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भूख प्यास भूलकर कोरोना से जंग में डटे हुए हैं योद्धा

Mon, 24 Aug 2020 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2020 12:12 AM IST
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Warriors are hungering in the battle with Corona, forgetting their hunger and thirst
भानू यादव - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोरोना का संक्रमण बढ़ने के साथ ही कोविड में ड्यूटी करने वाले स्टाफ की भी कसरत बढ़ रही है। संक्रमितों को कोविड केयर सेंटर तक छोड़ने वाली एंबुलेंस के पहिये पिछले पांच माह से थमे नहीं हैं। कर्मचारी दिन रात, कई बार भूख और प्यास को भूलकर भी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं। पीपीई किट में चार से पांच घंटे रहकर सैंपल लेना चुनौती बना हुआ है। अमर उजाला ने ऐसे ही कुछ कोरोना योद्धाओं से बात की। पेश है रिपोर्ट
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चार से पांच घंटे पीपीई किट में रहना भी है चुनौती
आईएमए भवन में करीब 15 दिन से एंटीजन कोरोना किट से कोरोना की जांचें की जा रही हैं। रविवार को लैब टेक्नीशियन शैंकी गुप्ता पीपीई किट पहने लोगों के सैंपल लेते मिले। शैंकी ने बताया कि जब से कोरोना संक्रमण शुरू हुआ है। तब से अलग-अलग जगहों पर ड्यूटी चल रही है। एंटीजन कोरोना किट के बाद जिम्मेदारी बढ़ गई है। चार से पांच घंटे पीपीई किट में रहना किसी चुनौती से कम नहीं है। कोरोना संक्रमण होने का खतरा अलग से है। घर में एंट्री से पहले कपड़े और जूते बाहर ही उतारकर सैनिटाइज होने और स्नान करने के बाद एंट्री करते हैं।
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रात में घर तक भी नहीं जा पाते हैं
कोरोना संक्रमितों को कोविड केयर सेंटर तक छोड़ने में लगी 108 एंबुलेंस के चालक भानू यादव ने बताया कि वह मार्च 2020 से लगातार कोरोना पॉजिटिव मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज, ग्लोकल मेडिकल कॉलेज और सीएचसी फतेहपुर छोड़ने का काम कर रहे हैं। कोरोना मरीज किसी भी समय आ जाते हैं। ऐसे में कई बार खाना भी छोड़कर भागना पड़ता है। कई बार रात में घर तक नहीं जा पाते हैं। घर जाते हैं तो खुद के साथ ही परिजनों को संक्रमण से बचाने के लिए सावधानी बरतनी पड़ती है।
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अच्छा लगता है, किसी की जान बचाने में सहयोगी है
108 एंबुलेंस पर ड्यूटी करने वाले हिमांशु ने बताया कि वह पांच माह से लगातार एंबुलेंस पर ड्यूटी कर रहे हैं। मास्क, कैप और ग्लब्स ड्यूटी के दौरान लगातार पहनने पड़ते हैं। मगर कई बार गंभीर रोगियों से सीधे संपर्क में आकर ऑक्सीजन आदि लगानी होती है, तब पीपीई किट पहनकर काम करते हैं। हिमांशु ने बताया कि इस महामारी में कोरोना से लड़ने में खतरा तो है, मगर अच्छा भी लगता है, कि वह किसी की जान बचाने में सहयोगी बन रहे हैं।

मिंशु

मिंशु- फोटो : SAHARANPUR

सैंपल लेते शैंकी गुप्ता

सैंपल लेते शैंकी गुप्ता- फोटो : SAHARANPUR

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