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चार साल से 1161 बच्चों को नहीं मिली अनुदान राशि
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निजी खर्च पर अभिभावक बच्चों का स्कूल बैग व किताबों समेत यूनिफार्म, जूते व मोजे आदि खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। बीते चार वर्षों से आरटीई के तहत शासन की ओर से जिले के 1161 बच्चों के अभिभावकों के खातों में अनुदान राशि नहीं पहुंच सकी है।
आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत जरूरतमंद बच्चों को निजी/मान्यता प्राप्त विद्यालयों में शासन की ओर से बच्चों का नि:शुल्क दाखिला करवाया जाता है जिसमें कक्षा एक से कक्षा आठ तक पढ़ाई कराई जाती है। इसमें प्रतिमाह बच्चे की ट्यूशन फीस शासन की ओर से ही वहन की जाती है तथा प्रतिवर्ष पांच हजार रुपये अभिभावक सहायता अनुदान राशि के तौर पर बच्चों के अभिभावकों के खातों में भेजे जाने का प्रावधान है। बावजूद इसके बीते वर्ष 2017-18 से लेकर 2020-21 तक जिलेभर के विभिन्न विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे 1161 बच्चों के अभिभावकों के खातों में अभिभावक सहायता अनुदान की धनराशि नहीं पहुंची है।
इससे अभिभावक परेशान हैं और निजी खर्च पर बच्चों के स्कूल बैग समेत किताबें व दूसरी सामग्री लेने पर मजबूर हैं। यह बात दीगर है कि वर्ष 2018-19 में मौजूदा सत्र की शासन की ओर से 15 बच्चों के अभिभावकों के खातों में अभिभावक सहायता अनुदान की राशि भेजी गई थी।
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कई बार जिले से शासन को पत्र भेजकर की गई मांग
बहजोई। शिक्षा विभाग के मुताबिक अभिभावकों के खातों में बीते पांच वर्षों की अभिभावक सहायता अनुदान राशि उपलब्ध कराए जाने को लेकर प्रत्येक वर्ष मांग भेजी जा रही है। हाल ही में 21 अक्तूबर 2021 व 5 जनवरी समेत 25 व 26 मार्च 2022 को निदेशक बेसिक शिक्षा लखनऊ को पत्र भेज कर अनुदान राशि की मांग की गई है।
माह मार्च में शासन की ओर से ग्रांट बहुत ही कम मिली थी। इसको लेकर शासन स्तर पर पत्र भेजकर पर्याप्त गांट उपलब्ध कराए जाने की मांग की गई है। ग्रांट मिलते ही अभिभावकों के खातों में अनुदान राशि उपलब्ध करा दी जाएगी।
दीपिका चतुर्वेदी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, संभल।
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आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत जरूरतमंद बच्चों को निजी/मान्यता प्राप्त विद्यालयों में शासन की ओर से बच्चों का नि:शुल्क दाखिला करवाया जाता है जिसमें कक्षा एक से कक्षा आठ तक पढ़ाई कराई जाती है। इसमें प्रतिमाह बच्चे की ट्यूशन फीस शासन की ओर से ही वहन की जाती है तथा प्रतिवर्ष पांच हजार रुपये अभिभावक सहायता अनुदान राशि के तौर पर बच्चों के अभिभावकों के खातों में भेजे जाने का प्रावधान है। बावजूद इसके बीते वर्ष 2017-18 से लेकर 2020-21 तक जिलेभर के विभिन्न विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे 1161 बच्चों के अभिभावकों के खातों में अभिभावक सहायता अनुदान की धनराशि नहीं पहुंची है।
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इससे अभिभावक परेशान हैं और निजी खर्च पर बच्चों के स्कूल बैग समेत किताबें व दूसरी सामग्री लेने पर मजबूर हैं। यह बात दीगर है कि वर्ष 2018-19 में मौजूदा सत्र की शासन की ओर से 15 बच्चों के अभिभावकों के खातों में अभिभावक सहायता अनुदान की राशि भेजी गई थी।
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कई बार जिले से शासन को पत्र भेजकर की गई मांग
बहजोई। शिक्षा विभाग के मुताबिक अभिभावकों के खातों में बीते पांच वर्षों की अभिभावक सहायता अनुदान राशि उपलब्ध कराए जाने को लेकर प्रत्येक वर्ष मांग भेजी जा रही है। हाल ही में 21 अक्तूबर 2021 व 5 जनवरी समेत 25 व 26 मार्च 2022 को निदेशक बेसिक शिक्षा लखनऊ को पत्र भेज कर अनुदान राशि की मांग की गई है।
माह मार्च में शासन की ओर से ग्रांट बहुत ही कम मिली थी। इसको लेकर शासन स्तर पर पत्र भेजकर पर्याप्त गांट उपलब्ध कराए जाने की मांग की गई है। ग्रांट मिलते ही अभिभावकों के खातों में अनुदान राशि उपलब्ध करा दी जाएगी।
दीपिका चतुर्वेदी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, संभल।