात कही है और अपनी बात की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज देखे जाने का आग्रह किया है। अब प्रशासन इन जवाबों के आधार पर साक्ष्यों का परीक्षण करेगा। इसके बाद जांच होगी। वहीं जो लोग बीमार होने का दावा कर रहे हैं और दस्तावेज संलग्न कर भेजे हैं। लेकिन उसमें बवाल के दिन का कोई सरकारी पर्चा किसी के पास नहीं है। जो पर्चे पेश किए गए हैं वे भी संदेह के घेरे में है। प्रशासन इन पर्चों की भी जांच करेगा। कहीं फर्जी तरीके से तो तैयार नहीं किए गए हैं। यदि ऐसा मामला प्रकाश में आया तो फर्जीवाड़ा करने में शामिल लोगों पर भी कार्रवाई होना तय है।
ग्यारह लोगों के मामले में 13 जनवरी को होगी सुनवाई
संभल। अपर जिलाधिकारी की अदालत में बवाल में फंसे 11 लोगों के लिए सुनवाई की तारीख 13 जनवरी लगी हुई है। सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोप में 70 लोगों के नाम नोटिस जारी किए गए थे। इसमें 59 लोगों के लिए 9 जनवरी की तिथि तय की गई थी। जबकि 11 लोगों के लिए 13 जनवरी की तिथि दी गई थी।
अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत थे, इसलिए नहीं हुई सुनवाई
संभल। अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत थे। इसलिए जवाब तो दाखिल हो गए पर सुनवाई नहीं हो सकी। सभी मामलों में सामान्य रूप से अगली तारीख तय करनी पड़ी। अपर जिलाधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी ने बताया कि अगली तारीख पर सुनवाई होगी।