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सकतपुर में आज से शुरू होगा उत्खनन
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 24 Feb 2017 12:15 AM IST
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स्थल की जांच करती पुरात्तव विभाग की टीम।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में एएसआई की टीम ने बृहस्पतिवार को गांव पहुंचकर उत्खनन से पहले जमीन पर निशानदेही की। उत्खनन का कार्य शुक्रवार से शुरू होगा।
उत्खनन को लेकर ग्रामीणों के साथ ही क्षेत्र की जनता उत्साहित है। साथ ही लोग यह जानने के लिए आतुर हैं कि जमीन से क्या-क्या निकलने वाला है। अमर उजाला में 22 फरवरी को प्रकाशित समाचार से जनपदवासियों को गांव सकतपुर में एएसआई के पहुंचने की जानकारी मिली थी।
उसके बाद से लोगों को एक दिन पहले ही एएसआई टीम के पहुंचने का इंतजार शुरू हो गया था। एएसआई की टीम बृहस्पतिवार की सुबह करीब साढ़े 11 बजे पहुंची। एएसआई आगरा के पुरातत्वविद् डॉ. भुवन विक्रम के नेतृत्व में पहुंची टीम ने गांव पहुंचकर जमीन पर निशानदेही कराई।
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गांव सकतपुर निवासी नंद कुमार ने अपना खेत ईंट पथाई के लिए एक भट्ठा संचालक को खनन के लिए दिया था। आठ जून 2016 को कुछ मजदूर ईंट पथाई के लिए खेत से मिट्टी खोद रहे थे।
इसी दौरान उन्हें धातु के कुछ टुकड़े, मृदभांड के टुकड़े और सिक्के आदि मिले थे। इसकी जानकारी जैसे ही ग्राम प्रधान को लगी तो उन्होंने तत्कालीन एसडीएम को इसकी जानकारी दी थी।
एसडीएम के नेतृत्व में पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी, जिसने तमाम चीजों को आगरा भेजा था। धातु के टुकड़े तांबे के पाए गए थे, जो एक कुल्हाड़ी थी।
इस कुल्हाड़ी को हड़प्पा काल की माना गया था, जिसकी उम्र करीब चार हजार साल पुरानी मानी गई थी। इसके बाद प्रशासन ने करीब 12 बीघा जमीन को सील करा दिया था। तब से एएसआई की नजर इस साइट पर थी।
अंतत: बृहस्पतिवार को टीम उत्खनन करने के लिए गांव पहुंच ही गई। पहले दिन जमीन पर निशानदेही की गई। उत्खनन का कार्य शुक्रवार से होगा। टीम के पहुंचने का लोगों को बेसब्री से इंतजार था। टीम के गांव में रहने के दौरान ग्रामीणों की भीड़ लगी रही।
उत्खनन के लिए पहुंची टीम का नेतृत्व एएसआई आगरा के पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम कर रहे हैं। उनके साथ मेरठ उप मंडल के सहायक एसके नामदेव, अरखित प्रधान, ड्राफ्ट मैन लोचन सिंह, फोटोग्राफर मोहित कुमार, मनोज कुमार और भवानी शंकर भी शामिल रहे, जिन्होंने खेत पर ही डेरा डाल दिया है।
पूर्व प्रधान हरीश कुमार, अमर कुमार, नंद कुमार ने बताया कि जिस जमीन का उत्खनन होना है। उस जमीन से काफी समय से मृदभांड के टुकड़े बड़ी मात्रा में निकलते रहे हैं।
मगर जानकारी न होने की वजह से लोगों ने ध्यान नहीं दिया। बताया कि मृदभांड के कुछ टुकड़ों पर कलाकृतियां भी बनी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह उत्खनन को लेकर उत्साहित हैं।
