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धरे रह जाते हैं बरसाती नदियों की बाढ़ से बचाव के इंतजाम
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रियाजुल चौधरी
- फोटो : SAHARANPUR
बेहट (सहारनपुर)। तहसील क्षेत्र का एक बड़ा क्षेत्रफल यमुना और शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली नदियों की बाढ़ से प्रभावित होता है। प्रशासनिक रिकार्ड के मुताबिक 86 गांवों की करीब 1.50 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है। हर साल मानसून सीजन से पहले बाढ़ से निपटने की तैयारी होती है, लेकिन सिंचाई निर्माण खंड द्वारा कराए जाने वाले कार्यों में लीपापोती के कारण परिणाम अच्छा नहीं रहता है। यहीं कारण है कि बचाव कार्य नदियों के तेज बहाव पानी के आगे नहीं टिक पाते।
बाहरी स्थानों से कट जाता है संपर्क
पिछले एक दशक में यमुना नदी में बड़े स्तर पर खनन किया । इससे नदी की गहराई अधिक होने के कारण क्षेत्र में यमुना की बाढ़ का खतरा कम ही रहता है, लेकिन शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली नदियों की बाढ़ से तबाही होती है। भूमि कटाव से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को होता है। कई गांव तो नदी के मुहाने पर है। नदियों में बाढ़ के चलते क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों ऐसे है, जिनका बाहरी स्थानों से संपर्क कट जाता है। कई-कई दिन तक लोग बाहर आ जा नहीं सकते हैं।
पुलों और तटबंधों का निर्माण है स्थायी समाधान
नदियों से घिरे घाड़ इलाके में बाढ़ से बचाव का स्थायी समाधान पुलों और तटबंधों का निर्माण है। कुछ गांवों बाढ़ की समस्या से बाहर निकले है। इनमें हुसैन मलकपुर व शाहपुर, नौगांवा, रामपुर बड़ कलां, जसमौर आदि शामिल हैं। हुसैन मलकपुर व शाहपुर नौगांवा ऐसे गांव हैं, जो चौतरफा बरसाती नदियों से घिरे हैं और नदियों में बाढ़ आने पर यह टापू बन जाते हैं। हाल ही में हुसैन मलकपुर व शाहबुद्दीनपुर के बीच गांगरो नदी पर पुल निर्माण होने से इन गांवों का संपर्क नहीं कटता है। नौगांवा भी बरसाती नदियों से गिरा था। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय जगदीश सिंह राणा के प्रयासों से यहां भी पुल निर्माण होने से समस्या का समाधान हुआ। इसी तरह से पूरे क्षेत्र में नदियों पर पुलों के निर्माण की आवश्यकता है।
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बाढ़ से बचाव के इंतजाम
एसडीएम बेहट दीप्ति देव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में 11 चौकी स्थापित की हैं, इनमें पांच यमुना तटवर्ती क्षेत्र और छह चौकियां बरसाती नदियों की बाढ़ से प्रभावित इलाके में है। पांच राहत शिविर बनाने के लिए स्कूल कॉलेज के भवन चिन्हित किए हैं। प्रत्येक राहत शिविर में 400 से 600 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की जा सकेगी। आपातकाल के लिए नाविक का नाव सहित और गोताखोरों का अनुबंध भी किया है। प्रत्येक बाढ़ चौकियों पर हल्का लेखपाल, स्वास्थ्य कर्मी, पशु चिकित्साधिकारी एवं सिंचाई निर्माण खंड के अवर अभियंता की ड्यूटी लगाई है। इसके अलावा तहसील मुख्यालय पर बाढ़ कंट्रोल रूम बनाया है, इसका नंबर -132 277 2253 है, इस पर 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती है।
...इन गांवों में बनाई बाढ़ चौकियां
बरथा कोरसी, नुनियारी, धौलरा, कस्बागढ़, हबीबपुर तपोवन, हिंदूवाला, अलीपुर नौगांवा, जैतपुर खुर्द, कोठड़ी भागमल, कालूवाला, जहानपुर, खैरी मढ़ती आदि। इसके अलावा राहत शिविर के लिए जय किसान शाकंभरी देवी इंटर कॉलेज फतेहपुर कलां, इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज ताल्हापुर, जनता इंटर कॉलेज बेहट, पब्लिक इंटर कॉलेज साढ़ौली कदीम, यमुना खादर इंटर कॉलेज कम्बोह मजरा आदि को चिन्हित किया है।
बेहट क्षेत्र में बहने वाली नदियां
