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Saharanpur News: जर्जर इमारत में ककहरा सीखने को मजबूर नौनिहाल
Fri, 27 Mar 2026 01:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 27 Mar 2026 01:35 AM IST
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तल्हेड़ी बुजुर्ग के प्राथमिक स्कूल नंबर एक की जर्जर इमारत। संवाद
तल्हेडी बुजुर्ग। प्राथमिक विद्यालय तल्हेड़ी नंबर एक की इमारत के दो कमरे करीब सात दशक पुराने हैं। इनमें एक पर तो ताला लगा दिया गया है, लेकिन दूसरे कक्ष को मरम्मत करके इस्तेमाल किया जा रहा है जो कभी भी बच्चों की जान पर भारी पड़ सकता है। बरसात में स्कूल में पानी भरने से शिक्षण कार्य बंद करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद भी स्कूल की दशा में सुधार नहीं हो रहा है।
स्कूल में कुल पांच कमरे हैं, जिनमें से तीन कमरे नए बने हुए तथा दो कमरे काफी पुराने और खस्ता हाल हैं। इनके नीचे बैठना जान जोखिम में डालना है। स्कूल के गहराई में होने के कारण बारिश होने पर पूरी बिल्डिंग में जलभराव हो जाता है, इसके बाद बच्चों को स्कूल आने में भी बड़ी कठिनाई होती है। बरसात के मौसम में ज्यादातर बच्चे तो स्कूल आना ही बंद कर देते हैं। स्कूल में कुल 157 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिन्हें नए तीन कमरों और बरामदे में बैठाया जाता है। एक कमरा पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, जिसे बंद कर रखा है। एक कमरे की अध्यापकों द्वारा मरम्मत की गई है।
प्रधानाचार्य अतुल सिंह ने बताया कि उन्होंने पिछले साल अगस्त में इस स्कूल का चार्ज लिया था। इमारत की बदहाली के बारे में उन्होंने विभाग के अधिकारियों को लिखित अवगत करा रखा है, लेकिन अभी तक पुराने कक्षों का ध्वस्तीकरण कर नए बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
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बोले अभिभावक-- -- --
-फैजान ने बताया कि उसकी बेटी लाइबा इस बार कक्षा पांच में आ जाएगी। स्कूल के बिल्डिंग बहुत पुरानी और खराब हो चुकी है। इसलिए बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर मन में डर सा बना रहता है।
-रईसा ने बताया कि उसके पोता पोती इसी स्कूल में पढ़ते हैं। बिल्डिंग बहुत पुरानी हैं जो कभी भी गिर सकती है, जिससे बच्चों की जान पर बन आएगी।
-ताहिर का कहना है कि यह बिल्डिंग उनके जन्म से भी पहली बनी है। पहले वह इसमें पढ़े और अब उनके बच्चे पढ़ रहे हैं। बरसात होने पर सड़क का भी बिल्डिंग में ही भर जाता है, जो कई दिन तक नहीं निकल पाता।
- दीपा ने बताया कि उसके दो बच्चे गुरदीप और आदित्य इसी स्कूल में पढ़ते हैं। बरसात के मौसम में तो कई बार उसके बच्चे स्कूल में पानी भरने पर कपड़े खराब करके घर आते हैं।
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स्कूल में कुल पांच कमरे हैं, जिनमें से तीन कमरे नए बने हुए तथा दो कमरे काफी पुराने और खस्ता हाल हैं। इनके नीचे बैठना जान जोखिम में डालना है। स्कूल के गहराई में होने के कारण बारिश होने पर पूरी बिल्डिंग में जलभराव हो जाता है, इसके बाद बच्चों को स्कूल आने में भी बड़ी कठिनाई होती है। बरसात के मौसम में ज्यादातर बच्चे तो स्कूल आना ही बंद कर देते हैं। स्कूल में कुल 157 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिन्हें नए तीन कमरों और बरामदे में बैठाया जाता है। एक कमरा पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, जिसे बंद कर रखा है। एक कमरे की अध्यापकों द्वारा मरम्मत की गई है।
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प्रधानाचार्य अतुल सिंह ने बताया कि उन्होंने पिछले साल अगस्त में इस स्कूल का चार्ज लिया था। इमारत की बदहाली के बारे में उन्होंने विभाग के अधिकारियों को लिखित अवगत करा रखा है, लेकिन अभी तक पुराने कक्षों का ध्वस्तीकरण कर नए बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
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बोले अभिभावक
-फैजान ने बताया कि उसकी बेटी लाइबा इस बार कक्षा पांच में आ जाएगी। स्कूल के बिल्डिंग बहुत पुरानी और खराब हो चुकी है। इसलिए बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर मन में डर सा बना रहता है।
-रईसा ने बताया कि उसके पोता पोती इसी स्कूल में पढ़ते हैं। बिल्डिंग बहुत पुरानी हैं जो कभी भी गिर सकती है, जिससे बच्चों की जान पर बन आएगी।
-ताहिर का कहना है कि यह बिल्डिंग उनके जन्म से भी पहली बनी है। पहले वह इसमें पढ़े और अब उनके बच्चे पढ़ रहे हैं। बरसात होने पर सड़क का भी बिल्डिंग में ही भर जाता है, जो कई दिन तक नहीं निकल पाता।
- दीपा ने बताया कि उसके दो बच्चे गुरदीप और आदित्य इसी स्कूल में पढ़ते हैं। बरसात के मौसम में तो कई बार उसके बच्चे स्कूल में पानी भरने पर कपड़े खराब करके घर आते हैं।