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जहां प्रेम है, वहीं शांति और सद्भाव: ज्ञानानंद
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जहां प्रेम है, वहीं शांति और सद्भाव है : ज्ञानानंद
सहारनपुर। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता एक विलक्षण ग्रंथ है। वास्तविक मनुष्य वह है, जिसके विचार सुंदर हो, स्वभाव में कपट न हो।
जनकपुरी चौक स्थित एक सभागार में आयोजित गीता महोत्सव में स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता हर पल मुस्कुराकर जीना सिखाती है, जहां प्रेम है, वहीं शांति और सद्भाव है। हमारे देश की माटी चंदन है और तपोभूमि हर गांव है। भारत भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की दिव्य भूमि है। जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता मानसिक शांति है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि रिमाउंट डिपो के कमांडेंट मंगल सिंह, महापौर संजीव वालिया, नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह, महामंडलेश्वर रिजकदास, अतुल जोशी महाराज ने किया।इस दौरान श्रीकृष्ण सेवा समिति के अध्यक्ष पवन किनरा, राजकुमार विज, मनमोहन भरतरी, अशोक पपनेजा, अजय मलिक, रघुनाथ शर्मा, सुदर्शन मिड्ढा मौजूद रहे।
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सहारनपुर। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता एक विलक्षण ग्रंथ है। वास्तविक मनुष्य वह है, जिसके विचार सुंदर हो, स्वभाव में कपट न हो।
जनकपुरी चौक स्थित एक सभागार में आयोजित गीता महोत्सव में स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता हर पल मुस्कुराकर जीना सिखाती है, जहां प्रेम है, वहीं शांति और सद्भाव है। हमारे देश की माटी चंदन है और तपोभूमि हर गांव है। भारत भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की दिव्य भूमि है। जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता मानसिक शांति है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि रिमाउंट डिपो के कमांडेंट मंगल सिंह, महापौर संजीव वालिया, नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह, महामंडलेश्वर रिजकदास, अतुल जोशी महाराज ने किया।इस दौरान श्रीकृष्ण सेवा समिति के अध्यक्ष पवन किनरा, राजकुमार विज, मनमोहन भरतरी, अशोक पपनेजा, अजय मलिक, रघुनाथ शर्मा, सुदर्शन मिड्ढा मौजूद रहे।