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Saharanpur News: पंक्चर होने पर कचरा बनने को छोड़ दिए जाते हैं लाखों के वाहन
Thu, 19 Sep 2024 01:06 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 19 Sep 2024 01:06 AM IST
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सहारनपुर। नगर निगम में जनता के पैसे की बर्बादी हो रही है। केवल एक पंक्चर होने पर लाखों कीमत के वाहनों को कचरा बनने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसे लेकर बुधवार को पड़ताल की तो वाहनों के इस्तेमाल को लेकर नगर निगम की गंभीर लापरवाही सामने आई।
गांधी पार्क में बने नगर निगम के गैराज कचरा ढुलाई के लिए खरीदा गया वाहन संख्या यूपी 11 सीटी 3922 खड़ा मिला। वाहन के अगले पहिए में पंक्चर मिला। खास बात यह है कि पूरी तरह साफ और नए वाहन की खिड़की बारिश में खोलकर छोड़ी गई है, जिसकी वजह से अंदर चालक सीट के आसपास गंदगी भरी है। पीछे ट्रॉली में मिट्टी और कचरा भरा हुआ है, जिसमें घास उग आई है। एक अन्य कचरा ढुलाई वाहन यूपी 11 सीटी 3949 भी पूरी तरह साफ है, लेकिन महीनों से एक ही जगह खड़ा हुआ कचरा बन रहा है। उधर, मुख्य नगर लेखा परीक्षक सच्चिदानंद त्रिपाठी का कहना है कि वह कई बार वाहनों की सूची मांग चुके हैं, लेकिन नहीं दी जाती है।
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खरीदने के बाद से नहीं हुआ इस्तेमाल
जून 2024 में 48 छोटे वाहन खरीदे गए थे, जिनकी कीमत 3.25 करोड़ रुपये थी। इनमें से अनेक वाहन नगर निगम परिसर में छह महीने से खुले में खड़े हैं, जिनकी ट्रॉलियों में बरसात का पानी भरा हुआ है। सवाल यह है कि यदि जरूरत नहीं थी तो खरीदे क्यों गए? उधर, निगम ने 2023 में कचरा उठान के लिए 750 रेहड़े खरीदे थे। प्रत्येक रेहड़े की कीमत करीब सात हजार रुपये थी। बड़ी संख्या में रेहड़े डेढ़ साल से नगर निगम परिसर में खड़े हैं। जिन पर जंग लग चुका है।
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पार्षदों की बात
-- पार्षद अहमद मलिक का कहना है कि दस महीने पहले सड़कों की सफाई के लिए करीब बेहद महंगी रोड स्वीपर मशीन खरीदी गई थी। पहले दिन उसे चलाकर दिखाया गया था, लेकिन उसके बाद से वह महानगर में कहीं काम करती नजर नहीं आई है। यह पैसे की बर्बादी है।
-- वार्ड 63 के पार्षद प्रतिनिधि गुलजेब खान का कहना है कि जरूरत के हिसाब से वाहन खरीदने चाहिए। अधिकारी मनमाने तरीके से जनता के पैसे की बर्बादी कर रहे हैं।
-- वार्ड दो के पार्षद सुनील पंवार का कहना है कि वह डेढ़ साल से पार्षद हैं। तब से वाहन और रेहड़ों को कचरा बनते देख रहे हैं। जनता पसीने की कमाई को टैक्स के रूप में देती है। मामला बोर्ड बैठक में उठाया जाएगा।
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अगर वाहनों के रख-रखाव और संचालन में लापरवाही बरती जा रही है तो यह गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी, साथ ही गैराज की व्यवस्था को ठीक कराया जाएगा।
- डॉ. अजय कुमार, महापौर
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गांधी पार्क में बने नगर निगम के गैराज कचरा ढुलाई के लिए खरीदा गया वाहन संख्या यूपी 11 सीटी 3922 खड़ा मिला। वाहन के अगले पहिए में पंक्चर मिला। खास बात यह है कि पूरी तरह साफ और नए वाहन की खिड़की बारिश में खोलकर छोड़ी गई है, जिसकी वजह से अंदर चालक सीट के आसपास गंदगी भरी है। पीछे ट्रॉली में मिट्टी और कचरा भरा हुआ है, जिसमें घास उग आई है। एक अन्य कचरा ढुलाई वाहन यूपी 11 सीटी 3949 भी पूरी तरह साफ है, लेकिन महीनों से एक ही जगह खड़ा हुआ कचरा बन रहा है। उधर, मुख्य नगर लेखा परीक्षक सच्चिदानंद त्रिपाठी का कहना है कि वह कई बार वाहनों की सूची मांग चुके हैं, लेकिन नहीं दी जाती है।
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खरीदने के बाद से नहीं हुआ इस्तेमाल
जून 2024 में 48 छोटे वाहन खरीदे गए थे, जिनकी कीमत 3.25 करोड़ रुपये थी। इनमें से अनेक वाहन नगर निगम परिसर में छह महीने से खुले में खड़े हैं, जिनकी ट्रॉलियों में बरसात का पानी भरा हुआ है। सवाल यह है कि यदि जरूरत नहीं थी तो खरीदे क्यों गए? उधर, निगम ने 2023 में कचरा उठान के लिए 750 रेहड़े खरीदे थे। प्रत्येक रेहड़े की कीमत करीब सात हजार रुपये थी। बड़ी संख्या में रेहड़े डेढ़ साल से नगर निगम परिसर में खड़े हैं। जिन पर जंग लग चुका है।
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पार्षदों की बात
अगर वाहनों के रख-रखाव और संचालन में लापरवाही बरती जा रही है तो यह गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी, साथ ही गैराज की व्यवस्था को ठीक कराया जाएगा।
- डॉ. अजय कुमार, महापौर