यमुना नदी के अलावा इस क्षेत्र में शिवालिक पहाड़ियों से बूढ़ी यमुना नदी, गांगरो, मशकरा, चापरी, शाकंभरी, संहश्रा, चाचाराव, हिंडन, सोलानी नदी निकलती हैं।
बाढ़ प्रभावित संवेदनशील गांव
रहणा, नूरपुर भरावड़, खैरी मढ़ती, छज्जा, अकबरपुर बांस, कस्बा गढ़, बरथा कोरसी, असलमपुर बरथा, नुनियारी, धौलरा, रसूलपुर उर्फ रसूली, टटौहल, जोधे बांस, शाहपुर, शाहबुद्दीनपुर, माजरी खुजनावर आदि गांव बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं।
ग्रामीणों की बात
उनके गांव के पास नदी की जलधारा का रुख आबादी की तरफ हो गया है। टांडा मार्ग पर कटाव हो रहा है। रास्ते पर बने रपटे को भी खतरा है। अधिकारियों को बताने के बाद भी सिंचाई निर्माण खंड ने कुछ वायर क्रेट लगाए हैं, इनसे बचाव नहीं होगा। - मोहम्मद आलिम, पूर्व प्रधान नूरपुर भरावड़
बाढ़ से बचाव के लिए हर साल किए जाने वाले कार्य औपचारिकता मात्र है। हजारों हेक्टेयर भूमि कटाव होता है। कटाव को रोकने के लिए पैचिंग लगाई जाती है, जो नदी की पहली बाढ़ में ध्वस्त हो जाती है। - मोहम्मद इनाम, पूर्व प्रधान शाहपुर गाड़ा
गांव हबीबपुर तपोवन के पास बड़कला नदी में पिछले कई साल से खेतों में लगातार कटाव हो रहा है। कई सौ बीघा उपजाऊ जमीन पानी की धार में समा चुकी है। सिंचाई विभाग ने मात्र एक तट बंध लगाया है। अब कटाव तट बंध से आगे शुरू हो गया है। - मोहम्मद रियाजुल चौधरी, पूर्व प्रधान खुवाशपुर
गांव समसपुर नौगांवा से बेगपुर तक बड़कला नदी गांव की आबादी के बीच से होकर गुजर रही है। रास्ते में जूनियर हाईस्कूल एवं बेगपुर के लगभग 50 परिवारों की आबादी को खतरा उत्पन्न हो गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बताने के बाद भी तट बंध नहीं बना है। - मोहम्मद इकराम, बेगपुर नौगांवा
क्षेत्रीय विधायक का दावा
घाड़ क्षेत्र में बरसाती नदियों पर तट बंधों और पुलों के निर्माण का मुद्दा विधानसभा सत्र में उठाया था। इसके बाद 53 गांवों में सात करोड़ के कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, इन पर काम चल रहा है। इसके अलावा भी विगत वर्ष में 11 गांव में तट बंध लगवाए थे। पिछले 15 वर्षों में पहली बार इतना कार्य घाड़ क्षेत्र में हुआ है। - नरेश सैनी, क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक
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बाहरी स्थानों से कट जाता है संपर्क
पिछले एक दशक में यमुना नदी में बड़े स्तर पर खनन किया । इससे नदी की गहराई अधिक होने के कारण क्षेत्र में यमुना की बाढ़ का खतरा कम ही रहता है, लेकिन शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली नदियों की बाढ़ से तबाही होती है। भूमि कटाव से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को होता है। कई गांव तो नदी के मुहाने पर है। नदियों में बाढ़ के चलते क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों ऐसे है, जिनका बाहरी स्थानों से संपर्क कट जाता है। कई-कई दिन तक लोग बाहर आ जा नहीं सकते हैं।
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पुलों और तटबंधों का निर्माण है स्थायी समाधान
नदियों से घिरे घाड़ इलाके में बाढ़ से बचाव का स्थायी समाधान पुलों और तटबंधों का निर्माण है। कुछ गांवों बाढ़ की समस्या से बाहर निकले है। इनमें हुसैन मलकपुर व शाहपुर, नौगांवा, रामपुर बड़ कलां, जसमौर आदि शामिल हैं। हुसैन मलकपुर व शाहपुर नौगांवा ऐसे गांव हैं, जो चौतरफा बरसाती नदियों से घिरे हैं और नदियों में बाढ़ आने पर यह टापू बन जाते हैं। हाल ही में हुसैन मलकपुर व शाहबुद्दीनपुर के बीच गांगरो नदी पर पुल निर्माण होने से इन गांवों का संपर्क नहीं कटता है। नौगांवा भी बरसाती नदियों से गिरा था। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय जगदीश सिंह राणा के प्रयासों से यहां भी पुल निर्माण होने से समस्या का समाधान हुआ। इसी तरह से पूरे क्षेत्र में नदियों पर पुलों के निर्माण की आवश्यकता है।
