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पुनर्जीवन की राह देख रही विलुप्त होती अरिल नदी
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कुढ़फतेहगढ़। जनपद संभल में सोत नदी व महावा नदी की तरह ही कभी अरिल नदी का भी अपना एक मुकाम था लेकिन अब यह नदी भी विलुप्त हो चुकी है। सोत व महावा नदी पर तो खुदाई का कार्य शुरू हो गया लेकिन कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र से अरिल नदी अभी भी अपनी पुनर्जीवन की आस लगाए हुए हैं। क्योंकि इस नदी के अब सिर्फ अवशेष ही शेष बचे हैं। नदी अब नाला बन चुकी है।
जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह की पहल पर जनपद संभल में सूख चुकी नदियों की खुदाई करके उन को पुनर्जीवन देने की कवायद शुरु की गई है। इनकी खुदाई का काम जोरों से चल रहा है। नदी मुरादाबाद जिले के बिलारी क्षेत्र से होकर संभल जिला की तहसील चंदौसी के थाना क्षेत्र कुढफतेहगढ के गांव कोकाबास, नगला पुरवा, बेहटा खास, पल्था मिठनपुर, लक्ष्छमपुर, लखनैटा, चैचुरी, फतेहपुर डाल, अटवां आदि ग्रामों के नजदीक होकर निकलते हुए बदायूं जिले के आसफपुर होते हुए रामपुर बरेली जनपद की सीमा में गुजरते हुए बरेली में रामगंगा में जाकर मिल जाती है।
रामगंगा में मिलने वाली 125 किमी लंबी अरिल नदी अब लगभग विलुप्त हो चुकी है। जगह -जगह नदी किनारे खेत मालिकों ने अथवा दबंगो ने नदी की भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। 30 से 50 मीटर की चौड़ाई में बहने वाली अरिल नदी आज नाली बन कर रह गई है। 2017 में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने अरिल नदी को पुनर्जीवन देने के लिए 30 करोड रुपये देने का ऐलान किया था लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने ना तो धनराशि जारी की और ना ही खुदाई का कार्य शुरू कराया गया। क्षेत्र के कुछ बुजुर्ग लोग बताते हैं कि पुराने समय में अरिल नदी में बहुत पानी बहता था।
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बरसात के दिनों में अरिल नदी को पार करके चंदौसी आने जाने वालों को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। कोकाबास के नजदीक अरिल नदी पर जब पुल बना हुआ नहीं था। क्षेत्रवासियों को बहुत ही असुविधा होती थी।
नदी किनारे स्थित खेतों में बरसात के दिनों में नदी का पानी भरा रहता था, जिससे फसलें जलमग्न हो जाती थी। अब नदी के किनारे स्थित खेत मालिकों ने अथवा दबंग लोगों ने नदी को पटान करके जमीन पर अवैध तरीके स खेती कर रहे हैं। दो दशक पहले किसान नदी किनारे अपना पंपसेट लगाकर अपने खेतों की सिंचाई नदी के पानी से ही करते थे, अब वही अरिल नदी क्षेत्र में नाली बनकर रह गई है।
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जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह की पहल पर जनपद संभल में सूख चुकी नदियों की खुदाई करके उन को पुनर्जीवन देने की कवायद शुरु की गई है। इनकी खुदाई का काम जोरों से चल रहा है। नदी मुरादाबाद जिले के बिलारी क्षेत्र से होकर संभल जिला की तहसील चंदौसी के थाना क्षेत्र कुढफतेहगढ के गांव कोकाबास, नगला पुरवा, बेहटा खास, पल्था मिठनपुर, लक्ष्छमपुर, लखनैटा, चैचुरी, फतेहपुर डाल, अटवां आदि ग्रामों के नजदीक होकर निकलते हुए बदायूं जिले के आसफपुर होते हुए रामपुर बरेली जनपद की सीमा में गुजरते हुए बरेली में रामगंगा में जाकर मिल जाती है।
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रामगंगा में मिलने वाली 125 किमी लंबी अरिल नदी अब लगभग विलुप्त हो चुकी है। जगह -जगह नदी किनारे खेत मालिकों ने अथवा दबंगो ने नदी की भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। 30 से 50 मीटर की चौड़ाई में बहने वाली अरिल नदी आज नाली बन कर रह गई है। 2017 में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने अरिल नदी को पुनर्जीवन देने के लिए 30 करोड रुपये देने का ऐलान किया था लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने ना तो धनराशि जारी की और ना ही खुदाई का कार्य शुरू कराया गया। क्षेत्र के कुछ बुजुर्ग लोग बताते हैं कि पुराने समय में अरिल नदी में बहुत पानी बहता था।
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बरसात के दिनों में अरिल नदी को पार करके चंदौसी आने जाने वालों को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। कोकाबास के नजदीक अरिल नदी पर जब पुल बना हुआ नहीं था। क्षेत्रवासियों को बहुत ही असुविधा होती थी।
नदी किनारे स्थित खेतों में बरसात के दिनों में नदी का पानी भरा रहता था, जिससे फसलें जलमग्न हो जाती थी। अब नदी के किनारे स्थित खेत मालिकों ने अथवा दबंग लोगों ने नदी को पटान करके जमीन पर अवैध तरीके स खेती कर रहे हैं। दो दशक पहले किसान नदी किनारे अपना पंपसेट लगाकर अपने खेतों की सिंचाई नदी के पानी से ही करते थे, अब वही अरिल नदी क्षेत्र में नाली बनकर रह गई है।