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3 करोड़ कर्ज में नोटबंदी का झटका नहीं झेल पाए मैंथा कारोबारी
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Thu, 26 Jan 2017 01:15 AM IST
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कर्ज मेें डूबे मैंथा व्यापारी ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर जान दे दी। सुसाइड नोट में उन्होंने किया है। घटना बुधवार को भोर में करीब ढाई बजे हुई है। सुबह करीब साढ़े पांच बजे जब बेटी को पढ़ाने ट्यूटर आए तो परिजनों को घटना का पता चला।
आवास विकास निवासी मैंथा व्यापारी महेंद्र शर्मा (55) पुत्र आदित्य शर्मा ने कर्ज चुका पाने में नाकाम रहने पर खुद को गोली मारकर अपनी जान दे दी। महेंद्र शर्मा की पत्नी निशा ने बताया कि रात को करीब ढाई बजे आवाज तो हुई लेकिन सभी रजाई में थे, ध्यान नहीं दिया।
बेटी गौरी को ट्यूशन पढ़ाने आए ट्यूटर ने सुबह साढ़े पांच बजे दरवाजा खुलवाया तो घर के बाहर की तरफ बने कमरे में व्यापारी खून से लथपथ बदहवास हालत में पड़े हुए थे। यह देखकर परिजनों में खलबली मच गई।
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महेंद्र शर्मा को इलाज के लिए पहले शहर के ही निजी अस्पताल ले गए लेकिन वहां से रेफर होने के बाद परिजन मुरादाबाद ले जा रहे थे। मैंथा व्यापारी ने रास्ते मेें ही दम तोड़ दिया। सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
संकट से दौर से गुजर रही मैंथा इंडस्ट्री, कारोबारी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौसी।
सिंथेटिक मैंथा की मार तो मैंथा कारोबार पहले से ही झेल रहा था, ऊपर से नोटबंदी ने महीनेभर कारोबार की कमर तोड़ दी। व्यापारियों ने शार्टकट अपनाने को वायदा कारोबार का रुख किया। जिससे करोड़ों के घाटे ने जहां पूरी इंडस्ट्री को झकझोरा तो व्यापारी अपना कारोबार बचाने की टेंशन में हैं। आलम यह है कि कारोबारी ना तो किसानों का कर्ज निपटा पा रहे हैं और ना ही अपना कारोेबार जारी रख पा रहे हैं।
चंदौसी में मैंथा कारोबार का टर्नओवर करीब डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिदिन का है। इससे करीब तीन सौ से अधिक कारोबारी व्यापारी जुड़े हैं, साठ से अधिक मैंथा उत्पादन इकाइयां भी संचालित हो रही है। पूरी दुनियां में वास्तविक मैंथा निर्यातक देश सिर्फ भारत ही है, लेकिन जर्मनी आदि से सिंथेटिक मैंथा के आने से देश से करीब बीस फीसदी मांग घटी है, जिसका सीधा असर चंदौसी मैंथा मंडी पर भी पड़ा है। आठ नवंबर से नोटबंदी का इफेक्ट यह हुआ कि कारोबार लगभग बंद हो गया लेकिन दिसंबर से किसी तरह किसानों ने भी भुगतान चेक से लेना शुरू किया और ई-बैकिंग प्रक्रिया आदि कैशलेस सिस्टम भी प्रभाव में आया। जिससे अब बाजार रफ्तार पकड़ गया लेकिन इस दौरान अधिकांश व्यापारियों, विशेषकर आढ़तियों, जो किसानों से मैंथा तेल खरीदकर मैंथा फैक्ट्रियों को सप्लाई करते थे, उन पर अधिक प्रभाव पड़ा। वह बड़े कर्जदार हो गए।
आपसी प्रतिस्पर्धा इतनी है कि जो कारोबार हो रहा है, उसका मुनाफा काफी कम हो गया है। कुछ ने शार्टकट अपनाया तो वायदा कारोबार का सहारा ले लिया। जहां उन्हें करोड़ों का नुकसान उठाना पडा। जिसका सीधा असर कारोबार व व्यापारियों की मनोस्थिति पर पड़ा है।
मैंथा कारोबारियों की जुबानी
मैंथा कारोबार में हो रहे लगातार घाटे के लिए आपसी प्रतिस्पर्धा व वायदा कारोबार ही जिम्मेदार है, प्रतिस्पर्धा से मुनाफा कम हो गया है, वायदा कारोबार ने बड़े बड़ों को कंगाल बना दिया है। हमें इस इंडस्ड्री को इस स्थिति से बचाने को मिलकर प्रयास करने होंगे। -अंकुर अग्रवाल, मैंथा कारोबारी, चंदौसी
मैंथा इंडस्ट्री इन दिनों संकट के दौर से गुजर रही है, कुछ कारोबारी बातें ऐसी होती है, जिन्हेें सार्वजनिक किया जाना तो उचित नहीं होगा लेकिन वाकई मैंथा कारोबारी, व्यापारी परेशानी में हैं, कारोबार बचाने के लाले पड़ रहे हैं। -अतुल अग्रवाल, मैंथा कारोबारी चंदौसी
-मैंथा किसान की नगदी फसल है, तेल भी किसान घर में सुरक्षित रखता है, जब धन की जरूरत होती है तो तुरंत बेच लेता है, लेकिन अधिकांश घरों में रखने की जगह नहीं होती है तो कारोबारियों के पास तेल जमा कर देते हैं। लेकिन इस बार नोटबंदी के कारण किसानों को भी नगदी नहीं मिल सकी, जिससे रबी की बुवाई प्रभावित हुई। -बृजेंद्र सिंह यादव प्रदेश सचिव भाकियू
