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15 साल पहले ही सहारनपुर में परखी गई थी वंदना की खेल प्रतिभा
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सहारनपुर। टोक्यो ओलंपिक में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ करो या मरो के हॉकी मुकाबले में भारतीय हॉकी टीम की ओर से हैट्रिक लगाने वाली वंदना कटारिया के हुनर को 15 साल पहले सहारनपुर में परखा गया था। लखनऊ हॉकी छात्रावास के लिए वंदना का चयन सहारनपुर के स्पोर्ट्स स्टेडियम से ही हुआ था।
हॉकी के राष्ट्रीय खिलाड़ी सहारनपुर निवासी फुरकान अहमद रेलवे में स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में रेलवे की ओर से हॉकी खेलते हैं। वंदना कटारिया भी रेलवे में टीसी के पद पर कार्यरत हैं, जो भारतीय टीम के साथ ही रेलवे के भी लिए खेलती हैं।
फुरकान ने बताया कि करीब 15 वर्ष पहले स्पोर्ट्स स्टेडियम सहारनपुर में हॉकी का मंडलीय ट्रायल हुआ था। यह ट्रायल हॉकी छात्रावास लखनऊ के लिए था। उस समय वंदना की उम्र करीब 14 वर्ष रही होगी। यहां से चार लड़कियों का चयन छात्रावास के लिए हुआ था, जिनमें वंदना कटारिया भी शामिल थी।
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फुरकान ने बताया कि वंदना कटारिया उत्तराखंड के हरिद्वार की रहने वाली हैं, जिसका गांव रोशनाबाद है। वह ट्रायल के लिए वहीं से आई थी। उन्होंने बताया कि वंदना कटारिया में खेल के प्रति जुनून ट्रायल के दौरान नजर आ गया था। यही वजह रही कि छात्रावास के बाद उसने ऊंची उड़ान भरी। वह भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान भी रह चुकी हैं। हरिद्वार के रोशनाबाद गांव में संसाधनों की कमी के बावजूद कड़ी मेहनत कर वंदना कटारिया इस मुकाम तक पहुंची हैं। वंदना कटारिया करीब 135 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। जर्मनी में 2013 में जूनियर महिला विश्व कप में कांस्य पदक जीतने वाली महिला बनी। कॉमनवेल्थ गेम में भी वंदना कटारिया का अपनी टीम की तरफ से शानदार प्रदर्शन रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि वंदना अगले मुकाबलों में भी अच्छा प्रदर्शन कर भारतीय टीम को जीत और पदक दिलाने में अहम योगदान देगी।
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हॉकी के राष्ट्रीय खिलाड़ी सहारनपुर निवासी फुरकान अहमद रेलवे में स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में रेलवे की ओर से हॉकी खेलते हैं। वंदना कटारिया भी रेलवे में टीसी के पद पर कार्यरत हैं, जो भारतीय टीम के साथ ही रेलवे के भी लिए खेलती हैं।
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फुरकान ने बताया कि करीब 15 वर्ष पहले स्पोर्ट्स स्टेडियम सहारनपुर में हॉकी का मंडलीय ट्रायल हुआ था। यह ट्रायल हॉकी छात्रावास लखनऊ के लिए था। उस समय वंदना की उम्र करीब 14 वर्ष रही होगी। यहां से चार लड़कियों का चयन छात्रावास के लिए हुआ था, जिनमें वंदना कटारिया भी शामिल थी।
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फुरकान ने बताया कि वंदना कटारिया उत्तराखंड के हरिद्वार की रहने वाली हैं, जिसका गांव रोशनाबाद है। वह ट्रायल के लिए वहीं से आई थी। उन्होंने बताया कि वंदना कटारिया में खेल के प्रति जुनून ट्रायल के दौरान नजर आ गया था। यही वजह रही कि छात्रावास के बाद उसने ऊंची उड़ान भरी। वह भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान भी रह चुकी हैं। हरिद्वार के रोशनाबाद गांव में संसाधनों की कमी के बावजूद कड़ी मेहनत कर वंदना कटारिया इस मुकाम तक पहुंची हैं। वंदना कटारिया करीब 135 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। जर्मनी में 2013 में जूनियर महिला विश्व कप में कांस्य पदक जीतने वाली महिला बनी। कॉमनवेल्थ गेम में भी वंदना कटारिया का अपनी टीम की तरफ से शानदार प्रदर्शन रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि वंदना अगले मुकाबलों में भी अच्छा प्रदर्शन कर भारतीय टीम को जीत और पदक दिलाने में अहम योगदान देगी।