फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Wood items in the export game, hurt the government millions

वुड आइटम के एक्सपोर्ट में खेल, सरकार को करोड़ों की चपत

Tue, 08 Sep 2015 12:14 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर Updated Tue, 08 Sep 2015 12:14 AM IST
विज्ञापन
Wood items in the export game, hurt the government millions
पूरी दुनिया में वुडकार्विंग के जरिए डंका बजाने वाले सहारनपुर में वुड आइटम के एक्सपोर्ट में बड़ा खेल किया जा रहा है। मैंगो वुड के नाम पर मीडियम डेनसिटी फाइबर बोर्ड (एमडीएफ) का एक्सपोर्ट किया जा रहा है और इसमें ड्यूटी ड्रॉ बैक से सरकारी खजाने पर करोड़ों की चपत लगाई जा रही है। इस पूरी खेल में केन्द्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन

दरअसल, सहारनपुर से प्रतिमाह करोड़ों रुपये के वुड और एमडीएफ का माल एक्सपोर्ट किया जाता है। सहारनपुर में विदेशों से मंगाई जाने वाली आम की लकड़ियों की नक्काशी कर उनका एक्सपोर्ट किया जाता है। सूत्रों की मानें तो पिछले सप्ताह सहारनपुर का एक निर्यातक माल रीचेक में कस्टम के हत्थे चढ़ा है। इसमें एमडीएफ के माल को वुड में एक्सपोर्ट करने की कोशिश हो रही थी। हालांकि मामला दादरी से जुड़ा होने के चलते यहां के अधिकारी पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। दादरी में रीचेक में पकड़े गए कंटेनर मामले में माल को पास करने वाले कस्टम इंस्पेक्टर को भी जांच के दायरे में रखा गया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इंपोर्ट के वक्त इस लकड़ी पर पांच फीसदी ड्यूटी दी जाती है और एक्सपोर्ट में वह ड्यूटी ड्रॉ बैक हो जाती है। इन्हीं नियमों का फायदा उठाकर उद्यमी ड्यूटी ड्रॉ बैक के नाम पर बड़ा खेल कर रहे हैं। सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम के अफसरों की शह पर एमडीएफ के माल को मैंगो वुड के नाम पर भेजा जा रहा है। इस पूरे खेल के पीछे एक्सपोर्ट के नियमों की पेंचीदगी बड़ा कारण है। ज्यादातर निर्यातक दादरी से कंटेनर मंगाते हैं। ऐसे में उनके पास कस्टम एक्साइज के रेंज के इंस्पेक्टर फैक्ट्री में आकर माल की जांच करते हैं। एमडीएफ के माल को भी वुड में काउंट कराकर ड्यूटी ड्रॉ से करोड़ों रुपये का गोलमाल किया जा रहा है। सहारनपुर से प्रतिमाह 50 करोड़ रुपये का वुडकार्विंग का माल एक्सपोर्ट किया जा रहा है। आपको बता दें कि ऐसी ही गड़बड़ी पर पिछले दिनों सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम के कई अधिकारियों पर शिकंजा कसा गया था और इसमें कई निलंबित भी हुए थे।
विज्ञापन


क्यों करते हैं यह खेल
दरअसल, वुडकार्विंग को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार की लाइसेंसी अॅथारिटी सात फीसदी का अनुदान देती है। इसके अलावा मैंगो वुड ज्यादातर इंपोर्ट होती है। ऐसे में उस पर पांच फीसदी का ड्यूटी ड्रॉ बैक भी मिलती है। ऐसे में वुड को एक्सपोर्ट करने पर 12 फीसदी का अनुदान मिल जाता है। जबकि एमडीएफ पर केवल 1.7 फीसदी ड्रॉ बैक मिलता है। निर्यातक साठगांठ कर वुड के नाम पर एमडीएफ को एक्सपोर्ट कर देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


नियमों की पेंचीदगी बड़ा कारण
दरअसल, सहारनपुर से एक्सपोर्ट करने के दो विकल्प हैं। शिपिंग एजेंट के जरिए कंसाइनमेंट का कंटेनर मंगाने पर कस्टम अॅथारिटी माल को पास करती है। जबकि दादरी से कंटेनर मंगाने पर कस्टम एक्साइज रेंज पूरे मामले की निगरानी करती है। इस नियमों की पेंचीदगी के चलते एक्सपोर्ट में ड्यूटी ड्रॉ बैक का खेल बड़ी आसानी से कर लिया जाता है।

एक्सपोर्ट का माल पूरे ऐहतियात से चेक किया जाता है। ऐसे में गड़बड़ी की आशंका बिल्कुल नहीं होती। पूरे मामले में हम गंभीर रहते हैं। कई बार वुड के माल पर थोड़ा बहुत एमडीएफ होता है। मगर, वुड के नाम पर एमडीएफ के एक्सपोर्ट का मामला तो अब तक नहीं आया है।

आईएस कुरील, सुप्रिंटेंडेंट, केन्द्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क

हमारा काम लोकल एक्सपोर्ट को चेक करना है और काफी माल दादरी से भेजा जाता है। दादरी में रीचेक के लिए रोके गए माल की सूचना अब तक नहीं है, मगर जानकारी जुटाई जाएगी।
वीके त्रेहान, असिस्टेंट कमिश्नर, सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed