{"_id":"593705e94f1c1b5b5b8b458a","slug":"149677823211u-sambhal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बढ़ती गर्मी में सूख गए जलाशय- संभल में पानी के लिए दौड़ रहे ब्लैक बक की डिहाइड्रेशन से मौत-ᄋᄂ₩ᅦU¢₩","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बढ़ती गर्मी में सूख गए जलाशय- संभल में पानी के लिए दौड़ रहे ब्लैक बक की डिहाइड्रेशन से मौत-ᄋᄂ₩ᅦU¢₩
Updated Wed, 07 Jun 2017 01:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अन्य केंद्र ----
हेडिंग
भीषण गर्मी में बिन पानी प्यास से मर गया ब्लैक बक
सब हेड
पानी के दौड़ रहे ब्लैक बक पर खूंखार कुत्तों ने किया हमला, निबोरा गांव में जख्मी मिला
प्वाइंटर
जख्मी ब्लैक बक ने उपचार शुरू होेने से पहले ही दम तोड़ दिया, पोस्टमार्टम कराया गया
अमर उजाला ब्यूरो
संभल। तापमान बढ़ रहा है। बढ़ती गर्मी के चलते जलाशय सूख गए हैं। जंगल में पानी नसीब न होने से संभल जिले के निबौरा में ब्लैक बक की प्यास से मौत हो गई। मौत से पहले जब वह पानी के लिए भटकने के बाद जंगल से गांव की और दौड़ा तो खूंखार कुत्तों ने हमला कर दिया। जख्मी ब्लैक बक को देख कर गांव वाले एकत्र हो गए। वन विभाग को खबर दी। वन विभाग की टीम उसे अस्पताल ले जा रही पर रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया है। इसमें डिहाइड्रेशन से मौत की पुष्टि हो गई है।
संभल जिले के भूड़ इलाके में ब्लैक बक के झुंड पाए जाते हैं। जब से गर्मी बढ़ी है तब से जंगलों में जलाशय सूख गए हैं। गड्ढों और नालों तक में पानी नहीं मिल रहा है। फसलें कट जाने की वजह से खेत खाली हैं और नलकूप भी नहीं चल रहे हैं। इसके चलते जंगली जीव पानी के लिए तरस रहे हैं। सबसे बड़ा संकट विलुप्त प्राय हो चुके ब्लैक बक के लिए है।
संभल जिले के पवांसा क्षेत्र में स्थित निबोरा गांव के करीब मंगलवार को सुबह छह बजे गांव के लोगोें ने एक ब्लैक बक को जख्मी अवस्था में तड़पते हुए देखा। तत्काल 100 डायल पर खबर दी। पुलिस पहुंची तो वन विभाग की टीम को भी बुलाया गया। वनकर्मी पहुंचे और ब्लैक बक को ट्रैक्टर में लादकर पवांसा के पशु अस्पताल में ले जा रहे थे लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई। वन विभाग के डिप्टी रेंजर डीसी पांडेय ने बताया कि जंगल में पानी का संकट है। जलाशय सूख गए हैं। भूड़ के रेतीले इलाके में दूर-दूर तक पानी नजर नहीं आ रहा है। इसका खामियाजा ब्लैक बक को भुगतना पड़ा।
विज्ञापन
बॉक्स
15-16 घंटे से प्यासा था ब्लैक बक
संभल। पोस्टमार्टम करने वाले पवांसा के पशु चिकित्साधिकारी डा. आलोक सहरावत ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि 15-16 घंटे से ब्लैक बक प्यासा था। उसकी आंतें सूखी हुईं थीं। फे फड़े सिकुड़ चुके थे। पानी न मिलने से उसे डिहाइड्रेशन हो गया। इसका सबसे बड़ा लक्षण यह था कि उसकी आंखें धंस गईं थीं। जख्म देखकर ऐसा लगता है जब जंगल में वह पानी के लिए दौड़ा होगा तभी खूंखार कुत्तों ने उस पर हमला किया होगा। इसमें उसके पैर में जख्म हुए हैं। एक हड्डी भी टूटी मिली है। यह भी माना जा रहा है कि जब ब्लैक को बक को जंगल में पानी नहीं मिला तब वह आबादी की ओर भागा। लेकिन गांव निबोरा में आते आते निढाल हो गया और गिर गया।