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बाढ़ से बचाव के इंतजाम
एसडीएम बेहट दीप्ति देव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में 11 चौकी स्थापित की हैं, इनमें पांच यमुना तटवर्ती क्षेत्र और छह चौकियां बरसाती नदियों की बाढ़ से प्रभावित इलाके में है। पांच राहत शिविर बनाने के लिए स्कूल कॉलेज के भवन चिन्हित किए हैं। प्रत्येक राहत शिविर में 400 से 600 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की जा सकेगी। आपातकाल के लिए नाविक का नाव सहित और गोताखोरों का अनुबंध भी किया है। प्रत्येक बाढ़ चौकियों पर हल्का लेखपाल, स्वास्थ्य कर्मी, पशु चिकित्साधिकारी एवं सिंचाई निर्माण खंड के अवर अभियंता की ड्यूटी लगाई है। इसके अलावा तहसील मुख्यालय पर बाढ़ कंट्रोल रूम बनाया है, इसका नंबर -132 277 2253 है, इस पर 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती है।
...इन गांवों में बनाई बाढ़ चौकियां
बरथा कोरसी, नुनियारी, धौलरा, कस्बागढ़, हबीबपुर तपोवन, हिंदूवाला, अलीपुर नौगांवा, जैतपुर खुर्द, कोठड़ी भागमल, कालूवाला, जहानपुर, खैरी मढ़ती आदि। इसके अलावा राहत शिविर के लिए जय किसान शाकंभरी देवी इंटर कॉलेज फतेहपुर कलां, इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज ताल्हापुर, जनता इंटर कॉलेज बेहट, पब्लिक इंटर कॉलेज साढ़ौली कदीम, यमुना खादर इंटर कॉलेज कम्बोह मजरा आदि को चिन्हित किया है।
बेहट क्षेत्र में बहने वाली नदियां
यमुना नदी के अलावा इस क्षेत्र में शिवालिक पहाड़ियों से बूढ़ी यमुना नदी, गांगरो, मशकरा, चापरी, शाकंभरी, संहश्रा, चाचाराव, हिंडन, सोलानी नदी निकलती हैं।
बाढ़ प्रभावित संवेदनशील गांव
रहणा, नूरपुर भरावड़, खैरी मढ़ती, छज्जा, अकबरपुर बांस, कस्बा गढ़, बरथा कोरसी, असलमपुर बरथा, नुनियारी, धौलरा, रसूलपुर उर्फ रसूली, टटौहल, जोधे बांस, शाहपुर, शाहबुद्दीनपुर, माजरी खुजनावर आदि गांव बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं।
ग्रामीणों की बात
उनके गांव के पास नदी की जलधारा का रुख आबादी की तरफ हो गया है। टांडा मार्ग पर कटाव हो रहा है। रास्ते पर बने रपटे को भी खतरा है। अधिकारियों को बताने के बाद भी सिंचाई निर्माण खंड ने कुछ वायर क्रेट लगाए हैं, इनसे बचाव नहीं होगा। - मोहम्मद आलिम, पूर्व प्रधान नूरपुर भरावड़
बाढ़ से बचाव के लिए हर साल किए जाने वाले कार्य औपचारिकता मात्र है। हजारों हेक्टेयर भूमि कटाव होता है। कटाव को रोकने के लिए पैचिंग लगाई जाती है, जो नदी की पहली बाढ़ में ध्वस्त हो जाती है। - मोहम्मद इनाम, पूर्व प्रधान शाहपुर गाड़ा
गांव हबीबपुर तपोवन के पास बड़कला नदी में पिछले कई साल से खेतों में लगातार कटाव हो रहा है। कई सौ बीघा उपजाऊ जमीन पानी की धार में समा चुकी है। सिंचाई विभाग ने मात्र एक तट बंध लगाया है। अब कटाव तट बंध से आगे शुरू हो गया है। - मोहम्मद रियाजुल चौधरी, पूर्व प्रधान खुवाशपुर
गांव समसपुर नौगांवा से बेगपुर तक बड़कला नदी गांव की आबादी के बीच से होकर गुजर रही है। रास्ते में जूनियर हाईस्कूल एवं बेगपुर के लगभग 50 परिवारों की आबादी को खतरा उत्पन्न हो गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बताने के बाद भी तट बंध नहीं बना है। - मोहम्मद इकराम, बेगपुर नौगांवा
क्षेत्रीय विधायक का दावा
घाड़ क्षेत्र में बरसाती नदियों पर तट बंधों और पुलों के निर्माण का मुद्दा विधानसभा सत्र में उठाया था। इसके बाद 53 गांवों में सात करोड़ के कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, इन पर काम चल रहा है। इसके अलावा भी विगत वर्ष में 11 गांव में तट बंध लगवाए थे। पिछले 15 वर्षों में पहली बार इतना कार्य घाड़ क्षेत्र में हुआ है। - नरेश सैनी, क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक

मोहम्मद इकराम- फोटो : SAHARANPUR

मोहम्मद आलिम- फोटो : SAHARANPUR

मोहम्मद इनाम- फोटो : SAHARANPUR

विधायक नरेश सैनी- फोटो : SAHARANPUR