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विधेयक से ज्यादा फसल का उचित दाम मिलने की चिंता

Sun, 27 Sep 2020 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2020 12:12 AM IST
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Worry about getting a fair price for the crop more than the bill
कुछ किसान बोले, घातक है विधेयक तो कुछ न जताई अनभिज्ञता
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अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। केंद्र सरकार कृषि विधेयक लाई, जिसको लेकर किसान संगठन और राजनीतिक दल हल्ला मचा रहे हैं। विधेयक को किसान विरोधी बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस विधेयक से किसान बर्बाद हो जाएगा। एमएसपी दिलाने की अनिवार्यता न होने को मुद्दा बनाया जा रहा है। आम किसान भी चाहता है कि उसे फसल का वाजिब दाम मिले, लेकिन विधेयक में क्या अच्छाई है और क्या खराबी है, उस बारे में ज्यादा जानकारी आम किसान को नहीं है। खेत में पसीना बहाने वाले जिले के साधारण किसानों से जब विधेयक के बारे में बात की गई। किसी ने विधेयक को किसान के लिए घातक बताया तो, किसी ने जानकारी ही होने से इनकार कर दिया। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट...
फसल गिरने से चिंतित दिखे रामप्रसाद
गांव अहमदपुर सादात निवासी रामप्रसाद अपने खेत की डोल पर बैठे चिंता में डूबे मिले। चिंता की वजह उनके सामने खेत में गिरी हुई धान की फसल थी, जो दो दिन पहले ही आंधी में गिर गई। फसल पक कर तैयार हो चुकी है, जिसकी कटाई होनी है। रामप्रसाद ने कहा कि म्हारी तो फसल पिट गई, विधेयक में क्या है, हमें जानकारी नहीं।
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-- गांव अगवानहेड़ा निवासी अनिल कुमार सैनी के खेत नवनिर्मित बाईपास के निकट हैं। वह भी अपने खेत पर फसल देखने पहुंचे। उनका कहना था कि यह विधेयक किसान के लिए बहुत घातक है। क्योंकि इसमें निर्धारित रेट पर फसल खरीदने की बात कही गई है, लेकिन मंडी के बाहर का व्यापारी मनमाने दाम पर फसल खरीदता है, उस पर किसी तरह का अंकुश नहीं है और न ही विधेयक में एमएसपी पर ही खरीद करने की अनिवार्यता दी गई है।
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गांव अगवानहेड़ा के ही राकेश कुमार का कहना है कि एक बात तो इस विधेयक में फायदे वाली है, जो किसानों को अपना अनाज किसी भी जगह ले जाकर बेचने की छूट के रूप में है। बाकी बात ये है कि मोटा धान जो कट रहा है, उसका मंडी में और बाहर के व्यापारी औने पौने दाम लगा रहे हैं। खेत में म्हारी फसल गिर गई, इसे देखकर समझ नहीं आ रहा कि क्या कहें।
- ग्राम नागल निवासी नवाब सिंह का कहना है कि यदि मंडी और बाहर के व्यापारी समर्थन मूल्य पर ही फसल खरीदते हैं तो विधेयक सही है, नहीं तो गलत है। सरकार के समर्थन मूल्य और बाजार के मूल्य में अंतर है, आढ़ती भी निर्धारित मूल्य पर फसल नहीं खरीद रहे।

- गांव मीरपुर मनोहरपुर निवासी कश्मीरा का कहना है कि म्हारी फसल पहले ही मंदी बिक रही है, विधेयक के बारे में हमने तो सुना है कि आगे जाकर दिक्कत होगी। पिछली साल से भी मंदा भाव फसल का मिल रहा है।
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