-मैंथा की खेती भी अब घाटे का सौदा बनती जा रही है। लागत भी निकलना दुश्वार हो रहा है, किसानों को इस बार तेल की कीमत बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन नोटबंदी की भेंट चढ़ गई।
-नवाब सिंह यादव, मैंथा किसान, चंदौसी
आवास विकास निवासी मैंथा व्यापारी महेंद्र शर्मा (55) पुत्र आदित्य शर्मा ने कर्ज चुका पाने में नाकाम रहने पर खुद को गोली मारकर अपनी जान दे दी। महेंद्र शर्मा की पत्नी निशा ने बताया कि रात को करीब ढाई बजे आवाज तो हुई लेकिन सभी रजाई में थे, ध्यान नहीं दिया।
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बेटी गौरी को ट्यूशन पढ़ाने आए ट्यूटर ने सुबह साढ़े पांच बजे दरवाजा खुलवाया तो घर के बाहर की तरफ बने कमरे में व्यापारी खून से लथपथ बदहवास हालत में पड़े हुए थे। यह देखकर परिजनों में खलबली मच गई।
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महेंद्र शर्मा को इलाज के लिए पहले शहर के ही निजी अस्पताल ले गए लेकिन वहां से रेफर होने के बाद परिजन मुरादाबाद ले जा रहे थे। मैंथा व्यापारी ने रास्ते मेें ही दम तोड़ दिया। सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
संकट से दौर से गुजर रही मैंथा इंडस्ट्री, कारोबारी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौसी।
सिंथेटिक मैंथा की मार तो मैंथा कारोबार पहले से ही झेल रहा था, ऊपर से नोटबंदी ने महीनेभर कारोबार की कमर तोड़ दी। व्यापारियों ने शार्टकट अपनाने को वायदा कारोबार का रुख किया। जिससे करोड़ों के घाटे ने जहां पूरी इंडस्ट्री को झकझोरा तो व्यापारी अपना कारोबार बचाने की टेंशन में हैं। आलम यह है कि कारोबारी ना तो किसानों का कर्ज निपटा पा रहे हैं और ना ही अपना कारोेबार जारी रख पा रहे हैं।
चंदौसी में मैंथा कारोबार का टर्नओवर करीब डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिदिन का है। इससे करीब तीन सौ से अधिक कारोबारी व्यापारी जुड़े हैं, साठ से अधिक मैंथा उत्पादन इकाइयां भी संचालित हो रही है। पूरी दुनियां में वास्तविक मैंथा निर्यातक देश सिर्फ भारत ही है, लेकिन जर्मनी आदि से सिंथेटिक मैंथा के आने से देश से करीब बीस फीसदी मांग घटी है, जिसका सीधा असर चंदौसी मैंथा मंडी पर भी पड़ा है। आठ नवंबर से नोटबंदी का इफेक्ट यह हुआ कि कारोबार लगभग बंद हो गया लेकिन दिसंबर से किसी तरह किसानों ने भी भुगतान चेक से लेना शुरू किया और ई-बैकिंग प्रक्रिया आदि कैशलेस सिस्टम भी प्रभाव में आया। जिससे अब बाजार रफ्तार पकड़ गया लेकिन इस दौरान अधिकांश व्यापारियों, विशेषकर आढ़तियों, जो किसानों से मैंथा तेल खरीदकर मैंथा फैक्ट्रियों को सप्लाई करते थे, उन पर अधिक प्रभाव पड़ा। वह बड़े कर्जदार हो गए।
आपसी प्रतिस्पर्धा इतनी है कि जो कारोबार हो रहा है, उसका मुनाफा काफी कम हो गया है। कुछ ने शार्टकट अपनाया तो वायदा कारोबार का सहारा ले लिया। जहां उन्हें करोड़ों का नुकसान उठाना पडा। जिसका सीधा असर कारोबार व व्यापारियों की मनोस्थिति पर पड़ा है।
मैंथा कारोबारियों की जुबानी
मैंथा कारोबार में हो रहे लगातार घाटे के लिए आपसी प्रतिस्पर्धा व वायदा कारोबार ही जिम्मेदार है, प्रतिस्पर्धा से मुनाफा कम हो गया है, वायदा कारोबार ने बड़े बड़ों को कंगाल बना दिया है। हमें इस इंडस्ड्री को इस स्थिति से बचाने को मिलकर प्रयास करने होंगे। -अंकुर अग्रवाल, मैंथा कारोबारी, चंदौसी
मैंथा इंडस्ट्री इन दिनों संकट के दौर से गुजर रही है, कुछ कारोबारी बातें ऐसी होती है, जिन्हेें सार्वजनिक किया जाना तो उचित नहीं होगा लेकिन वाकई मैंथा कारोबारी, व्यापारी परेशानी में हैं, कारोबार बचाने के लाले पड़ रहे हैं। -अतुल अग्रवाल, मैंथा कारोबारी चंदौसी
-मैंथा किसान की नगदी फसल है, तेल भी किसान घर में सुरक्षित रखता है, जब धन की जरूरत होती है तो तुरंत बेच लेता है, लेकिन अधिकांश घरों में रखने की जगह नहीं होती है तो कारोबारियों के पास तेल जमा कर देते हैं। लेकिन इस बार नोटबंदी के कारण किसानों को भी नगदी नहीं मिल सकी, जिससे रबी की बुवाई प्रभावित हुई। -बृजेंद्र सिंह यादव प्रदेश सचिव भाकियू
-मैंथा की खेती भी अब घाटे का सौदा बनती जा रही है। लागत भी निकलना दुश्वार हो रहा है, किसानों को इस बार तेल की कीमत बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन नोटबंदी की भेंट चढ़ गई।
-नवाब सिंह यादव, मैंथा किसान, चंदौसी