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विवाद और खींचतान में उलझी रही जिला पंचायत

Tue, 12 Jan 2021 11:23 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2021 11:23 PM IST
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Zilla Panchayat involved in controversy and tussle
जैन कॉलेज रोड स्थित जिला पंचायत का द्वार - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जिला पंचायत बोर्ड के पांच साल आज पूरे हो जाएंगे। बोर्ड का गठन होने पर दावे और वादे तो खूब हुए थे, मगर पांच साल विवाद और खींचतान में ही उलझे रहे। बोर्ड अध्यक्ष बसपा समर्थित होने के चलते भाजपा समर्थित सदस्यों से छत्तीस का आंकड़ा रहा तो खींचतान भी खूब रहीं। बोर्ड बैठकों में हंगामे भी खूब हुए। वहीं, जिला पंचायत के अधिकारियों पर भी मनमानी करने के आरोप लगे।
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130 करोड़ से 1451 कार्य कराने का दावा
जिला पंचायत ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, खड़ंजे, नालों से लेकर अन्य विकास कार्य कराती है। जिला पंचायत के अधिकारियों की मानें तो इस पांच साल के दौरान करीब 130 करोड़ रुपये के 1451 निर्माण कार्य जिला पंचायत द्वारा कराए गए।
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- अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक आया
जिला पंचायत में चलती खींचतान का ही नतीजा है कि गत वर्ष दिसंबर माह में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक लाया गया। हालांकि जब बोर्ड बैठक में अविश्वास प्रस्ताव रखा गया तो, कोरम पूरा नहीं होने की वजह से अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था।
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- पाला बदली भी खूब हुई
जब बसपा समर्थित तस्मीम बानो को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी मिली तब बसपा समर्थित सदस्यों की संख्या भी बहुमत साबित कराने में कारगर थी, लेकिन उसके बाद भाजपा ने जोड़तोड़ शुरू की तो कई सदस्यों की पाला बदली भी हुई। 2019 के लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही जिला पंचायत सदस्य के पति घनश्याम सहित कई सदस्य बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। फिलहाल बसपा समर्थित 19, भाजपा समर्थित 16, सपा समर्थित 08 और कांग्रेस समर्थित 06 सदस्य बताए जाते हैं।
- कार्यादेश और अनुबंध के बगैर कार्य कराने पर हुआ विवाद
जिला पंचायत ने 451 निर्माण कार्यों के टेंडर 29 मई 2020 को निकाले थे, जिसके बाद जिला पंचायत की अपर मुख्याधिकारी डॉ. सुमनलता ने जुलाई माह में स्थलीय निरीक्षण किया। उसमें 18 निर्माण कार्य बगैर कार्यादेश और अनुबंध के ही कर दिए जाने पर विवाद हुआ। शासन को पत्र भेजा तो भुगतान पर रोक लगी और फिर जिलाधिकारी ने तकनीकी समिति से इसकी जांच कराई।
- खनन वाहन अभिवहन शुल्क से बढ़ाई आमदनी
जिला पंचायत की अपर मुख्याधिकारी डॉ. सुमनलता ने बताया कि इस कार्यकाल में जिला पंचायत की आमदनी बढ़ाने में काफी हद तक सफलता मिली। खनन वाहन अभिवहन शुल्क वसूली का ठेका पूर्व में तीन वर्ष के लिए सिर्फ 6.40 करोड़ में हुआ था, जो 2019 में 16.41 करोड़ रुपये में ढाई वर्ष के लिए छोड़ा गया। इससे ढाई गुना से ज्यादा आमदनी बढ़ी।

जिला पंचायत चेयर पर्सन तस्मीम बानो के प्रतिनिधि माजिद अली ने बताया कि बोर्ड के पांच वर्ष के कार्यकाल में करीब 130 करोड़ रुपये की धनराशि से विकास कार्य कराए गए। कई कार्यों के अभी टेंडर हुए हैं और कुछ कार्य अभी भी चल रहे हैं, जो जल्द ही पूरे हो जाएंगे।
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