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वंचितों का जीवन स्तर सुधारने के लिए करेंगी काम
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देवबंद (सहारनपुर)। ग्राम पंचायत पनियाली कासिमपुर में इस बार रश्मि ग्राम प्रधान निर्वाचित हुई है। उनका कहना है कि वह बिना किसी भेदभाव के गांव में विकास कार्य कराएंगी। उनकी प्राथमिकता गांव में बरातघर, पेयजल के लिए टंकी का निर्माण कराना, सफाई व्यवस्था को दुरुस्त बनाने तथा टूटी सड़कों का निर्माण कराने के साथ ही खस्ताहाल उप स्वास्थ्य केंद्र की दशा बदलना है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा। सरकारी सस्ते गल्ले का राशन पाने से जो पात्र लोग वंचित हैं, उनके राशन कार्ड बनवाए जाएंगे। पात्रों की विधवा व वृद्धावस्था पेंशन भी शुरू कराने का काम करेंगी। वंचितों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए अथक प्रयास किए जाने की बात प्रधान कहती हैं।
प्रधान का प्रोफाइल
प्रधान रश्मि की शैक्षिक योग्यता एमए हिंदी है।
उनके पति पवित्र सिंह का मुख्य व्यवसाय खेती है।
चिकित्सा और शिक्षा की बुनियादी सुविधाओं का है अभाव
देवबंद विकासखंड के जाट बाहुल्य गांव पनियाली कासिमपुर की आबादी करीब छह हजार है। तल्हेड़ी बुजुर्ग से तीन किलोमीटर दूर बसा यह गांव गुरुद्वारा छठी पातशाही के कारण प्रसिद्ध है। गांव की अधिकांश सड़कें पक्की हैं, लेकिन कुछ रास्तों पर खड़ंजा हैं। गांव में प्राइमरी स्कूल है लेकिन इससे आगे की पढ़ाई करने के लिए बच्चों को तीन किमी दूर तल्हेड़ी आना पड़ता है। गांव में भले ही उप स्वास्थ्य केंद्र बना है लेकिन उस पर सुविधाओं का अभाव है। चिकित्सीय स्टाफ के कभी कभार आने के चलते ग्रामीणों को प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है।
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प्रधान का प्रोफाइल
प्रधान रश्मि की शैक्षिक योग्यता एमए हिंदी है।
उनके पति पवित्र सिंह का मुख्य व्यवसाय खेती है।
चिकित्सा और शिक्षा की बुनियादी सुविधाओं का है अभाव
देवबंद विकासखंड के जाट बाहुल्य गांव पनियाली कासिमपुर की आबादी करीब छह हजार है। तल्हेड़ी बुजुर्ग से तीन किलोमीटर दूर बसा यह गांव गुरुद्वारा छठी पातशाही के कारण प्रसिद्ध है। गांव की अधिकांश सड़कें पक्की हैं, लेकिन कुछ रास्तों पर खड़ंजा हैं। गांव में प्राइमरी स्कूल है लेकिन इससे आगे की पढ़ाई करने के लिए बच्चों को तीन किमी दूर तल्हेड़ी आना पड़ता है। गांव में भले ही उप स्वास्थ्य केंद्र बना है लेकिन उस पर सुविधाओं का अभाव है। चिकित्सीय स्टाफ के कभी कभार आने के चलते ग्रामीणों को प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है।
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