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Sambhal News: दोषमुक्त का फैसला बरकरार, आरोपियों के विरुद्ध अपील खारिज
Fri, 03 Nov 2023 02:03 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Fri, 03 Nov 2023 02:03 AM IST
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चंदौसी। दहेज मांगने के आरोपियों को दोषमुक्त करार देने के फैसले को बरकरार रखते हुए अदालत ने सरकारी की ओर से दोषमुक्त के निर्णय के खिलाफ दाखिल की गई अपील को खारिज कर दिया है।
आरोपियों के अधिवक्ता सुभाष बाबू यादव ने बताया कि पीड़ित पक्ष ने 2004 में एक पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। जिसमें बताया गया कि उसकी शादी विपिन कुमार निवासी गांव चौकुनी थाना सैदनंगली के साथ हुई थी। शादी के समय उसके माता पिता व रिश्तेदारों ने सामर्थ्य के अनुसार शादी में दान दहेज दिया था। शादी के बाद ससुराल वाले बाइक, फ्रीज, रंगीन टीवी और 25 हजार रुपये की मांग करने लगे। मायके वाले मांग को पूरा करने में असमर्थ थे। मांग पूरी न होने के कारण उसको मारपीट कर घर से निकाल दिया गया।
22 अगस्त 2004 को उसके ससुराल वाले उसके मायके आए। जहां उसको जबरदस्ती अपने साथ ले जाने लगे। शोर सुनकर आस पास के लोग आ गए । लोगों ने उसको बचाया। इस घटना की रिपोर्ट जब थाने में नहीं लिखी गई तो न्यायालय में शिकायत पर रिपोर्ट लिखने के आदेश दिए। मुकदमे की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट संभल के न्यायालय में हुई। नौ जुलाई 2010 को न्यायालय ने आरोपी विपिन कुमार सहित उसके परिवार के पांच अन्य लोगों को दोषमुक्त किया गया। जिसमें अपील के दौरान एक आरोपी की मृत्यु हो गई। दोषमुक्त के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा सेशन कोर्ट में अपील की गई। जिसकी सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट/ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रागिनी के न्यायालय में हुई। जहां सरकार द्वारा दायर अपील को निरस्त किया गया। साथ ही न्यायालय अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट संभल द्वारा पारित दोषमुक्त के निर्णय की पुष्टि की गई।
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आरोपियों के अधिवक्ता सुभाष बाबू यादव ने बताया कि पीड़ित पक्ष ने 2004 में एक पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। जिसमें बताया गया कि उसकी शादी विपिन कुमार निवासी गांव चौकुनी थाना सैदनंगली के साथ हुई थी। शादी के समय उसके माता पिता व रिश्तेदारों ने सामर्थ्य के अनुसार शादी में दान दहेज दिया था। शादी के बाद ससुराल वाले बाइक, फ्रीज, रंगीन टीवी और 25 हजार रुपये की मांग करने लगे। मायके वाले मांग को पूरा करने में असमर्थ थे। मांग पूरी न होने के कारण उसको मारपीट कर घर से निकाल दिया गया।
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22 अगस्त 2004 को उसके ससुराल वाले उसके मायके आए। जहां उसको जबरदस्ती अपने साथ ले जाने लगे। शोर सुनकर आस पास के लोग आ गए । लोगों ने उसको बचाया। इस घटना की रिपोर्ट जब थाने में नहीं लिखी गई तो न्यायालय में शिकायत पर रिपोर्ट लिखने के आदेश दिए। मुकदमे की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट संभल के न्यायालय में हुई। नौ जुलाई 2010 को न्यायालय ने आरोपी विपिन कुमार सहित उसके परिवार के पांच अन्य लोगों को दोषमुक्त किया गया। जिसमें अपील के दौरान एक आरोपी की मृत्यु हो गई। दोषमुक्त के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा सेशन कोर्ट में अपील की गई। जिसकी सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट/ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रागिनी के न्यायालय में हुई। जहां सरकार द्वारा दायर अपील को निरस्त किया गया। साथ ही न्यायालय अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट संभल द्वारा पारित दोषमुक्त के निर्णय की पुष्टि की गई।
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