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आपातकाल के 45 साल: जो भी उठाता था आवाज, उसे कर लिया जाता था गिरफ्तार, सुनाई आपबीती

Fri, 26 Jun 2020 01:30 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Fri, 26 Jun 2020 01:30 PM IST
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Saharanpur News: Whoever raised the voice, was arrested
पूर्व विधायक सुखबीर सिंह पुंडीर और राकेश गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

25 जून 1975 में रात को लगी इमरजेंसी को याद कर लोकतंत्र सेनानी इसे भारत के इतिहास का सबसे काला दिन बताते हैं। वे कहते हैं कि अपने अधिकारों को लेकर जो भी आवाज उठाता था, उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता था। सहारनपुर जनपद से 150 से अधिक लोग इमरजेंसी में जेल गए थे।

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मिशन कंपाउंड निवासी पूर्व विधायक लाजकृष्ण गांधी ने बताया कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया जाता था, उसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी जाती थी। जनता के सभी अधिकार छीन लिए गए थे। गिरफ्तार लोगों को कहां रखा जाता था, इसकी भी किसी को भनक नहीं लगने दी जाती थी। जेल में बंदियों को प्रताड़ित किया जाता था। शाम छह बजे से ही कोठरी में बंद कर दिया जाता था। आपातकाल के विरोध में पूरे देश सहित सहारनपुर के लोगों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
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लोकतंत्र सेनानी मोर्चा के अध्यक्ष व पूर्व विधायक सुखबीर सिंह पुंडीर ने बताया कि जिले से 150 से अधिक लोग इमरजेंसी में जेल गए थे। वह अपने साथी सतीश शर्मा, ओमवीर सिंह पुंडीर, नरेंद्र पाल शर्मा, साधुराम वर्मा, प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री राम सिंह, डॉक्टर पन्ना लाल शर्मा, पूर्व विधायक लाजकृष्ण गांधी, आरएसएस के जिला संचालक लाला बिशन लाल मित्तल, महेंद्र कंसल के साथ जेल गए थे।


बताया गया कि हर तरफ हाहाकार मचा था। आपातकाल में चुनाव भी स्थगित हो गए थे। 26 जून की सुबह लोगों ने रेडियो पर आपातकाल लगने की जानकारी सुनी थी। लोकतंत्र सेनानी चंद्रनगर निवासी राकेश गुप्ता का कहना है कि जिस समय आपातकाल लगा था, वह जेल गए थे। तब, किसी पार्टी की ओर से आंदोलन करने की सूचना नहीं थी। वह इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। तब, उनको पकड़कर जेल भेज दिया गया था।

किशनपुरा निवासी लोकतंत्र सेनानी अमरदीप मित्तल का कहना है कि रेडियो और अखबारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। चाय की दुकानों पर चर्चा नहीं होने दी जाती थी। कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर पाता था, जो जनता के अधिकारों की बात करता था, उसे पकड़ कर जेल में डाल दिया जाता था। आपातकाल में लोगों के मौलिक अधिकारों खत्म कर दिया गया था। इंदिरा गांधी सरकार दमनकारी नीति के साथ काम कर रही थी, लेकिन इसका लोग भी पुरजोर विरोध कर रहे थे।


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