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टीबी से जंग को मजबूत हुए विभाग के हाथ
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ट्रूनेट मशीन दिखाते स्वस्थ्य कर्मी एमपी चावला
- फोटो : SAHARANPUR
ट्रू-नेट मशीन से होगी टीबी की जांच, दो घंटे में मिलेगी रिपोर्ट
सहारनपुर। टीबी की जांच के लिए चिकित्सा विभाग को 11 ट्रू नेट मशीनें मिली हैं, जो 11 सेंटरों पर स्थापित की जा रही हैं। ट्रू नेट मशीन आने के बाद अब मरीजों को टीबी की जांच रिपोर्ट के लिए दो से तीन दिन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मात्र दो घंटे में रिपोर्ट हाथ में आने के बाद इलाज भी तुरंत शुरू हो सकेगा।
अभी तक जनपद में सीबी नेट से टीबी की जांच होती रही है। इसके लिए टीबी अस्पताल, सीएचसी गंगोह और सीएचसी बेहट में प्रयोगशालाएं बनी हैं। जिले में बने 26 टीबी कंट्रोल सेंटरों से मरीजों के नमूने जांच के लिए उक्त तीन प्रयोगशालाओं में आते थे। नमूने अधिक होने और मात्र तीन प्रयोगशाला होने की वजह से जांच रिपोर्ट दो से तीन दिन में आती थी। तीन दिन के इंतजार की वजह से मरीज की तबीयत बिगड़ती चली जाती थी। मगर ट्रू नेट मशीन से मात्र दो घंटे में जांच रिपोर्ट हाथ में होगी। इतना ही नहीं, सामान्य टीबी है या एमडीआर (मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी है, यह भी तुरंत पता चल सकेगा। जबकि अभी तक एमडीआर के लिए अलग से जांच होती थी।
यहां स्थापित होंगी ट्र्रूू नेट मशीन
ट्रू नेट मशीनें सीएचसी सिकंदरपुर, सीएचसी पुवांरका, सीएचसी सुन्हेटी खड़खड़ी, सीएचसी रामपुर मनिहारान, सीएचसी नानौता, सीएचसी नकुड़, पुराना अस्पताल नेहरू मार्केट, सीएचसी देवबंद, सीएचसी हरौड़ा, सीएचसी चिलकाना और सीएचसी साढौली कदीम में लगाई जाएंगी।
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जिले में 3100 टीबी के मरीज
जिले में वर्तमान में टीबी के 3100 मरीज हैं, जिनका इलाज सरकारी अस्पतालों के माध्यम से चल रहा है। हालांकि वर्ष 2020 में जनपद में 7400 मरीज खोजे गए थे, मगर उनमें से ज्यादातर मरीज छह से नौ माह का नियमित उपचार कराकर ठीक हो चुके हैं। वर्तमान में 3100 मरीजों का इलाज चल रहा है।
टीबी की जांच के लिए ट्रू नेट मशीनें आई हैं, जिनसे टीबी की जांच करने में आसानी रहेगी। अभी तक मात्र तीन प्रयोगशालाएं थी, जहां सीबी नेट से जांच होती थी। जांच रिपोर्ट आने में भी समय लगता था। मगर ट्रू नेट मशीनें आने के बाद अब जनपद में 14 जगहों पर टीबी की जांच हो सकेगी।
डॉ. राजेश जैन, जिला क्षय रोग अधिकारी।
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सहारनपुर। टीबी की जांच के लिए चिकित्सा विभाग को 11 ट्रू नेट मशीनें मिली हैं, जो 11 सेंटरों पर स्थापित की जा रही हैं। ट्रू नेट मशीन आने के बाद अब मरीजों को टीबी की जांच रिपोर्ट के लिए दो से तीन दिन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मात्र दो घंटे में रिपोर्ट हाथ में आने के बाद इलाज भी तुरंत शुरू हो सकेगा।
अभी तक जनपद में सीबी नेट से टीबी की जांच होती रही है। इसके लिए टीबी अस्पताल, सीएचसी गंगोह और सीएचसी बेहट में प्रयोगशालाएं बनी हैं। जिले में बने 26 टीबी कंट्रोल सेंटरों से मरीजों के नमूने जांच के लिए उक्त तीन प्रयोगशालाओं में आते थे। नमूने अधिक होने और मात्र तीन प्रयोगशाला होने की वजह से जांच रिपोर्ट दो से तीन दिन में आती थी। तीन दिन के इंतजार की वजह से मरीज की तबीयत बिगड़ती चली जाती थी। मगर ट्रू नेट मशीन से मात्र दो घंटे में जांच रिपोर्ट हाथ में होगी। इतना ही नहीं, सामान्य टीबी है या एमडीआर (मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी है, यह भी तुरंत पता चल सकेगा। जबकि अभी तक एमडीआर के लिए अलग से जांच होती थी।
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यहां स्थापित होंगी ट्र्रूू नेट मशीन
ट्रू नेट मशीनें सीएचसी सिकंदरपुर, सीएचसी पुवांरका, सीएचसी सुन्हेटी खड़खड़ी, सीएचसी रामपुर मनिहारान, सीएचसी नानौता, सीएचसी नकुड़, पुराना अस्पताल नेहरू मार्केट, सीएचसी देवबंद, सीएचसी हरौड़ा, सीएचसी चिलकाना और सीएचसी साढौली कदीम में लगाई जाएंगी।
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जिले में 3100 टीबी के मरीज
जिले में वर्तमान में टीबी के 3100 मरीज हैं, जिनका इलाज सरकारी अस्पतालों के माध्यम से चल रहा है। हालांकि वर्ष 2020 में जनपद में 7400 मरीज खोजे गए थे, मगर उनमें से ज्यादातर मरीज छह से नौ माह का नियमित उपचार कराकर ठीक हो चुके हैं। वर्तमान में 3100 मरीजों का इलाज चल रहा है।
टीबी की जांच के लिए ट्रू नेट मशीनें आई हैं, जिनसे टीबी की जांच करने में आसानी रहेगी। अभी तक मात्र तीन प्रयोगशालाएं थी, जहां सीबी नेट से जांच होती थी। जांच रिपोर्ट आने में भी समय लगता था। मगर ट्रू नेट मशीनें आने के बाद अब जनपद में 14 जगहों पर टीबी की जांच हो सकेगी।
डॉ. राजेश जैन, जिला क्षय रोग अधिकारी।