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विश्व रक्तदाता दिवस : खून की कमी से न जाए किसी की जान
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-रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे जिले के युवा
-सूचना पर जरूरतमंद की मदद के लिए पहुंचते हैं ब्लड बैंक
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। बुधवार को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाएगा। रक्तदान सबसे बड़ा दान है। जिले में युवा रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि रक्तदान करने से किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है बल्कि शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। खून की कमी से किसी की जान न जाए, इसलिए वह सूचना मिलते ही ब्लड बैंक पहुंच जाते हैं।
महिलाओं के प्रेरणा बनीं रितिका
चिकित्सकों के अनुसार महिलाओं में रक्त की कमी अधिक होती है। इसके बाद भी वह हमेशा रक्तदान करने को तैयार रहती हैं। रितिका ठक्कर छह बार रक्तदान कर चुकी हैं। उनका कहना है कि यदि खानपान और स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए तो युवतियां और महिलाएं भी रक्तदान कर सकती हैं।
68 बार रक्तदान कर चुके हैं पार्थ
पार्थ माहेश्वरी ने संकल्प लिया है कि वह रक्तदान करते रहेंगे और दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं। अब तक वह 68 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भी अस्पताल से फोन आने पर जरूरतमंदों को रक्तदान कर रक्त उपलब्ध कराया। वह कहते हैं कि रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती।
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एक फोन पर ही पहुंच जाते हैं विवेक
46 बार रक्तदान कर चुके विवेक गर्ग एक फोन ही रक्तदान करने के लिए पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि जब भी किसी जरूरतमंद को खून की जरूरत पड़ी तो वह बिना किसी सोचे समझें ही दौड़ पड़ते हैं।
भावना ने नौ बार किया रक्तदान
भावना का ग्रुप ओ पॉजिटिव है। वह अब तक नौ बार रक्तदान कर चुकी हैं। उनका कहना है कि हर स्वस्थ महिलाओं को रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए। 18 साल पूरी करने वाली युवतियां भी रक्तदान कर सकती हैं।
हर तीन से चार माह में देते हैं रक्त
अभय राज पंवार का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है। वह अब तक 34 बार रक्तदान कर चुके हैं। किसी को रक्त की जरूरत होती है तो वह तुरंत पहुंच जाते हैं। तीन से चार माह पूरे होने पर नियमित रक्तदान करते हैं। गर्मी के सीजन में डेंगू का प्रकोप बढ़ जाता है, जिसमें प्लेटलेट्स की जरूरत होती है।
रक्तदान करने से मिलती है मन में शांति
मोती यादव 22 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनका कहना है कि रक्तदान करने से मन में शांति मिलती है। कहा कि स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर महादानी बन सकता है। रक्तदान करने से किसी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।
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-सूचना पर जरूरतमंद की मदद के लिए पहुंचते हैं ब्लड बैंक
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। बुधवार को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाएगा। रक्तदान सबसे बड़ा दान है। जिले में युवा रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि रक्तदान करने से किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है बल्कि शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। खून की कमी से किसी की जान न जाए, इसलिए वह सूचना मिलते ही ब्लड बैंक पहुंच जाते हैं।
महिलाओं के प्रेरणा बनीं रितिका
चिकित्सकों के अनुसार महिलाओं में रक्त की कमी अधिक होती है। इसके बाद भी वह हमेशा रक्तदान करने को तैयार रहती हैं। रितिका ठक्कर छह बार रक्तदान कर चुकी हैं। उनका कहना है कि यदि खानपान और स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए तो युवतियां और महिलाएं भी रक्तदान कर सकती हैं।
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68 बार रक्तदान कर चुके हैं पार्थ
पार्थ माहेश्वरी ने संकल्प लिया है कि वह रक्तदान करते रहेंगे और दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं। अब तक वह 68 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भी अस्पताल से फोन आने पर जरूरतमंदों को रक्तदान कर रक्त उपलब्ध कराया। वह कहते हैं कि रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती।
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एक फोन पर ही पहुंच जाते हैं विवेक
46 बार रक्तदान कर चुके विवेक गर्ग एक फोन ही रक्तदान करने के लिए पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि जब भी किसी जरूरतमंद को खून की जरूरत पड़ी तो वह बिना किसी सोचे समझें ही दौड़ पड़ते हैं।
भावना ने नौ बार किया रक्तदान
भावना का ग्रुप ओ पॉजिटिव है। वह अब तक नौ बार रक्तदान कर चुकी हैं। उनका कहना है कि हर स्वस्थ महिलाओं को रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए। 18 साल पूरी करने वाली युवतियां भी रक्तदान कर सकती हैं।
हर तीन से चार माह में देते हैं रक्त
अभय राज पंवार का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है। वह अब तक 34 बार रक्तदान कर चुके हैं। किसी को रक्त की जरूरत होती है तो वह तुरंत पहुंच जाते हैं। तीन से चार माह पूरे होने पर नियमित रक्तदान करते हैं। गर्मी के सीजन में डेंगू का प्रकोप बढ़ जाता है, जिसमें प्लेटलेट्स की जरूरत होती है।
रक्तदान करने से मिलती है मन में शांति
मोती यादव 22 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनका कहना है कि रक्तदान करने से मन में शांति मिलती है। कहा कि स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर महादानी बन सकता है। रक्तदान करने से किसी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।