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खूंखार कुत्तों के हमले में तीन वर्ष में 19 हिरन मारे गए
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संभल। खूंखार कुत्तों के हमले में तीन वर्ष में 19 हिरन मारे गए। वर्ष 2021 के 15 दिन में पांच और वर्ष 2020 में पूरे वर्ष में पांच तथा 2019 में एक वर्ष में 9 हिरनों की जान गई। लेकिन वन विभाग ने इनके बचाव के लिए कोई कदम अब तक नहीं उठाया। अब सिर्फ कारण तलाशा जा रहा है पर अभी तक इनकी जान बचाने के लिए कोई कार्ययोजना सामने नहीं आई है।
जब इस विषय में डीएफओ कन्हैया पटेल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जहां हिरन मारे गए हैं उस क्षेत्र का उन्होंने दौरा किया है। क्षेत्र के लोगों को जागरूक करेंगे ताकि हिरनों पर हमले की वारदातें रोकी जा सकें। क्षेत्रीय वन अधिकारी ने बताया कि हिरन से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के विषय में पंपलेट बांटें जाएंगे।
वर्ष 2019 में खूंखार कुत्तों के हमले में 9 काले हिरन की मौत हुई
गांव रुदायन में 1 फरवरी, गौहत में 6 मई, ठाठी में 8 जून व 9 जुलाई में खूंखार कुत्तों के हमले में हिरन की मौत हुई। किरारी में 17 जुलाई, कादलपुर कुकैटा में 7 अगस्त, गांव सैमला में 7 अगस्त, गांव नारंगपुर में 18 सितंबर, गौहत में 9 अक्टूबर को खूंखार कुत्तों के हमले में हिरन मारा गया।
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वर्ष 2020 में खूंखार कुत्तों के हमले में 5 हिरन की मौत हुई
गांव भवन में 22 जून, गांव किसौली में 4 अक्टूबर को, गांव बल्लमपुर में 26 नवंबर, अतरासी में 12 दिसंबर और 27 अगस्त को खूंखार कुत्तों के हमले में काले हिरन की मौत।
वर्ष 2021 के 16 दिन में मारे गए पांच हिरन
पवांसा ब्लॉक क्षेत्र में 7 जनवरी से 12 जनवरी तक चार काले हिरन की खूंखार कुत्तों के हमले में मारे गए। पांचवां हिरन का बच्चा था जो काला नहीं था। उसकी मौत 15 जनवरी को खूंखार कुत्तों के हमले में हुई। अब वन विभाग के अधिकारी चेत गए हैं।
अगर कुत्ते मृत जानवर खाते हैं तो उनके भोजन की आदत बदलती है। कुत्ते खूंखार हो जाते हैं और हिरन और छोटे बच्चों पर भी हमला कर सकते हैं। इसलिए मैंने किसानों से कहा है कि किसान अपने मृत जानवरों को खेतों में न फेंके। जमीन में दफना दें। हिरन बचाने के लिए लोगों को पंपलेट दिए जाएंगे। गांव गांव में हिरन के संरक्षण के लिए समिति बनाने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं।
कन्हैया पटेल, डीएफओ, संभल
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जब इस विषय में डीएफओ कन्हैया पटेल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जहां हिरन मारे गए हैं उस क्षेत्र का उन्होंने दौरा किया है। क्षेत्र के लोगों को जागरूक करेंगे ताकि हिरनों पर हमले की वारदातें रोकी जा सकें। क्षेत्रीय वन अधिकारी ने बताया कि हिरन से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के विषय में पंपलेट बांटें जाएंगे।
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वर्ष 2019 में खूंखार कुत्तों के हमले में 9 काले हिरन की मौत हुई
गांव रुदायन में 1 फरवरी, गौहत में 6 मई, ठाठी में 8 जून व 9 जुलाई में खूंखार कुत्तों के हमले में हिरन की मौत हुई। किरारी में 17 जुलाई, कादलपुर कुकैटा में 7 अगस्त, गांव सैमला में 7 अगस्त, गांव नारंगपुर में 18 सितंबर, गौहत में 9 अक्टूबर को खूंखार कुत्तों के हमले में हिरन मारा गया।
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वर्ष 2020 में खूंखार कुत्तों के हमले में 5 हिरन की मौत हुई
गांव भवन में 22 जून, गांव किसौली में 4 अक्टूबर को, गांव बल्लमपुर में 26 नवंबर, अतरासी में 12 दिसंबर और 27 अगस्त को खूंखार कुत्तों के हमले में काले हिरन की मौत।
वर्ष 2021 के 16 दिन में मारे गए पांच हिरन
पवांसा ब्लॉक क्षेत्र में 7 जनवरी से 12 जनवरी तक चार काले हिरन की खूंखार कुत्तों के हमले में मारे गए। पांचवां हिरन का बच्चा था जो काला नहीं था। उसकी मौत 15 जनवरी को खूंखार कुत्तों के हमले में हुई। अब वन विभाग के अधिकारी चेत गए हैं।
अगर कुत्ते मृत जानवर खाते हैं तो उनके भोजन की आदत बदलती है। कुत्ते खूंखार हो जाते हैं और हिरन और छोटे बच्चों पर भी हमला कर सकते हैं। इसलिए मैंने किसानों से कहा है कि किसान अपने मृत जानवरों को खेतों में न फेंके। जमीन में दफना दें। हिरन बचाने के लिए लोगों को पंपलेट दिए जाएंगे। गांव गांव में हिरन के संरक्षण के लिए समिति बनाने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं।
कन्हैया पटेल, डीएफओ, संभल