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Sambhal News: रामबाग धाम में शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग का किया गया भव्य मंचन
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चंदौसी। श्री रामलीला नाट्य परिषद ने प्रथम शारदीय नवरात्र पर रामबाग धाम में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का मंचन किया। कलाकारों ने पौराणिक प्रसंगों को सजीव रूप में प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मंचन की शुरुआत भगवान शिव के ध्यानमग्न होने से हुई, जिससे संसार में त्राहि-त्राहि मच गई। इसके बाद राजा हिमालय और मैना देवी ने मां जगदंबा की आराधना की। उन्होंने पुत्री रूप में जन्म लेने की प्रार्थना की। मां जगदंबा ने प्रसन्न होकर पार्वती के रूप में अवतार लिया। बड़ी होने पर पार्वती ने भगवान शिव को अपना पति मानकर उनकी आराधना की। राजा हिमालय ने कुल पुरोहित को लग्न पत्रिका लेकर कैलाश भेजा। मार्ग में पुरोहित की भेंट शृंगी और नंदी से हुई, जो दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
भगवान शिव की बरात में देवी-देवताओं के साथ भूत-प्रेत भी शामिल हुए। विभिन्न विचित्र रूपों में सजे बरातीयों ने नाचते-गाते हुए उत्सव की शोभा बढ़ाई। इस दौरान तारकासुर वध से जुड़ी पौराणिक कथा का भी मंचन किया गया। कथा के अनुसार, तारकासुर का वध शिव-पार्वती के पुत्र के हाथों ही संभव था। इसी उद्देश्य से माता पार्वती का अवतरण हुआ था।
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मंचन की शुरुआत भगवान शिव के ध्यानमग्न होने से हुई, जिससे संसार में त्राहि-त्राहि मच गई। इसके बाद राजा हिमालय और मैना देवी ने मां जगदंबा की आराधना की। उन्होंने पुत्री रूप में जन्म लेने की प्रार्थना की। मां जगदंबा ने प्रसन्न होकर पार्वती के रूप में अवतार लिया। बड़ी होने पर पार्वती ने भगवान शिव को अपना पति मानकर उनकी आराधना की। राजा हिमालय ने कुल पुरोहित को लग्न पत्रिका लेकर कैलाश भेजा। मार्ग में पुरोहित की भेंट शृंगी और नंदी से हुई, जो दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
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भगवान शिव की बरात में देवी-देवताओं के साथ भूत-प्रेत भी शामिल हुए। विभिन्न विचित्र रूपों में सजे बरातीयों ने नाचते-गाते हुए उत्सव की शोभा बढ़ाई। इस दौरान तारकासुर वध से जुड़ी पौराणिक कथा का भी मंचन किया गया। कथा के अनुसार, तारकासुर का वध शिव-पार्वती के पुत्र के हाथों ही संभव था। इसी उद्देश्य से माता पार्वती का अवतरण हुआ था।
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