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मिलावटखोरी मानव जीवन के लिए बड़ा खतरा, बीमारी की तरफ जा रहे लोग
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मिलावट का कहर मानव के जीवन पर बुरा असर डाल रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि दो साल तक लगातार मिलावटी दूध पीने और मसालों का सेवन करने वाले लोगों की आंत, लिवर और किडनी खराब हो सकती हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि जब हम असली दूध को उबालें तो इसका रंग नहीं बदलता है जबकि नकली दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है। असली दूध को हाथों के बीच रगड़ने पर कोई चिकनाहट महसूस नहीं होती। नकली दूध को अगर आप अपने हाथों के बीच रगड़ने पर डिटर्जेंट जैसी चिकनाहट महसूस होगी। मिलावटी सामान बेचने वाले अपने मकसद में कामयाब न हो सकें, इसके लिए आपको खुद समझदार बनना होगा। कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण मिलावट हर जगह देखने को मिलती है। कहीं दूध में पानी की मिलावट होती है, तो कहीं मसालों में रंगों की। दूध, चाय, चीनी, दाल, अनाज, हल्दी, आटा, तेल, घी आदि ऐसी तमाम तरह की घरेलू उपयोग की वस्तुओं में मिलावट की जा रही है। यानी, पूरे पैसे खर्च करके भी हमें शुद्ध खाने का सामान नहीं मिल पाता है।
ऐसे करें दूूध में मिलावटी की जांच
दूध में मिलावट की जांच घर पर ही कर सकते हैं। दस एमएल दूध में इतना ही पानी मिलाकर मिक्स कर लें। यदि झाग पैदा होते हैं तो समझ लें कि दूध में डिटर्जेंट मिला है। दूध में पानी की मिलावट जांचने के लिए चिकनी सतह पर दूध की बूंद गिराएं। अगर पानी मिला है तो वह बिना कोई निशान छोड़े तेजी से आगे बह जाएगा। शुद्ध दूध धीरे-धीरे बहेगा और सफेद धब्बा रह जाएगा। इसी तरह से सिथेंटिक दूध स्वाद में खराब लगता है। अगर इसे उंगलियों के बीच में रगड़ा जाए तो यह साबुन की तरह फिसलता है और यदि गरम किया जाए तो पीला हो जाता है।
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खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाकर नमूने लिए जाते हैं। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है। जांच में यदि ऐसे हानिकारक रसायन पाए जाते हैं जिससे किसी भी व्यक्ति की मौत हो सकती है या फिर स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे मामलों को न्यायालय में चलाया जाता है। इसमें सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान होता है। इसके अलावा नमूने अधोमानक या मिथ्या पाए जाते हैं तो फिर अपर जिलाधिकारी के स्तर से जुर्माने की कार्रवाई की जाती है।
मीरा सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, संभल
मिलावटी खाद्य पदार्थों हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनसे पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। एसिडिटी, ज्वान्डिस आदि का खतरा रहता है। किडनी और लीवर पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है ये खराब भी हो सकते हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों और वृद्ध को होने की संभावना रहती है। ब्लड प्रेशर और हृदय रोगी को ज्यादा दिक्कत होती है।
डॉ. चमन प्रकाश, जनरल फिजिशियन, जिला अस्पताल संभल
सचल खाद्य प्रयोगशाला की वैन आज पहुंचेगी चंदौसी, असमोली और नरौली
मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने और लोगों को जागरूक बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग द्वारा सचल खाद्य प्रयोगशाला वैन संचालित की है। मंगलवार को यह वैन चंदौसी के गांधी मैदान, कस्बा नरौली और असमोली में जाएगी। कोई भी व्यक्ति खाद्य सामग्री की इस वैन में जांच करा सकता है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. पीके त्रिपाठी ने बताया कि यह वैन मंगलवार को नमूने की जांच करेगी। अब शासन की ओर से निर्देश हुआ है कि इस वैन को हर महीने जिले में भेजा जाएगा जिससे खाद्य सामग्री की लोग जांच करा सकें और मिलावटी वस्तुओं के सेवन से बच सकें।