एएसआई टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. भुवन विक्रम को सकतपुर की इस साइट से खासी उम्मीद हैं। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के बाद उत्खनन का कार्य किया जाएगा। पूर्व में मृदभांड के टुकड़े और तांबे की कुल्हाड़ी निकली है। अब अन्य कई महत्वपूर्ण चीजें प्राप्त हो सकती हैं।
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उत्खनन को लेकर ग्रामीणों के साथ ही क्षेत्र की जनता उत्साहित है। साथ ही लोग यह जानने के लिए आतुर हैं कि जमीन से क्या-क्या निकलने वाला है। अमर उजाला में 22 फरवरी को प्रकाशित समाचार से जनपदवासियों को गांव सकतपुर में एएसआई के पहुंचने की जानकारी मिली थी।
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उसके बाद से लोगों को एक दिन पहले ही एएसआई टीम के पहुंचने का इंतजार शुरू हो गया था। एएसआई की टीम बृहस्पतिवार की सुबह करीब साढ़े 11 बजे पहुंची। एएसआई आगरा के पुरातत्वविद् डॉ. भुवन विक्रम के नेतृत्व में पहुंची टीम ने गांव पहुंचकर जमीन पर निशानदेही कराई।
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गांव सकतपुर निवासी नंद कुमार ने अपना खेत ईंट पथाई के लिए एक भट्ठा संचालक को खनन के लिए दिया था। आठ जून 2016 को कुछ मजदूर ईंट पथाई के लिए खेत से मिट्टी खोद रहे थे।
इसी दौरान उन्हें धातु के कुछ टुकड़े, मृदभांड के टुकड़े और सिक्के आदि मिले थे। इसकी जानकारी जैसे ही ग्राम प्रधान को लगी तो उन्होंने तत्कालीन एसडीएम को इसकी जानकारी दी थी।
एसडीएम के नेतृत्व में पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी, जिसने तमाम चीजों को आगरा भेजा था। धातु के टुकड़े तांबे के पाए गए थे, जो एक कुल्हाड़ी थी।
इस कुल्हाड़ी को हड़प्पा काल की माना गया था, जिसकी उम्र करीब चार हजार साल पुरानी मानी गई थी। इसके बाद प्रशासन ने करीब 12 बीघा जमीन को सील करा दिया था। तब से एएसआई की नजर इस साइट पर थी।
अंतत: बृहस्पतिवार को टीम उत्खनन करने के लिए गांव पहुंच ही गई। पहले दिन जमीन पर निशानदेही की गई। उत्खनन का कार्य शुक्रवार से होगा। टीम के पहुंचने का लोगों को बेसब्री से इंतजार था। टीम के गांव में रहने के दौरान ग्रामीणों की भीड़ लगी रही।
उत्खनन के लिए पहुंची टीम का नेतृत्व एएसआई आगरा के पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम कर रहे हैं। उनके साथ मेरठ उप मंडल के सहायक एसके नामदेव, अरखित प्रधान, ड्राफ्ट मैन लोचन सिंह, फोटोग्राफर मोहित कुमार, मनोज कुमार और भवानी शंकर भी शामिल रहे, जिन्होंने खेत पर ही डेरा डाल दिया है।
पूर्व प्रधान हरीश कुमार, अमर कुमार, नंद कुमार ने बताया कि जिस जमीन का उत्खनन होना है। उस जमीन से काफी समय से मृदभांड के टुकड़े बड़ी मात्रा में निकलते रहे हैं।
मगर जानकारी न होने की वजह से लोगों ने ध्यान नहीं दिया। बताया कि मृदभांड के कुछ टुकड़ों पर कलाकृतियां भी बनी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह उत्खनन को लेकर उत्साहित हैं।
एएसआई टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. भुवन विक्रम को सकतपुर की इस साइट से खासी उम्मीद हैं। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के बाद उत्खनन का कार्य किया जाएगा। पूर्व में मृदभांड के टुकड़े और तांबे की कुल्हाड़ी निकली है। अब अन्य कई महत्वपूर्ण चीजें प्राप्त हो सकती हैं।