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गो आश्रय स्थलों का निरीक्षण करने पहुंचे सीडीओ
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बहजोई। जिले में गोआश्रय स्थलों को लेकर अफसर गंभीर हैं। इसी के तहत सीडीओ ने बहजोई ब्लाक में आने वाले तीन गोआश्रय स्थलों का निरीक्षण किया। इसमें सीडीओ ने गो समेत गोवंशीय पशुओं के रख-रखाव समेत खान-पान की व्यवस्था का जायजा लिया। खामियां मिलने पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों को निर्देशित किया।
गुरुवार को सुबह करीब 11 बजे मुख्य विकास अधिकारी उमेश कुमार त्यागी ने परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण रमेश चंद्र के साथ विकासखंड बहजोई के गांव वहांपुर पट्टी पहुंचकर गोआश्रय स्थल का निरीक्षण किया।
सीडीओ ने बताया कि मौके पर सामने आया कि जिला पंचायत की ओर से बने गोआश्रय स्थल में छोटे-बड़े 34 गोवंशीय पशु थे। टीन शेड पड़ा हुआ था। चारों ओर लोहे के तार की फेंसिंग बनी हुई थी। पशुओं को चारे के तौर पर भूसा खिलाया जा रहा था। इसको लेकर जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी अरूण कुमार भारती व अवर अभियंता को निर्देशित किया गया कि पशुओं के चारे की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए।
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इसके अलावा तत्काल खाता खुलवाकर धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में हस्तांतरित करने को भी कहा गया है। इस बीच सीडीओ ने गोवंशीय पशुओं को गुड़ व खीरा समेत अन्य आहार खिलाए। इसके बाद सीडीओ ने गांव सादातबाड़ी में पहुंचकर गोआश्रय स्थल का निरीक्षण किया।
सादातबाड़ी में 251 गोवंशीय पशु थे। सीडीओ ने बताया कि यहां पशुओं को गुणवत्तापूर्ण चारा उचित मात्रा में दिया जा रहा था। पशुओं को श्रेणीवार रखा गया था। इसके बाद पाठकपुर में बने गोआश्रय स्थल में निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने देखा कि पशुओं को चारा ठीक-ठाक दिया जा रहा था।
ग्राम प्रधानों ने उठाया धनराशि की कमी का मुद्दा
बहजोई। गोआश्रय स्थलों पर निरीक्षण के दौरान सीडीओ के सामने ग्राम प्रधानों ने धनराशि की कमी का मुद्दा उठाया। ग्राम प्रधानों का कहना था कि जितनी राशि पशुओं के चारे के लिए दी जा रही है, उतने में तो केवल भूसा ही मुश्किल से आता है। पशुओं के चारे को गुणवत्ता परक बनाए जाने के लिए और धनराशि दी जाए।
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गुरुवार को सुबह करीब 11 बजे मुख्य विकास अधिकारी उमेश कुमार त्यागी ने परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण रमेश चंद्र के साथ विकासखंड बहजोई के गांव वहांपुर पट्टी पहुंचकर गोआश्रय स्थल का निरीक्षण किया।
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सीडीओ ने बताया कि मौके पर सामने आया कि जिला पंचायत की ओर से बने गोआश्रय स्थल में छोटे-बड़े 34 गोवंशीय पशु थे। टीन शेड पड़ा हुआ था। चारों ओर लोहे के तार की फेंसिंग बनी हुई थी। पशुओं को चारे के तौर पर भूसा खिलाया जा रहा था। इसको लेकर जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी अरूण कुमार भारती व अवर अभियंता को निर्देशित किया गया कि पशुओं के चारे की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए।
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इसके अलावा तत्काल खाता खुलवाकर धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में हस्तांतरित करने को भी कहा गया है। इस बीच सीडीओ ने गोवंशीय पशुओं को गुड़ व खीरा समेत अन्य आहार खिलाए। इसके बाद सीडीओ ने गांव सादातबाड़ी में पहुंचकर गोआश्रय स्थल का निरीक्षण किया।
सादातबाड़ी में 251 गोवंशीय पशु थे। सीडीओ ने बताया कि यहां पशुओं को गुणवत्तापूर्ण चारा उचित मात्रा में दिया जा रहा था। पशुओं को श्रेणीवार रखा गया था। इसके बाद पाठकपुर में बने गोआश्रय स्थल में निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने देखा कि पशुओं को चारा ठीक-ठाक दिया जा रहा था।
ग्राम प्रधानों ने उठाया धनराशि की कमी का मुद्दा
बहजोई। गोआश्रय स्थलों पर निरीक्षण के दौरान सीडीओ के सामने ग्राम प्रधानों ने धनराशि की कमी का मुद्दा उठाया। ग्राम प्रधानों का कहना था कि जितनी राशि पशुओं के चारे के लिए दी जा रही है, उतने में तो केवल भूसा ही मुश्किल से आता है। पशुओं के चारे को गुणवत्ता परक बनाए जाने के लिए और धनराशि दी जाए।