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खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि जब हम असली दूध को उबालें तो इसका रंग नहीं बदलता है जबकि नकली दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है। असली दूध को हाथों के बीच रगड़ने पर कोई चिकनाहट महसूस नहीं होती। नकली दूध को अगर आप अपने हाथों के बीच रगड़ने पर डिटर्जेंट जैसी चिकनाहट महसूस होगी। मिलावटी सामान बेचने वाले अपने मकसद में कामयाब न हो सकें, इसके लिए आपको खुद समझदार बनना होगा। कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण मिलावट हर जगह देखने को मिलती है। कहीं दूध में पानी की मिलावट होती है, तो कहीं मसालों में रंगों की। दूध, चाय, चीनी, दाल, अनाज, हल्दी, आटा, तेल, घी आदि ऐसी तमाम तरह की घरेलू उपयोग की वस्तुओं में मिलावट की जा रही है। यानी, पूरे पैसे खर्च करके भी हमें शुद्ध खाने का सामान नहीं मिल पाता है।
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ऐसे करें दूूध में मिलावटी की जांच
दूध में मिलावट की जांच घर पर ही कर सकते हैं। दस एमएल दूध में इतना ही पानी मिलाकर मिक्स कर लें। यदि झाग पैदा होते हैं तो समझ लें कि दूध में डिटर्जेंट मिला है। दूध में पानी की मिलावट जांचने के लिए चिकनी सतह पर दूध की बूंद गिराएं। अगर पानी मिला है तो वह बिना कोई निशान छोड़े तेजी से आगे बह जाएगा। शुद्ध दूध धीरे-धीरे बहेगा और सफेद धब्बा रह जाएगा। इसी तरह से सिथेंटिक दूध स्वाद में खराब लगता है। अगर इसे उंगलियों के बीच में रगड़ा जाए तो यह साबुन की तरह फिसलता है और यदि गरम किया जाए तो पीला हो जाता है।
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खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाकर नमूने लिए जाते हैं। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है। जांच में यदि ऐसे हानिकारक रसायन पाए जाते हैं जिससे किसी भी व्यक्ति की मौत हो सकती है या फिर स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे मामलों को न्यायालय में चलाया जाता है। इसमें सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान होता है। इसके अलावा नमूने अधोमानक या मिथ्या पाए जाते हैं तो फिर अपर जिलाधिकारी के स्तर से जुर्माने की कार्रवाई की जाती है।
मीरा सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, संभल
मिलावटी खाद्य पदार्थों हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनसे पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। एसिडिटी, ज्वान्डिस आदि का खतरा रहता है। किडनी और लीवर पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है ये खराब भी हो सकते हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों और वृद्ध को होने की संभावना रहती है। ब्लड प्रेशर और हृदय रोगी को ज्यादा दिक्कत होती है।
डॉ. चमन प्रकाश, जनरल फिजिशियन, जिला अस्पताल संभल
सचल खाद्य प्रयोगशाला की वैन आज पहुंचेगी चंदौसी, असमोली और नरौली
मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने और लोगों को जागरूक बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग द्वारा सचल खाद्य प्रयोगशाला वैन संचालित की है। मंगलवार को यह वैन चंदौसी के गांधी मैदान, कस्बा नरौली और असमोली में जाएगी। कोई भी व्यक्ति खाद्य सामग्री की इस वैन में जांच करा सकता है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. पीके त्रिपाठी ने बताया कि यह वैन मंगलवार को नमूने की जांच करेगी। अब शासन की ओर से निर्देश हुआ है कि इस वैन को हर महीने जिले में भेजा जाएगा जिससे खाद्य सामग्री की लोग जांच करा सकें और मिलावटी वस्तुओं के सेवन से बच सकें।