विज्ञापन
हेडिंग
भीषण गर्मी में बिन पानी प्यास से मर गया ब्लैक बक
सब हेड
पानी के दौड़ रहे ब्लैक बक पर खूंखार कुत्तों ने किया हमला, निबोरा गांव में जख्मी मिला
प्वाइंटर
जख्मी ब्लैक बक ने उपचार शुरू होेने से पहले ही दम तोड़ दिया, पोस्टमार्टम कराया गया
अमर उजाला ब्यूरो
संभल। तापमान बढ़ रहा है। बढ़ती गर्मी के चलते जलाशय सूख गए हैं। जंगल में पानी नसीब न होने से संभल जिले के निबौरा में ब्लैक बक की प्यास से मौत हो गई। मौत से पहले जब वह पानी के लिए भटकने के बाद जंगल से गांव की और दौड़ा तो खूंखार कुत्तों ने हमला कर दिया। जख्मी ब्लैक बक को देख कर गांव वाले एकत्र हो गए। वन विभाग को खबर दी। वन विभाग की टीम उसे अस्पताल ले जा रही पर रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया है। इसमें डिहाइड्रेशन से मौत की पुष्टि हो गई है।
संभल जिले के भूड़ इलाके में ब्लैक बक के झुंड पाए जाते हैं। जब से गर्मी बढ़ी है तब से जंगलों में जलाशय सूख गए हैं। गड्ढों और नालों तक में पानी नहीं मिल रहा है। फसलें कट जाने की वजह से खेत खाली हैं और नलकूप भी नहीं चल रहे हैं। इसके चलते जंगली जीव पानी के लिए तरस रहे हैं। सबसे बड़ा संकट विलुप्त प्राय हो चुके ब्लैक बक के लिए है।
विज्ञापन
संभल जिले के पवांसा क्षेत्र में स्थित निबोरा गांव के करीब मंगलवार को सुबह छह बजे गांव के लोगोें ने एक ब्लैक बक को जख्मी अवस्था में तड़पते हुए देखा। तत्काल 100 डायल पर खबर दी। पुलिस पहुंची तो वन विभाग की टीम को भी बुलाया गया। वनकर्मी पहुंचे और ब्लैक बक को ट्रैक्टर में लादकर पवांसा के पशु अस्पताल में ले जा रहे थे लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई। वन विभाग के डिप्टी रेंजर डीसी पांडेय ने बताया कि जंगल में पानी का संकट है। जलाशय सूख गए हैं। भूड़ के रेतीले इलाके में दूर-दूर तक पानी नजर नहीं आ रहा है। इसका खामियाजा ब्लैक बक को भुगतना पड़ा।
विज्ञापन
बॉक्स
15-16 घंटे से प्यासा था ब्लैक बक
संभल। पोस्टमार्टम करने वाले पवांसा के पशु चिकित्साधिकारी डा. आलोक सहरावत ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि 15-16 घंटे से ब्लैक बक प्यासा था। उसकी आंतें सूखी हुईं थीं। फे फड़े सिकुड़ चुके थे। पानी न मिलने से उसे डिहाइड्रेशन हो गया। इसका सबसे बड़ा लक्षण यह था कि उसकी आंखें धंस गईं थीं। जख्म देखकर ऐसा लगता है जब जंगल में वह पानी के लिए दौड़ा होगा तभी खूंखार कुत्तों ने उस पर हमला किया होगा। इसमें उसके पैर में जख्म हुए हैं। एक हड्डी भी टूटी मिली है। यह भी माना जा रहा है कि जब ब्लैक को बक को जंगल में पानी नहीं मिला तब वह आबादी की ओर भागा। लेकिन गांव निबोरा में आते आते निढाल हो गया और गिर गया।