{"_id":"616b220b5c7a2a7c465d94c7","slug":"angad-advised-rama-to-give-back-sita-sambhal-news-mbd4063896194","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंगद ने राम से बैर त्याग सीता को वापस करने की दी सलाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंगद ने राम से बैर त्याग सीता को वापस करने की दी सलाह
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मढ़न(संभल)। असमोली ब्लॉक क्षेत्र के गांव खासपुर में की जा रही आदर्श रामलीला में अंगद रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों के मंचन से दर्शक भाव-विभोर हो गए। रामलीला देखने के लिए आधी रात तक लोगों की भीड़ जमा रही। खासपुर गांव की आदर्श रामलीला में अंगद रावण संवाद से हुई।
रावण के दरबार में शांति दूत के रूप में पहुंचे अंगद ने राम से बैर त्याग सीता को वापस करने की सलाह दी, लेकिन रावण को सलाह समझ में नहीं आई। तब अंगद ने रावण के दरबार में अपना पैर जमा कर चुनौती देते हुए कहा कि दरबार में यदि कोई मेरा पैर हटा देगा तो श्री राम की सेना बिना युद्ध किए खाली हाथ लौट जाएगी। पूरे दरबारी जोर लगाते हैं। इसके बाद भी कोई वीर अंगद का पैर तक नहीं हिला सका। अंत में स्वयं रावण उठता है, तो अंगद अपना पैर हटा कर कहते हैं कि मेरा पैर क्यों पढ़ते हो जाकर श्री राम के चरण पकड़ो तो कल्याण होगा। अंगद ने लौट कर श्रीराम से सारा वृतांत बताया और युद्ध की दुंदुभी बज उठती है।
रावण की ओर से सेनापति मेघनाथ और लक्ष्मण में घनघोर युद्ध होता है। अंत में मायावी मेघनाथ के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। इससे रामदल में शोक की लहर दौड़ जाती है। लंका के वैध राज सुषेन ने बताया कि लक्ष्मण का उपचार अत्यंत मुश्किल है। अगली सुबह तक द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर पिलाने के बाद ही लक्ष्मण के प्राण बच सकते हैं। यह सुनकर पवन सुत हनुमान बूटी लाने चल देते हैं। आदर्श रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कल्लू सिंह ने भगवान राम सीता लक्ष्मण की पूजा अर्चना की।
विज्ञापन
इस दौरान हरिओम शर्मा, डा. अंकुर ठाकुर, बच्चन सिंह, डा. विजेंद्र पाल सिंह, संजीव ठाकुर, कुलदीप सिंह पवार, बंटी ठाकुर, किशन लाल सिंह, वेदपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
रावण के दरबार में शांति दूत के रूप में पहुंचे अंगद ने राम से बैर त्याग सीता को वापस करने की सलाह दी, लेकिन रावण को सलाह समझ में नहीं आई। तब अंगद ने रावण के दरबार में अपना पैर जमा कर चुनौती देते हुए कहा कि दरबार में यदि कोई मेरा पैर हटा देगा तो श्री राम की सेना बिना युद्ध किए खाली हाथ लौट जाएगी। पूरे दरबारी जोर लगाते हैं। इसके बाद भी कोई वीर अंगद का पैर तक नहीं हिला सका। अंत में स्वयं रावण उठता है, तो अंगद अपना पैर हटा कर कहते हैं कि मेरा पैर क्यों पढ़ते हो जाकर श्री राम के चरण पकड़ो तो कल्याण होगा। अंगद ने लौट कर श्रीराम से सारा वृतांत बताया और युद्ध की दुंदुभी बज उठती है।
विज्ञापन
रावण की ओर से सेनापति मेघनाथ और लक्ष्मण में घनघोर युद्ध होता है। अंत में मायावी मेघनाथ के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। इससे रामदल में शोक की लहर दौड़ जाती है। लंका के वैध राज सुषेन ने बताया कि लक्ष्मण का उपचार अत्यंत मुश्किल है। अगली सुबह तक द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर पिलाने के बाद ही लक्ष्मण के प्राण बच सकते हैं। यह सुनकर पवन सुत हनुमान बूटी लाने चल देते हैं। आदर्श रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कल्लू सिंह ने भगवान राम सीता लक्ष्मण की पूजा अर्चना की।
विज्ञापन
इस दौरान हरिओम शर्मा, डा. अंकुर ठाकुर, बच्चन सिंह, डा. विजेंद्र पाल सिंह, संजीव ठाकुर, कुलदीप सिंह पवार, बंटी ठाकुर, किशन लाल सिंह, वेदपाल सिंह आदि मौजूद रहे।