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आखिर इन सड़कों में ऐसा क्या लगा, जो साठ साल बाद भी नहीं टूटती...
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Sun, 05 Nov 2017 05:57 PM IST
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न्यू हाईकोर्ट के सामने यहीं बनेगी एलीवेटेड रोड
- फोटो : amar ujala
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क्योंकि आज करोड़ों की लागत से बनने वाली सड़के निर्माण पूरा होते होते टूटकर बिखरने लगती है। यह सड़के आज भी यादगार हैं। मौका स्थानीय निकाय चुनाव का है, एक बार फिर शहरी मतदाता अपने चेयरमैन का चुनाव करने को तैयार हैं। 29 नवंबर को मतदान करेंगे।
ऐसे मौके पर चौधरी भगवती प्रसाद जैसे पालिकाध्यक्षों की याद आना स्वाभाविक ही है। क्योंकि जब भी कोई बडा बाजार, स्टेशन रोड, परसट्टा बाजार, ब्रह्म बाजार, खुर्जा गेट, कैथल गेट आदि पर कदम रखता है तो छह दशक पहले बनी सड़के उनकी याद को ताजा कर देती हैं, जो आज तक भी टूटी नहीं है। जहां कहीं भी सालभर या छह महीने पहले बनी स़डकों पर कोई गिरता है तो वह चौधरी भगवती प्रसाद की मिसाल देता है। वह 1924 से 1944 तक पालिका के सदस्य रहे तो 1944 में चेयरमैन बने और 1957 तक चेयरमैन रहे। 1952 में उन्होंने घंटाघर बनवाया। इतना ही नहीं, उनका शुद्ध वातावरण और पथप्रकाश की व्यवस्था के साथ साथ पूरे शहर को न्यूज देने व मनोरंजन करने का तरीका भी लोगों को भाता है।
उनके पुत्र सुरेश कुमार चौधरी ने बताया कि बिजली के अभाव में उन्होंने मुख्य सड़कों के किनारे पोल लगाए, उनमें केरोसिन की लालटेन टंगवाई। शाम को रोजाना उन्हें केरोसिन भरकर जलाया जाता था। मुख्य सड़कों के दोनों ओर गमले लगवाए थे, जिनमें खिले फूल वातावरण में सुगंध बिखेरते थे। सबसे अहम बात गांधी पार्क के ऊपर कमरे में एक ऐसा सिस्टम लगवाया, जिससे शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर लाउड स्पीकर लगाए गए। उनसे सुबह व शाम को प्रमुख खबरें सुनाई जाती थी। मनोरंजक गीत व पालिका के प्रमुख आदेश सुनाए जाते थे। चौधरी भगवती प्रसाद का एक जनवरी -1989 को निधन हो गया। लेकिन उनकी यादें आज भी लोगों के दिलों में ताजा है।
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ऐसे मौके पर चौधरी भगवती प्रसाद जैसे पालिकाध्यक्षों की याद आना स्वाभाविक ही है। क्योंकि जब भी कोई बडा बाजार, स्टेशन रोड, परसट्टा बाजार, ब्रह्म बाजार, खुर्जा गेट, कैथल गेट आदि पर कदम रखता है तो छह दशक पहले बनी सड़के उनकी याद को ताजा कर देती हैं, जो आज तक भी टूटी नहीं है। जहां कहीं भी सालभर या छह महीने पहले बनी स़डकों पर कोई गिरता है तो वह चौधरी भगवती प्रसाद की मिसाल देता है। वह 1924 से 1944 तक पालिका के सदस्य रहे तो 1944 में चेयरमैन बने और 1957 तक चेयरमैन रहे। 1952 में उन्होंने घंटाघर बनवाया। इतना ही नहीं, उनका शुद्ध वातावरण और पथप्रकाश की व्यवस्था के साथ साथ पूरे शहर को न्यूज देने व मनोरंजन करने का तरीका भी लोगों को भाता है।
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उनके पुत्र सुरेश कुमार चौधरी ने बताया कि बिजली के अभाव में उन्होंने मुख्य सड़कों के किनारे पोल लगाए, उनमें केरोसिन की लालटेन टंगवाई। शाम को रोजाना उन्हें केरोसिन भरकर जलाया जाता था। मुख्य सड़कों के दोनों ओर गमले लगवाए थे, जिनमें खिले फूल वातावरण में सुगंध बिखेरते थे। सबसे अहम बात गांधी पार्क के ऊपर कमरे में एक ऐसा सिस्टम लगवाया, जिससे शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर लाउड स्पीकर लगाए गए। उनसे सुबह व शाम को प्रमुख खबरें सुनाई जाती थी। मनोरंजक गीत व पालिका के प्रमुख आदेश सुनाए जाते थे। चौधरी भगवती प्रसाद का एक जनवरी -1989 को निधन हो गया। लेकिन उनकी यादें आज भी लोगों के दिलों में ताजा है।
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