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ऋण माफी आवेदन के लिए किसानों ने झेली मुश्किल
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बहजोई। जिले भर से ऋण माफी के लिए आवेदन देने आए किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई घंटे लाइन में लगने पर भी कई किसानों का आवेदन जमा नहीं हो सका। इससे किसानों को मायूस होकर बैरंग लौटना पड़ा। किसानों ने आवेदन जमा करने के लिए काउंटर बढ़ाए जाने की मांग की।
सोमवार को कलक्ट्रेट परिसर में बने राजकीय कृषि केंद्र पर किसानों का सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गया। देखते ही देखते कई कतारें लग गईं। किसानों का कहना था कि काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ढिलाई बरत रहे हैं, जिससे देरी हो रही है। घंटों इंतजार के बाद भी आवेदन नहीं जमा हो पा रहे हैं।
किसानों में असमोली के इसराइल हुसैन, गुन्नौर के यादराम, रामकुंवर, जयकिशोर आदि का कहना था कि अधिकारियों को चाहिए कि वह किसानों की संख्या को देखते हुए काउंटर बढ़ाएं। इससे किसानों को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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वहीं भीकम, सुरेंद्र सिंह व नाहर सिंह आदि किसानों का कहना था कि वह सुबह नौ बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन उनका नंबर नहीं आ सका। कर्मचारियों की ढिलाई का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं जिला कृषि अधिकारी डा. नरेंद्र कुमार ने बताया कि ऋण माफी योजना के तहत उन किसानों का आवेदन स्वीकार किया जा रहा है, जिन किसानों ने 31 मार्च 2016 तक ऋण लिया है और जमा नहीं कर सके हैं। कर्मचारियों की ढिलाई व काउंटर बढ़ाने की मांग पर उन्होंने कहा कि ऋण माफी के लिए आए आवेदन में पात्रता की जांच के लिए दो से तीन मिनट का समय लगता है। इसलिए आवेदन जमा करने में थोड़ी देरी होती है। उन्होंने बताया कि अब तक 11 सौ आवेदन फार्म किसान ले जा चुके हैं, जिसमें 280 आवेदन जमा किए जा चुके हैं।
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सोमवार को कलक्ट्रेट परिसर में बने राजकीय कृषि केंद्र पर किसानों का सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गया। देखते ही देखते कई कतारें लग गईं। किसानों का कहना था कि काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ढिलाई बरत रहे हैं, जिससे देरी हो रही है। घंटों इंतजार के बाद भी आवेदन नहीं जमा हो पा रहे हैं।
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किसानों में असमोली के इसराइल हुसैन, गुन्नौर के यादराम, रामकुंवर, जयकिशोर आदि का कहना था कि अधिकारियों को चाहिए कि वह किसानों की संख्या को देखते हुए काउंटर बढ़ाएं। इससे किसानों को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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वहीं भीकम, सुरेंद्र सिंह व नाहर सिंह आदि किसानों का कहना था कि वह सुबह नौ बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन उनका नंबर नहीं आ सका। कर्मचारियों की ढिलाई का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं जिला कृषि अधिकारी डा. नरेंद्र कुमार ने बताया कि ऋण माफी योजना के तहत उन किसानों का आवेदन स्वीकार किया जा रहा है, जिन किसानों ने 31 मार्च 2016 तक ऋण लिया है और जमा नहीं कर सके हैं। कर्मचारियों की ढिलाई व काउंटर बढ़ाने की मांग पर उन्होंने कहा कि ऋण माफी के लिए आए आवेदन में पात्रता की जांच के लिए दो से तीन मिनट का समय लगता है। इसलिए आवेदन जमा करने में थोड़ी देरी होती है। उन्होंने बताया कि अब तक 11 सौ आवेदन फार्म किसान ले जा चुके हैं, जिसमें 280 आवेदन जमा किए जा चुके हैं।