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टुकड़ों में काम नहीं करा सकेंगी ग्राम पंचायतें, तकनीक सहायक भी बना सकेंगे स्टीमेट
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संभल। ग्राम पंचायत में होने वाले विकास कार्यों में बड़े काम को अब टुकड़ों में नहीं कराया जाएगा। पंचायती विभाग की ओर से जारी निर्देश में एक काम को कई टुकड़ों में तोड़ने पर इसे नियमों के विरुद्ध माना जाएगा और लापरवाही बरतने वाली पंचायतों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
इसके लिए प्रत्येक पंचायत को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
ग्राम पंचायत में चतुर्थ एवं 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत विकास कार्य कराए जाते हैं जिसमें छोटे काम से लेकर बड़े काम तक की अलग-अलग सीमाएं निर्धारित की गईं हैं। ग्राम पंचायत पचास हजार की धनराशि का प्राकक्लन स्वयं बनाकर काम करा सकतीं हैं।
जबकि इससे ऊपर ढाई लाख तक के प्राकक्लन को अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण और लघु सिंचाई के अलावा मनरेगा के तकनीक सहायक भी बनाएंगे। दो लाख रुपये की स्वीकृति ग्राम पंचायत स्वयं देंगी जबकि दो लाख से ढाई लाख तक एडीओ पंचायत पंचायत देंगे।
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जिसके अधिक पांच लाख की स्वीकृति जिला पंचायत राज अधिकारी देंगे। जिसके प्राकक्लन को जिला पंचायत के सहायक अभियंता से अनुमोदित कराया जाएगा। जबकि पांच लाख की धनराशि के ऊपर के कार्यों को जिलाधिकारी ही स्वीकृति देंगे।
मनरेगा के तकनीकी सहायक भी बना सकेंगे ग्राम निधि के स्टीमेट
संभल। अब ग्राम निधि के अंतर्गत होने वाले विकास कार्यों का प्राकक्लन मनरेगा के तकनीकी सहायक भी बना सकेंगे। जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्य की स्टीमेट अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण और अवर अभियंता लघु सिंचाई के अलावा मनरेगा के तकनीकी सहायक भी बनाएंगे। जिसके लिए अलग-अलग सीमा निर्धारित की गई हैं। ढाई लाख से ऊपर की धनराशि के एस्टीमेट को अनुमोदित कराया जाएगा।
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इसके लिए प्रत्येक पंचायत को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
ग्राम पंचायत में चतुर्थ एवं 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत विकास कार्य कराए जाते हैं जिसमें छोटे काम से लेकर बड़े काम तक की अलग-अलग सीमाएं निर्धारित की गईं हैं। ग्राम पंचायत पचास हजार की धनराशि का प्राकक्लन स्वयं बनाकर काम करा सकतीं हैं।
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जबकि इससे ऊपर ढाई लाख तक के प्राकक्लन को अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण और लघु सिंचाई के अलावा मनरेगा के तकनीक सहायक भी बनाएंगे। दो लाख रुपये की स्वीकृति ग्राम पंचायत स्वयं देंगी जबकि दो लाख से ढाई लाख तक एडीओ पंचायत पंचायत देंगे।
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जिसके अधिक पांच लाख की स्वीकृति जिला पंचायत राज अधिकारी देंगे। जिसके प्राकक्लन को जिला पंचायत के सहायक अभियंता से अनुमोदित कराया जाएगा। जबकि पांच लाख की धनराशि के ऊपर के कार्यों को जिलाधिकारी ही स्वीकृति देंगे।
मनरेगा के तकनीकी सहायक भी बना सकेंगे ग्राम निधि के स्टीमेट
संभल। अब ग्राम निधि के अंतर्गत होने वाले विकास कार्यों का प्राकक्लन मनरेगा के तकनीकी सहायक भी बना सकेंगे। जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्य की स्टीमेट अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण और अवर अभियंता लघु सिंचाई के अलावा मनरेगा के तकनीकी सहायक भी बनाएंगे। जिसके लिए अलग-अलग सीमा निर्धारित की गई हैं। ढाई लाख से ऊपर की धनराशि के एस्टीमेट को अनुमोदित कराया जाएगा।