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सरकारी दावे फेल: अन्नदाता परेशान, नहीं मिल रहा 230 करोड़ का भुगतान
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संभल। अन्नदाता को गन्ने की बिक्री का भुगतान 14 दिन और धान की बिक्री का भुगतान 72 घंटे की अवधि में किए जाने का सरकारी दावा फेल हो गया है। गन्ना मूल्य के 170 करोड़ रुपये और धान की बिक्री के 60 करोड़ रुपये नहीं मिल सके हैं। दोनों को जोड़ दें तो यह धनराशि 230 करोड़ रुपये हो जाती है। समय पर भुगतान नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। एक ओर किसानों को बैंक ब्याज देना पड़ रहा है दूसरी ओर सरकारी क्रय एजेंसियां न ब्याज दे रहीं और न ही भुगतान कर रही हैं।
संभल जिले के गन्ना किसानों ने चालू सत्र में अब तक जिले की तीन चीनी मिलों को 250.62 करोड़ रुपये का गन्ना बेचा है। इसमें 170 करोड़ रुपये ऐसा है जिसकी अवधि 14 दिन पार कर चुकी है। गन्ना क्रय अधिनियम में क्रय करने की तिथि से 14 दिन की अवधि में भुगतान का नियम है। इसका पालन सभी चीनी मिलों को करना है लेकिन कोई भी चीनी मिल पालन नहीं कर रही है। अगर चीनी मिल भुगतान में 14 दिन की अवधि को पार करती है तो बकाया पर ब्याज देना होता है लेकिन जिले के चीनी मिल न तो ब्याज दे रहे हैं और न ही भुगतान कर रहे हैं। इसी तरह से धान खरीदने के 72 घंटे में भुगतान का दावा सरकार ने किया लेकिन सरकारी तंत्र 72 घंटे में भुगतान सुनिश्चित नहीं कर सका। ऐसे में सवाल यह है कि भुगतान के लिए सिर्फ दावे करने से किसान की भलाई कैसे होगी।
भुगतान दिलाने के लिए लगातार कर रहे हैं पैरवी
जिला गन्ना अधिकारी कुलदीप सिंह का दावा है कि वे भुगतान दिलाने के लिए लगातार पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि असमोली, रजपुरा और मझावली स्थित तीन चीनी मिलों पर इस पेराई सत्र के 170 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसमें वीनस शुगर मिल मझावली पर पिछले सत्र के 7 करोड़ रुपये बकाया हैं।
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संभल जिले के गन्ना किसानों ने चालू सत्र में अब तक जिले की तीन चीनी मिलों को 250.62 करोड़ रुपये का गन्ना बेचा है। इसमें 170 करोड़ रुपये ऐसा है जिसकी अवधि 14 दिन पार कर चुकी है। गन्ना क्रय अधिनियम में क्रय करने की तिथि से 14 दिन की अवधि में भुगतान का नियम है। इसका पालन सभी चीनी मिलों को करना है लेकिन कोई भी चीनी मिल पालन नहीं कर रही है। अगर चीनी मिल भुगतान में 14 दिन की अवधि को पार करती है तो बकाया पर ब्याज देना होता है लेकिन जिले के चीनी मिल न तो ब्याज दे रहे हैं और न ही भुगतान कर रहे हैं। इसी तरह से धान खरीदने के 72 घंटे में भुगतान का दावा सरकार ने किया लेकिन सरकारी तंत्र 72 घंटे में भुगतान सुनिश्चित नहीं कर सका। ऐसे में सवाल यह है कि भुगतान के लिए सिर्फ दावे करने से किसान की भलाई कैसे होगी।
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भुगतान दिलाने के लिए लगातार कर रहे हैं पैरवी
जिला गन्ना अधिकारी कुलदीप सिंह का दावा है कि वे भुगतान दिलाने के लिए लगातार पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि असमोली, रजपुरा और मझावली स्थित तीन चीनी मिलों पर इस पेराई सत्र के 170 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसमें वीनस शुगर मिल मझावली पर पिछले सत्र के 7 करोड़ रुपये बकाया हैं।
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